IWP Fellows 2026

IWP Fellows 2026

सत्यम कुमार
फेलो - हिंदी
सत्यम कुमार झा बिहार और झारखंड में काम करने वाले स्वतंत्र पत्रकार हैं। वे पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं और डाउन टू अर्थ हिंदी, डाउन टू अर्थ मैगजीन, मोंगाबे हिंदी तथा इंडियास्पेंड हिंदी जैसे माध्यमों के लिए लिख चुके हैं। उत्तर बिहार में पले-बढ़े सत्यम ने हर साल आने वाली बाढ़ के साथ-साथ हाल के वर्षों में बढ़ती गर्मियों की जल-किल्लत को भी करीब से देखा है। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें जल स्रोतों, जल संरचनाओं और समुदायों से जुड़ी कहानियों की ओर आकर्षित किया। फेलोशिप के माध्यम से वे फील्ड रिपोर्टिंग, डेटा विश्लेषण और समुदाय-केंद्रित कहानी कहने के अपने कौशल को मजबूत करना चाहते हैं।
सौम्या ज्योत्सना
फेलो - हिंदी
सौम्या ज्योत्सना वर्ष 2019 से लेखन और पत्रकारिता से जुड़ी हैं। उन्होंने महिलाओं और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर काम किया है, जिसके लिए उन्हें 2020, 2021 और 2022 में UNFPA लाडली मीडिया अवार्ड मिला। अब वे अपने अनुभव के माध्यम से पानी से जुड़ी उन कहानियों को सामने लाना चाहती हैं जिन पर अभी पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है। सौम्या के लिए पानी को किसी एक नजरिए से नहीं समझा जा सकता। इसका समाज, समुदाय और रोजमर्रा के जीवन से गहरा संबंध है। India Water Portal Fellowship के माध्यम से वे जल से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को तलाशते हुए नई और कम सुनी गई कहानियां सामने लाना चाहती हैं।
सचिन गरकोटी
फेलो - हिंदी
सचिन गरकोटी उत्तराखंड के चंपावत जिले के गरकोट गांव से आने वाले फोटोग्राफर, लेखक और शोधकर्ता हैं। पहाड़ों, प्रकृति और स्थानीय समुदायों से उनका गहरा जुड़ाव है। वे Untold Stories of Kumaon नामक पहल पर काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य प्रवासन, स्थानीय स्मृतियों, सांस्कृतिक विरासत और अनकही कहानियों का एक अभिलेख तैयार करना है। फोटोग्राफी, लेखन और सामाजिक शोध के माध्यम से सचिन जलवायु परिवर्तन, पानी, जाति और लैंगिक असमानता तथा ग्रामीण जीवन के सवालों को समझते हैं। पहाड़ों में बदलते जल स्रोतों और बढ़ती जल-किल्लत को करीब से देखने के अनुभव उनकी जल-केंद्रित कहानियों का आधार हैं।
करुणा कुमारी कंद्रेगुला
फेलो - अंग्रेज़ी
करुणा कुमारी कंद्रेगुला आंध्र प्रदेश की स्वतंत्र शोधकर्ता और लेखिका हैं। उनका काम शासन, सार्वजनिक नीति, ग्रामीण विकास, तकनीक, जलवायु और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित है। अपनी रिपोर्टिंग और फील्ड रिसर्च के माध्यम से वे यह समझने की कोशिश करती हैं कि नीतियां, संस्थाएं और स्थानीय परिस्थितियां लोगों के रोजमर्रा के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं। ग्रामीण समुदायों में आजीविका, आवागमन, कृषि और बुनियादी सेवाओं पर पानी के प्रभाव ने जल संबंधी मुद्दों में उनकी रुचि को गहरा किया। फेलोशिप के दौरान करुणा गोदावरी डेल्टा के लंका गांवों से जमीनी और कम रिपोर्ट की गई कहानियां सामने लाना चाहती हैं।
वेनी ई एन
फेलो - अंग्रेज़ी
वेनी ई एन केरल की पत्रकार हैं, जिन्होंने जूलॉजी की पढ़ाई के बाद मल्टीमीडिया पत्रकारिता में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने चेन्नई में The South First के लिए स्वास्थ्य संवाददाता के रूप में काम करते हुए तमिलनाडु में सार्वजनिक स्वास्थ्य और नीतियों पर रिपोर्टिंग की है। अलग-अलग समुदायों के बीच काम करते हुए उन्होंने देखा कि स्वास्थ्य, आजीविका और स्थानीय पर्यावरण से जुड़ी कई कहानियों के केंद्र में पानी होता है। India Water Portal Fellowship के माध्यम से वे जल शासन की अपनी समझ को गहरा करना और पर्यावरण रिपोर्टिंग के कौशल को मजबूत करना चाहती हैं। उनकी रुचि वैज्ञानिक शोध को समुदायों के अनुभवों से जोड़ने वाली जमीनी और सुलभ कहानियां तैयार करने में है।
मंथती साई किरण
फेलो - अंग्रेज़ी
मंथती साई किरण ग्रामीण तेलंगाना से आने वाले पत्रकार हैं और उन्होंने डेवलपमेंट स्टडीज तथा पत्रकारिता की पढ़ाई की है। उनकी रिपोर्टिंग जलवायु परिवर्तन, पानी, पर्यावरणीय न्याय, सार्वजनिक नीति और ग्रामीण आजीविका के आपसी संबंधों पर केंद्रित है। बस्तर और मलकानगिरी जैसे क्षेत्रों से उनकी रिपोर्ट्स The Hindu Frontline, Village Square और The Migration Story में प्रकाशित हुई हैं। ग्रामीण तेलंगाना में पले-बढ़े साई किरण ने वर्षा-आधारित खेती, मौसमी प्रवासन और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच के जरिए पानी की भूमिका को करीब से देखा है। फेलोशिप के माध्यम से वे जमीनी अनुभवों को व्यापक पर्यावरणीय और नीतिगत बहसों से जोड़ने वाली प्रमाण-आधारित पत्रकारिता को मजबूत करना चाहते हैं।
राहुल कुमार
फेलो - विज़ुअल
राहुल कुमार एक डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलर हैं, जो ग्रामीण भारत के समुदायों और उनके जीवन से जुड़ी वास्तविक कहानियों को दर्ज करते हैं। लोगों के जीवन को कैमरे के माध्यम से देखते हुए उन्होंने महसूस किया कि खेती, आजीविका, स्वास्थ्य और जलवायु जैसे कई मुद्दों के केंद्र में पानी मौजूद है। इस अनुभव ने उन्हें कैमरे से दिखाई देने वाली तस्वीर से आगे जाकर जल से जुड़े सवालों को गहराई से समझने के लिए प्रेरित किया। फेलोशिप के माध्यम से राहुल विशेषज्ञों और अलग-अलग दृष्टिकोणों से सीखते हुए जटिल जल मुद्दों को सरल, प्रभावी और अर्थपूर्ण विजुअल कहानियों के रूप में प्रस्तुत करने की अपनी क्षमता को मजबूत करना चाहते हैं।
रौजात उल हुसैन मोंडल
फेलो - विज़ुअल
रौजात उल हुसैन मोंडल असम के डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर और विजुअल स्टोरीटेलर हैं और चरुआ समुदाय से आते हैं। अपने समुदाय के इतिहास और ब्रह्मपुत्र नदी के साथ उसके संबंध को समझने की जिज्ञासा ने उन्हें नदी के बदलते चार क्षेत्रों के जीवन को दर्ज करने की ओर प्रेरित किया। Green Hub Fellowship के दौरान उन्होंने मैंग्रोव पुनर्स्थापन पर Roots of Resilience – The Mangrove Story बनाई और बाद में चरुआ जीवन पर दीर्घकालिक Project Bheramara शुरू किया। फोटोग्राफी, फिल्म और मौखिक इतिहास के माध्यम से वे पानी, पहचान, स्मृति, आजीविका और जैव विविधता के संबंधों के साथ कटाव, पर्यावरणीय बदलाव और जलवायु-जनित विस्थापन को दर्ज करते हैं।
फाज़िल एन.सी.
फेलो - विज़ुअल
फाज़िल एन.सी. केरल के डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर और Bahr Films के संस्थापक हैं। एक दशक से अधिक समय से वे भारत के अलग-अलग हिस्सों में समुदायों, तटीय क्षेत्रों और संस्कृति से जुड़ी कहानियां दर्ज कर रहे हैं। उनके काम में जलवायु, कश्मीरी युवा संस्कृति, आदिवासी उत्सव और नेहरू ट्रॉफी बोट रेस जैसे विषय शामिल हैं। वे विकास संगठनों के साथ काम कर चुके हैं, लक्षद्वीप में स्वतंत्र प्रोजेक्ट कर चुके हैं और National Geographic तथा History TV जैसे प्रसारकों के लिए भी काम कर चुके हैं। फेलोशिप के माध्यम से फाज़िल जल विज्ञान और नीति की अपनी समझ को मजबूत करते हुए दूरदराज और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों से प्रभावी विजुअल कहानियां सामने लाना चाहते हैं।
किरण अडमाचे
फेलो - विज़ुअल
किरण अडमाचे मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से आने वाली गोंड आदिवासी समुदाय की फिल्ममेकर हैं। वे युवा फिल्म निर्माताओं के समूह CICADA का हिस्सा हैं और PARI Network तथा Locavore जैसे संगठनों के साथ काम कर चुकी हैं। फिल्म, फोटोग्राफी और डिजिटल मीडिया के माध्यम से वे समुदायों की कहानियों, संस्कृति और रोजमर्रा के अनुभवों को दर्ज करती हैं। विजुअल स्टोरीटेलिंग के जरिए किरण खास तौर पर कम सुनी जाने वाली आवाजों को सामने लाने और आदिवासी ज्ञान एवं परंपराओं को संरक्षित करने में रुचि रखती हैं। IWP Fellowship के माध्यम से वे समुदायों के अनुभवों, ज्ञान और दृष्टिकोण से पानी को समझते हुए स्थान, संस्कृति और स्मृति से जुड़ी कहानियां सामने लाना चाहती हैं।
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