आगरा में आर्सेनिक-फ्लोराइड अधिक
भू-गर्भ जल का दोहन चिन्ताजनक, गाजीपुर व बलिया से शुरू होगी आर्सेनिक मुक्त पेयजल योजना सफलता पर पूरे देश में होगा लागू, शौचालय सफाई में तेजाब के प्रयोग पर जल्दी गाइड-लाइन
.आगरा। प्रदेश के 18 जिले आर्सेनिक की समस्या से ग्रस्त हैं। 33 लाख आबादी वाले बलिया जिले में करीब 70 प्रतिशत लोग जहरीले आर्सेनिक की चपेट में हैं। आगरा आर्सेनिक और फ्लोराइड दोनों समस्याओं से जूझ रहा है। शासन स्तर पर नागरिकों को आर्सेनिक मुक्त पेयजल उपलब्ध कराने को जल्द योजना शुरू होने वाली है, ताकि भू-गर्भ जल में व्याप्त विषाक्त रसायनों से लोगों की स्वास्थ्य रक्षा सम्भव हो सके। यह कहना है केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के अध्यक्ष केबी विश्वास का है। वह शुक्रवार को एक कार्यशाला में भाग लेने आगरा आए थे।

सीजीडब्ल्यूबी के प्रमुख केबी विश्वास ने स्वीकार किया कि चारों ओर भविष्य की अनदेखी कर हम तात्कालिक लाभ कमाने में जुटे हैं। इसका परिणाम भूमिगत जल का अति दोहन के रुप में सामने आ रहा है। भूमिगत जल के अति दोहन का दूसरा दुष्परिणाम यह है कि धरती के गर्भ में पड़े रसायन ऊपर आ जाते हैं। इनमें तमाम विषैले रसायन आर्सेनिक एवं फ्लोराइड ऊपर आ जाते हैं। बकौल विश्वास देश के बड़े हिस्से में यह रसायन पीने के पानी में प्रवेश कर रहे लोगों को रोगी बना रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार अगर पेयजल में आर्सेनिक पाँच पीपीबी (जल के 100 करोड़ कणों में आर्सेनिक के पाँच कण) से अधिक होने पर मानव शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं।

उन्होंने बताया कि भारत में भूजल में आर्सेनिक पाये जाने की प्रथम जानकारी वर्ष 1980 में पश्चिम बंगाल से प्राप्त हुई थी। वर्तमान में देश के 86 जिले आर्सेनिक और 282 फ्लोराइड से प्रभावित हैं। आगरा में फ्लोराइड की समस्या कई ग्रामों में है। वर्तमान में एत्मादपुर, फतेहाबाद व खेरागढ़ में आर्सेनिक की समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। भूगर्भ जल समस्या से निजात पाने के लिए मन्त्रालय अगले वर्ष प्रयोग के तौर पर बलिया और गाजीपुर में स्वयं का प्लाण्ट लगाकर लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने जा रहे हैं। इसमें जल निगम का सहयोग लिया जाएगा।

उन्होंने दावा किया कि यूपी को आर्सेनिक मुक्त पेयजल की योजना पर जल्द ही मन्त्रालय की बैठक होने वाली है। इसमें सभी सम्बंधित विभागों और अधिकारियों को गाइड-लाइन जारी कर दी जाएगी। इसके तहत योजना को अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। विश्वास ने बताया कि विशिष्ट भूमि जल विकास और प्रबन्धन की योजना तैयार कर भूजल प्रबन्धन अध्ययन के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में जल संचयन के लिए जागरूकता कार्यक्रम के दायरे को बढ़ाया जाएगा।

शहरी जीवन में शौचालय की सफाई में प्रवेश करने के प्रश्न पर कहा कि यह विषय अब तक संज्ञान में नहीं था, लेकिन इस आवश्यक बिन्दु पर भी इसी वर्ष गाइड-लाइन जारी की जाएगी। उन्होंने माना कि सफाई के नाम पर रासायनिक फर्टिलाइजरों का अति उपयोग हो रहा है। इसके कारण भूमि में पलने वाले कीटाणु मर रहे हैं और भूमि की दीर्घकालीन उत्पादकता का ह्रास हो रहा है।

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