प्रदूषण और जलगुणवत्ता

डंपिंग साइट्स के रूप में देशभर के शहरों में कूड़े के पहाड़ देखने को मिल जाते हैं, जो मिट्टी, हवा में प्रदूषण फैलाने के साथ ही अपने ज़हरीले रसायनों से भूजल को भी प्रदूषित कर रहे हैं। 
छत्‍तीसगढ़  में औद्योगिक कारखानों के कचरे और रासायनिक प्रदूषण से ज़हरीला हो रहा है नदियों और जलस्रोतों का पानी।
गंगा की सफाई के लिए कई दशकों से विभिन्‍न सरकारी योजनाओं के तहत अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, फिर भी यह नदी प्रदूषण मुक्‍त नहीं हो पाई है।
पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले प्रदूषण को कैसे कम किया जाये?
कश्मीर में ट्राउट मछली पालन केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उभरती हुई एक पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था है, जिसकी बुनियाद इन पहाड़ी जलधाराओं पर टिकी है।
तमिलनाडु के उत्तरी तट पर स्थित एन्नोर क्रीक आज यह दिखा रही है कि औद्योगिक विस्तार की दौड़ में तटीय पारिस्थितिकी और मछुआरा समुदायों की आजीविका किस मोड़ पर आ खड़ी हुई है।
भूजल में मिला यूरेनियम कुएं या बोरिंग से निकले पानी के साथ हमारे शरीर में पहुंच कर सेहत को नुकसान पहुंचाता है। 
एंटीबायोटिक प्रतिरोध केवल अस्पतालों या दवा उपयोग की समस्या नहीं है। पर्यावरण, विशेष रूप से जल तंत्र, अब इस संकट का एक सक्रिय हिस्सा बनता जा रहा है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि शहरी इलाक़ों में पुरानी पाइपलाइनें, उच्च जनसंख्या घनत्व और अपर्याप्त नेटवर्किंग दूषित पानी के सेवन की समस्या को बढ़ाती हैं।
पेयजल की पाइप लाइन में सीवर लाइन का गंदा पानी मिल जाने पर नलों से मिलने वाला पानी गंभीर बीमारियों की वजह बन जाता है, जैसा कि इंदौर में देखने को मिला है।
बिहार में स्तनपान कराने वाली मांओं के स्तन के दूध में यूरेनियम नामक भारी धातु की उपस्थिति चिंताजनक है।
पानी की बढ़ी मात्रा के कारण पैदा होने वाले संकट से पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के वही इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं जहां पाइप से होने वाली जलापूर्ति अपर्याप्त या सीमित है।
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