प्रदूषण और जलगुणवत्ता

भूजल में मिला यूरेनियम कुएं या बोरिंग से निकले पानी के साथ हमारे शरीर में पहुंच कर सेहत को नुकसान पहुंचाता है। 
एंटीबायोटिक प्रतिरोध केवल अस्पतालों या दवा उपयोग की समस्या नहीं है। पर्यावरण, विशेष रूप से जल तंत्र, अब इस संकट का एक सक्रिय हिस्सा बनता जा रहा है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि शहरी इलाक़ों में पुरानी पाइपलाइनें, उच्च जनसंख्या घनत्व और अपर्याप्त नेटवर्किंग दूषित पानी के सेवन की समस्या को बढ़ाती हैं।
पेयजल की पाइप लाइन में सीवर लाइन का गंदा पानी मिल जाने पर नलों से मिलने वाला पानी गंभीर बीमारियों की वजह बन जाता है, जैसा कि इंदौर में देखने को मिला है।
बिहार में स्तनपान कराने वाली मांओं के स्तन के दूध में यूरेनियम नामक भारी धातु की उपस्थिति चिंताजनक है।
पानी की बढ़ी मात्रा के कारण पैदा होने वाले संकट से पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के वही इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं जहां पाइप से होने वाली जलापूर्ति अपर्याप्त या सीमित है।
तेलंगाना के संगारेड्डी ज़िले की नल्लाकुंटा झील का पानी रासायनिक प्रदूषण के चलते लाल होने से झील से खेतों की सिंचाई करने वाले दर्ज़नों किसानों की फसल खराब हो गई है। हाल ही में किसानों ने इसके खिलाफ़ प्रदर्शन किया।
छत्‍तीसगढ़ की इस्‍पात नगरी भिलाई में औद्योगिक कारखानों के कचरे और रासायनिक प्रदूषण से ज़हरीला हो रहा है जलस्रोतों का पानी।
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