मॉक ड्रिल में दिखाया भूकम्प से निपटने का दम
राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण और दिल्ली आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की ओर से राजधानी के छह मेट्रो स्टेशनों सहित कई स्थानों पर सुबह साढ़े 11 बजे मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। आपदा प्रबन्धन का यह पूर्वाभ्यास करीब 20 मिनट तक चला। मॉक ड्रिल का मकसद अचानक 7.9 तीव्रता का भूकम्प आ जाने पर एजेंसियों की तैयारियों को परखना था।भूकम्प आने पर बनने वाले हालात से निपटने के लिए दिल्ली की सभी इमरजेंसी एजेंसियाँ कितनी तैयार हैं, इसे परखने के लिए पिछले महीने राजधानी में हुए मेगा मॉक ड्रिल में दिल्ली ने अपना दम दिखाया। अलबत्ता, मॉक ड्रिल के दौरान कहीं पूरी तैयारी दिखी तो कहीं मुस्तैदी में कुछ कमी नजर आईं। कई विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी भी उजागर हुई। सबसे बढ़िया प्रदर्शन नागरिक सुरक्षा के कार्यकर्ताओं का रहा। मेगा मॉक ड्रिल के तहत राजधानी के करीब 395 स्थानों पर एक साथ आपदा से निपटने का अभ्यास किया गया, ताकि लोग वास्तविक आपदा के लिए तैयार हो सकें। भूकम्प से निपटने के इस रिहर्सल में करीब 40 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इस मेगा ड्रिल पर नजर रखने के लिए सेना के अधिकारियों को स्वतन्त्र निरीक्षक के तौर पर तैनात किया गया था, जो तैयारियों को लेकर सन्तुष्ट नहीं दिखे। राजस्व विभाग मेगा ड्रिल की रिपोर्ट तैयार करेगा।

मॉक ड्रिल में दिखाया भूकम्प से निपटने का दमपहले से तय योजना के अनुसार ठीक साढ़े 11 बजे ही राजधानी के मेट्रो स्टेशनों, स्कूल, कॉलेजों, सिनेमाघरों, मॉल, सीएनजी स्टेशन, पेट्रोल पम्प, ऊँची इमारतों, बाजारों व एयरपोर्ट पर सायरन बजने लगे और एलान होने लगा कि दिल्ली में जबरदस्त भूकम्प के झटके लग रहे हैं। सभी लोग तुरन्त इमारतों को खाली कर खुले या सुरक्षित स्थानों पर निकल जाएँ। बताया गया कि रिएक्टर स्केल पर 7.9 तीव्रता का भूकम्प आया है, जिसका केन्द्र दिल्ली से मुरादाबाद के बीच है और झटके करीब 48 सेकेण्ड महसूस किए गए।

सभी इमरजेंसी सेवाओं, जैसे पुलिस, फायर, एम्बुलेंस, एनडीआरएफ एजेंसियों के फोन घनघनाने लगे। सड़कों पर पीसीआर वैन, फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ दौड़ने लगीं। बड़ी-बड़ी इमारतों के आगे भीड़ जमा होने लगी। कई इमारतों में सजावटी सीलिंग टूटने लगी, कुछ इमारतों की खिड़कियों में लगे शीशे चटकने लगे, सीएनजी स्टेशन पर रिसाव और फिर आग लगने, ऊँची इमारतों में शॉर्ट सर्किट से आग लगने और धुआं भर जाने की खबरें मिलने लगी। कहीं फुटओवर ब्रिज का एक हिस्सा टूटने से लोगों के घायल होने तो कहीं पिलर में दरार आने, फ्लाईओवर पर गाड़ियों के आपस में टकराने और कुछ इमारतों में दीवार या भारी सामान के नीचे लोगों के दबे होने की कॉल आने लगी। इमारतों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों व एम्बुलेंस के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया। डमी के रूप में फंसे लोगों को निकाल कर उन्हें अस्पताल व राहत शिविरों में पहुँचाने में नागरिक सुरक्षा दल जुट गए। इस कवायद में करीब एक से डेढ़ घण्टे तक दिल्ली की रफ्तार थमी रही।

दिल्ली में एक-दो नहीं बल्कि एक साथ दो सौ से अधिक जगहों पर यह मॉक ड्रिल हुई। नजारा कुछ ऐसा था कि इन जगहों पर तय रणनीति के तहत कुछ लोग बाहर से अन्दर की ओर भागते और अगले चन्द मिनटों में राहतकर्मी भवन के भीतर मौजूद घायलों को कन्धे पर लाद कर बाहर लाते। कुछ ही पल बाद सायरन बजाती अग्निशमन दल की गाड़ियाँ पहुँच जातीं। जहाँ आग लगी थी वहाँ अग्निशमन दल ने तेजी दिखाई और झट से इसे बुझा दिया। मौके पर पुलिस का घेरा बना लेना और भवन को सील कर देना हर जगह आम था। पुलिस अधिकारी कण्ट्रोल रूम को इस बात की सूचना दे रहे थे कि मौका-ए-वारदात पर उनका दल पहुँच गया है और हालात पर काबू करने का प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सा दल भी मौके पर प्रारम्भिक चिकित्सा इन्तजामों के साथ पहुँच गए। भीड़ को चीरती अस्पताल की एम्बुलेंस भी यहाँ पहुँच गई और कराह रहे लोगों को अस्पताल ले गई। इस अभियान से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक कुछ जगहों पर भले ही यह अभियान सफल रहा हो लेकिन कई जगहों पर खामियाँ भी पाई गई हैं, जिन्हें लेकर अधिकारी बेहद गम्भीर हैं। इस मॉक ड्रिल के बारे में मौके पर मौजूद ज्यादातर चश्मदीदों का कहना था कि यह तो नकली है। जब असलियत में ऐसा भूकम्प आएगा तो कोई नजर नहीं आएगा। सारी तैयारियाँ धरी की धरी रह जाएँगी।

राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण और दिल्ली आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की ओर से राजधानी के छह मेट्रो स्टेशनों सहित कई स्थानों पर सुबह साढ़े 11 बजे मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। आपदा प्रबन्धन का यह पूर्वाभ्यास करीब 20 मिनट तक चला। मॉक ड्रिल का मकसद अचानक 7.9 तीव्रता का भूकम्प आ जाने पर एजेंसियों की तैयारियों को परखना था। राजधानी के छह मेट्रो स्टेशन लगभग आधे घण्टे तक बन्द रहे। मध्य, दक्षिण और उत्तर दिल्ली के कई सड़क मार्गों को भी मॉक ड्रिल के दौरान बन्द कर दिया गया था। इससे लोगों को काफी परेशानी भी हुई। इस बाबत पहले से ही आम जनता को जानकारी दे दी गई थी। इसलिए कुछ असामान्य गतिविधियाँ नहीं हुईं और आपदा प्रबन्धन में लगी एजेंसियों का यह कार्य शान्तिपूर्ण सम्पन्न हो गया।

मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित ने राजधानी में हुई मेगा मॉक ड्रिल को सफल बताते हुए कहा कि यह देश में अब तक की सबसे बड़ी माकॅ ड्रिल थी, जिसमें करीब 15 हजार से अधिक अधिकारियों के अलावा हजारों की संख्या में नागरिक सुरक्षा कायर्कर्ताओं ने हिस्सा लिया। कहीं पर फोन करने के बावजूद भी आधा से पौने घण्टे तक एम्बुलेंस या बचाव दल के न पहुँचने या विभागों के बीच आपसी तालमले की कमी के सम्बन्ध में पूछने पर उन्होंने कहा कि आज की ड्रिल ही यह जानने के लिए की गई थी कि कहीं कोई कमी तो नहीं है और लोगों की प्रतिक्रिया कैसा है। मॉक ड्रिल का बारीकी से विश्लेष्ण होगा, फिर खामियों का वास्तविकता में पता चलेगा। कोशिश होगी कि अगली मॉक ड्रिल में सुधार कर लिया जाए।

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