सड़कें अभी भी रोक रहीं जल प्रवाह, सिर्फ तीन हुईं जलमग्न

पूर्व मंत्री कमल पटेल ने एनजाटी में की लिखित शिकाय़त
.नवदुनिया ग्राउंड रिपोर्ट ! हरदा ! नवदुनिया प्रतिनिधि ! छीपानेर रेत उत्खनन मामले में प्रशासनिक कार्यवाही का असर महज दिखावा साबित हो रहा है। नदी के बीच बनी अस्थायी 28 सड़कों में से महज तीन सड़कें जलमग्न हुईं, जबकि कई सड़कें अभी भी नर्मदा का जल प्रवाह रोक रही हैं। नर्मदा के बीच में पोकलेन मशीनों के माध्यम से नर्मदा नदी से रेत का उत्खनन कर खोखला किया जा रहा है, आज वहाँ सन्नाटा पसर गया है। खदान पर न तो अब कोई मशीन नजर आ रही है और न ही कोई वाहन। इतना ही नहीं वहाँ रहने वाले मजदूर भी दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। नदी के बीच बनी सड़कें और रेत के ढेर अभी भी लगे हैं। कलेक्टर के आदेश के बाद ठेकेदार ने रविवार को महज तीन सड़कों को तोड़ा है, जबकि शेष सड़कें जस की तस हैं। जिसके कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है। उधर सोमवार को भाजपा नेता और पूर्व मंत्री कमल पटेल सोमवार को भोपाल पहुँचे। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और खनिज विभाग के सचिव से मुलाकात कर रेत के अवैध उत्खनन को लेकर आवेदन देकर कलेक्टर, एसपी पर भी कार्यवाही की मांग की है।

छीपानेर के रेत खदान पर काम करने वाले मजदूर भी अब वहाँ दिखाई नही दे रहे हैं। खदान पर सन्नाटा पसरा हुआ है। मजदूर भुरू ने बताया कि उनका समूह एक दिन में 4-5 डम्पर रेत भर देता था, लेकिन अब कोई काम नहीं है। पोकलेन मशीन के माध्यम से रेत निकालकर ढेर लगा दिया जाता था। जिसके बाद मजदूरों से डम्पर भरवा दिए जाते थे। जिस दिन से मीडियाकर्मी और पूर्व मंत्री वहाँ पहुँचे उस दिन पोकलेन मशीन गायब हो गई। छीपानेर के आस-पास जहाँ स्टॉक किया है, वहाँ से डम्फरों में रेत भराकर परिवहन किया जा रहा है। बीते कुछ दिनों से हर डम्पर में एक निर्धारित क्षमता के अनुसार ही रेत भरकर परिवहन हो रहा है।

एनजीटी करेगा कार्यवाही


पूर्व मंत्री की शिकायत के बाद एनजीटी मामले को गंभीरता से लेकर कार्यवाही करेगा। नर्मदा में रेत के अवैध खनन और सड़कों के निर्माण को लेकर दिए पूर्व मंत्री के आवेदन पर एनजीटी के सदस्यों ने कार्रवाई करने की बात कही है। पूर्व मंत्री ने खनिज विभाग के सचिव मनोहर दुबे से मिलकर आवेदन दिया और कहा कि हरदा के साथ सिहोर, होशंगाबाद और देवास जिले में भी करोड़ों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है। इन चारों जिले के रेत ठेके निरस्त कर चारों जिलों के अधिकारियों को वहाँ से हटाया जाये।

कार्रवाई पर सजप ने उठाए सवाल


अब समाजवादी जन परिषद ने भी सवाल उठाये हैं। सजप के अनुराग मोदी ने कहा कलेक्टर की यह कार्रवाई महज दिखावा है। रेत ठेकेदारों पर जुर्माने की कार्रवाई के लिये जारी नोटिस के बाद ठेकेदार राशि जमा ही नहीं करते हैं। जुर्माने के साथ ही आपराधिक प्रकरण दर्ज होना चाहिये। प्रशासन भले ही 1.739 हेक्टेयर रकबा ज्यादा में अवैध उत्खनन मान रहा हो, लेकिन हकीकत में रकबा इससे कहीं ज्यादा होगा। रेत खदान से आशय होता है, जहाँ पर पानी नही हो, वहाँ से रेत का उत्खनन किया जाये, जबकि छीपानेर में तो बीच नर्मदा से रेत निकाली जा रही है।

अभी तो सिर्फ जुर्माना का नोटिस दिया है


कलेक्टर हरदा ने सम्बंधित ठेकेदार कंपनी आरएसआई को 91 लाख रुपये जुर्माना का नोटिस मात्र दिया है। जिसमें लिखा है कि क्यों न आपके ऊपर उक्त राशि का जुर्माना लगाया जाये। ठेकेदार कंपनी 16 मई को कलेक्टर कोर्ट में उपस्थित होकर मामले में अपना जवाब पेश करेगी। उधर समाजवादी जनपरिषद के अनुराग मोदी का आरोप है कि ऐसे नोटिस मिलने के बाद ठेकेदार जवाब देंगे और बारिश के बाद सबूत मिट जायेंगे। सिहोर जिले में शिवा कॉरपोरेशन पर सन 2011 में 488 करोड़ का जुर्माना हुआ था, लेकिन आज तक कोई राशि जमा नहीं की।

अधिकारी नहीं हैं गंभीर: पूर्व मंत्री


बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री कमल पटेल का आरोप है कि यदि जिले के अधिकारी अवैध उत्खनन को रोकने के लिये गंभीर होते तो शायद यह स्थिति नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री खुद कह चुके हैं कि अवैध काम करने वालों पर कार्रवाई करो तब भी प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई करने से परहेज क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा जिस दिन वह छीपानेर गए थे, उस दिन कलेक्टर को कहने के बाद भी एक अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा। इससे स्पष्ट है कि अधिकारी खुद भी मामले में कार्रवाई करना नहीं चाहते। उधर इस बारे में कलेक्टर ने कहा कि उस दिन पूर्व मंत्री ने ज्ञापन दिया था, लेकिन मौके पर जाने के लिये कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं था। बिच्छापुर में सामूहिक सम्मेलन होने के कारण अधिकारी वहाँ व्यस्त थे।

कार्रवाई की जा रही है…


मामले में कार्रवाई की जा रही है। सम्बंधित ठेकेदार को सड़कों को तोड़ने को कहा है। प्रशासन मामले में कोई भी कोताही नहीं बरत रहा है। -एसके वनोठ, कलेक्टर हरदा

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