नदी और तालाब

पहाड़ों, घने जंगलों और ढाल वाले मैदानों की अपनी खास भौगोलिक स्थिति के कारण छत्‍तीसगढ़ राज्‍य नदियों से भरपूर है। महानदी जैसी बड़ी नदी से लेकर दर्ज़नों छोटी नदियां इस राज्‍य के भूभाग को सिंचित करती हैं। 
गोरखपुर के रामगढ़ताल का महत्व केवल एक जल पर्यटन स्‍थल तक ही सीमित नहीं है। इस झील के पर्यावरणीय महत्‍व के कारण इसको शहर के “अर्बन वाटर बफर” के रूप में भी देखा जाता है।
गांव के आसपास बने एनीकट, छोटे बांध और वर्षाजल संचयन ढांचों ने न केवल भूजल स्तर में सुधार किया है, बल्कि खेती, पशुपालन और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी असर डाला है।
छोटा तालाब, भोपाल
बिहार के दरभंगा में दर्ज़नों तालाबों पर भूमाफिया और बिल्‍डरों की कुदृष्टि के चलते इनमें से कई तालाबों को मिट्टी से भरकर ज़मीनों को बेच दिया गया है। 
कथक सम्राट बिरजू महाराज को अपने लय व रसपूर्ण नृत्‍य के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। उनका आज भी अपने गांव के प्राचीन तालाब से खास लगाव है, जो ‘कथकों का तालाब' या ‘कथिक तालाब' नाम से मशहूर है।
भारत की झीलें केवल जलस्रोत नहीं हैं, बल्कि वे देश की पारिस्थितिकी, संस्कृति, आजीविका और जल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वर्षा जल संचयन : हर-बूंद को सहेजना जरूरी
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