नदी और तालाब

कभी बुंदेलखंड की जीवन रेखा के रूप में जानी जाने वाली पहूज नदी प्रदूषण और अतिक्रमण की मार से नाले जैसी दिखने लगी है। 
गंगा, यमुना, घाघरा, रामगंगा, शारदा, गोमती, राप्ती, गंडक, चंबल, बेतवा, केन और सोन जैसी नदियां उत्तर प्रदेश राज्य की कृषि, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और जैव विविधता की आधारशिला हैं।
अयोध्‍या में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरयू तट पर स्थित  ‘राम की पैड़ी’ की गहन सफाई करााकर इसको और भव्य बनाने की तैयारी राज्‍य सरकार कर रही है।
पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी और मयूर विहार क्षेत्र के बीच स्थित इस झील को देखकर अक्सर यह भ्रम होता है कि यह एक प्राकृतिक झील है।
झारखंड का अधिकांश भूभाग छोटानागपुर पठार पर स्थित है, जिसके कारण यहां की नदी प्रणाली देश के अन्य मैदानी राज्यों से अलग स्वरूप रखती है।
अयोध्‍या में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरयू नदी में वाटर मेट्रो चलाने की योजना अपने शुरुआती परीक्षणों में नाकाम रहने के बाद ठंडे बस्‍ते में पड़ी हुई है। 
लखनऊ के मोहनलाल गंज में पुरातात्विक स्‍थल हुलास खेड़ा से सटी करेला झील का आकार बीते डेढ़ दशकों में 207 हेक्टेयर से सिमट कर महज़ 9.39 हेक्टेयर रह गया है। 
मुला-मुठा नदियां आज शहरी सीवेज के प्रदूषण से बुरी तरह दूषित होकर मृत होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। 
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