नदी और तालाब

Gangua Nala Bhubaneswar
राजस्‍थान के डूंगरपुर जिले में लुप्‍त हो चुकी मोरन नदी को स्‍थानीय लोगों के प्रयासों से मिली नई जिंदगी।
सांगानेर इलाक़े में हो रहे कंक्रीट निर्माणों और कपड़ा उद्योगों के बीच सिमटती जा रही है जयपुर की चंदलाई झील
स्थानीय रिपोर्ट और क़ानूनी फ़ाइलों से यह साफ़ हो गया है कि मिंटडू नदी के पानी की पारदर्शिता और बहाव क्षमता अब पहले जैसी नहीं रह गई है।
मध्‍य प्रदेश, बिहार, उत्‍तर प्रदेश में बहने वाली सोन नदी सदियों से घड़ियालों, मगरमच्‍छों और कछुओं का  प्राकृतिक आवास रही है। पर अवैध बालू खनन के कारण अब यह आवास संकट में है।
भोपाल के बड़े तालाब से रोज़ाना 2 मिलियन लीटर फ़ैक्ट्रियों को देने के नगर निगम के फ़ैसले ने शहर में  जल संकट की आशंका पैदा कर दी है।
यमुना से अवैध उत्‍खनन करने वाले बालू माफिया ने ट्रकों और पोकलेन आदि की आवाजाही के लिए नदी के बीच एक सड़क बना दी है, जिससे यमुना के पानी का प्रवाह बुरी तरह बाधित हो गया है।
भयंकर प्रदूषण के चलते नज़फगढ़ नाले में बदल चुकी है साहिबी नदी, जो कभी राजस्‍थान, हरियाणा और दिल्‍ली के एक बड़े इलाके के लिए महत्‍वपूर्ण जलस्रोत हुआ करती थी।
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