नदी और तालाब

गंगा की सफाई के लिए कई दशकों से विभिन्‍न सरकारी योजनाओं के तहत अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, फिर भी यह नदी प्रदूषण मुक्‍त नहीं हो पाई है।
नून नदी के किनारे फैला यह इलाका एक ऐसे भू-भाग का हिस्सा है जो हर साल पानी को समेटता है, फैलाता है और धीरे-धीरे छोड़ता है, ठीक वैसा ही व्यवहार, जैसा एक वेटलैंड करता है।
अनियंत्रित प्रदूषण पर लगाम न लगने के कारण देश की राजधानी दिल्‍ली और आसपास के इलाकों में यमुना नदी की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
पटना का जेपी गंगा पथ, जिसे आम बोलचाल में मरीन ड्राइव कहा जाता है, शहर के लिए तेज़ कनेक्टिविटी और आधुनिकता का प्रतीक बन चुका है।
बिहार का दरभंगा शहर एक ज़माने में बड़ी संख्‍या में मौजूद तालाबों के कारण 'तालाबों का शहर' के नाम से जाना जाता था। पर, बीते वर्षों में तालाबों पर अतिक्रमण, प्रदूषण और भूजल स्‍तर में गिरावट जैसी समस्‍याओं के चलते ये तालाब सिमटते जा रहे हैं। 
चेन्नई की वेलाचेरी झील सिकुड़ती जा रही है, जिससे शहर में जलभराव, बाढ़ और भूजल संकट बढ़ रहा है।
नर्मदा जैसी नदियों में होने वाली धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में दूध, फूल और अन्य जैविक पदार्थों का अर्पण प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह जल में अतिरिक्त कार्बनिक बोझ को बढ़ाता है।
डंबूर झील, त्रिपुरा 
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