बिहार बाढ़: सब खाना खत्म हो गया सरकार हमें खाना दो

Submitted by UrbanWater on Wed, 08/12/2020 - 13:00

चंचलिया गांव में घुसा बाढ़ का पानी. फ़ोटो: उमेश कुमार राय

धनजंय कुमार पिछले करीब तीन हफ्तों से बांध पर प्लास्टिक टांगकर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे हैं। 20 जुलाई की देर रात उनके घर में अचानक बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था।

उन्होंने इंडिया वाटर पोर्टल को बताया, “20 जुलाई की सुबह से ही हल्का-हल्का पानी इलाके में फैलने लगा था। जिस रफ्तार से पानी बढ़ रहा था, हमें लगा कि पानी बहुत नहीं फैलेगा। लेकिन, रात करीब 11 बजे अचानक तेजी से पानी बढ़ा और हमारे घरों में प्रवेश कर गया। किसी तरह हमने रात घर में गुजारी और सुबह सामान वगैरह लेकर बांध पर आ गए। तब से बांध पर ही रात-दिन गुजार रहे हैं।”

धनंजय कुमार सारण जिले के तरैया ब्लॉक की चंचलिया पंचायत में रहते हैं। बाढ़ आने के बाद प्रशासन की तरफ से कम्युनिटी किचेन खोला गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव में घुसने के तीन दिन बाद कम्युनिटी किचेन शुरू हुआ था, लेकिन अभी चार दिन पहले ही उन्हें बंद कर दिया गया।

धनंजय कुमार ने बताया, “कम्युनिटी किचेन बंद हो जाने से लोगों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है क्योंकि उनके पास जो भी अनाज बचा हुआ था, अब खत्म हो गया है।

स्थानीय सीओ वीरेंद्र मोहन कहना है कि पंचायत से बाढ़ का पानी निकल गया है, इसलिए राहत शिविर बंद कर दिया गया है। लेकिन, स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों में अब भी तीन फीट तक पानी घुसा हुआ है।

स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि कृष्ण कुमार गुप्ता कम्युनिटी किचेन बंद किए जाने पर हैरानी जताते हैं। उन्होंने इंडिया वाटर पोर्टल से कहा, “कम्युनिटी किचेन बंद हो जाने से लोग परेशान हैं। उनके पास खाने को कुछ नहीं है। रोज लोग हमारे पास आकर कहते हैं कि हमें खाना दीजिए। लोगों की परेशानी को देखते हुए मैं अपने घर पर रोज 1000-1500 लोगों का खाना बनवा रहा हूं।” 

धनंजय कुमार की तरह उत्तरी बिहार के हजारों लोग राहत शिविर नहीं होने के कारण बांध पर व हाईवे के किनारे प्लास्टिक डालकर रहने को विवश हैं।

सारण में बाढ़ के हालात कुछ ज्यादा ही गंभीर हो चले हैं। स्थानीय लोगों का कहना है गंडक नदी का तटबंध टूट जाने से नए सिरे से 15 और पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया है। सारण जिले के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि अब तक सारण की 101 पंचायतों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है और 7.22 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।   

अब तक 24 लोगों की बाढ़ से मौत

अभी बाढ़ का पानी 16 जिलों में फैला हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, 16 जिलों की 1232 पंचायतों में पानी घुस गया है और अब तक 74 लाख 19 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से 24 लोगों और 66 मवेशियों की मौत हुई है।

लेकिन, प्रभावित लोगों की तुलना में राहत शिविरों की संख्या नगण्य है, बल्कि दिनोंदिन राहत शिविरों की संख्या में कमी ही हो रही है। फिलहाल बिहार भर में महज 7 राहत शिविर संचालित हो रहे हैं। इनमें से समस्तीपुर में सबसे ज्यादा 5 राहत शिविर हैं, जबकि खगड़िया और दरभंगा में एक-एक शिविर चल रहा है। 

बाढ़ ने सबसे ज्यादा तीन जिलों दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पूर्वी चम्पारण को प्रभावित किया है। तीनों जिलों को मिलाकर करीब 45 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। दरभंगा में 20,02,100 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर में 14.15 लाख औ बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है वहीं, 63 मवेशियों की भी बाढ़ के चलते जान चली गई। पूर्वी चम्पारण में 10.19 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताये जाते हैं। इन दोनों जिलों में एक भी राहत शिविर स्थापित नहीं है। नतीजतन लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश की चेतावनी

 मुज़फ़्फ़रपुर के एक गांव में बाढ़ के पानी में डूबा ट्यूबवेल। फ़ोटो: उमेश कुमार राय चंचलिया गांव में घुसा बाढ़ का पानी. फ़ोटो: उमेश कुमार राय

पिछले दो दिनों से रह-रह कर हो रही बारिश से बाढ़ के हालात और नाजुक हो चले हैं। मौसमविज्ञान विभाग ने अगले कुछ दिनों तक इसी तरह बारिश के जारी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है।

बिहार में इसबार मॉनसून की बारिश अभी तक सामान्य से काफी ज्यादा हो चुकी है और अनुमान लगाया जा रहा है कि आनेवाले दिनों में भी ऐसे ही बारिश जारी रह सकती है। 

पटना मौसमविज्ञान केंद्र के एक अधिकारी ने इंडिया वाटर पोर्टल को बताया, “12 जून को बिहार में मॉनसून की इंट्री के बाद से अब तक 828 मिलीमीटर बारिश हो चकी है, जो सामान्य से 36 प्रतिशत ज्यादा है। 11 अगस्त तक 609.4 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी।”  

पटना मौसम विज्ञान केंद्र से मिले आंकड़ों के मुताबिक, अररिया में अभी तक 834.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन 1156 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। दरभंगा में 542.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन यहां अभी तक 1052 मिलीमीटर बारिश हुई है। इसी तरह पूर्वी चम्पारण में अभी तक 641 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन 1176.1 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। इसी तरह मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, शिवहर, सीतामढ़ी और पश्चिमी चम्पारण में भी सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश हुई है।

फसल को भारी नुकसान

बाढ़ और जलजमाव ने जहां आम जनजीवन को गहरे प्रभावित किया है, तो दूसरी तरफ फसलों को भी इससे भारी नुकसान हुआ है। मुजफ्फरपुर के एक किसान कमलेश सिंह ने बताया, “इस बार मॉनसून की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई थी, जिससे मैंने 20 कट्ठे में धान की बुआई कर दी थी। लेकिन बारिश और बाढ़ के कारण धान के खेत में जलजमाव हो गया और फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।”

राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर अब्दुस सत्तार ने इंडिया वाटर पोर्टल को बताया, “धान की फसल जब लग जाती है, तो इतनी ज्यादा बारिश की जरूरत नहीं पड़ती है। अभी अधिक समय तक खेतों में पानी का जमाव धान के लिए काफी नुकसानदेह होता है। जिस तरह इस बार मॉनसून में भारी बारिश हो रही है, उससे धान की फसल को काफी नुकसान होगा।” 

उन्होंने कहा, “भारी बारिश से किसानों को एक ही फायदा होगा कि अगले सीजन में वे जल्दी फसल की बुआई कर सकेंगे। लेकिन अभी धान किसानों को बहुत नुकसान होगा।”  

बिहार के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग के आकलन के मुताबिक, अब तक बाढ़ से 7.75 लाख हेक्टेयर में लगी फसलों को नुकसान हुआ है। कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने कहा है कि नुकसान का आकलन करने के बाद एक महीने के भीतर लोगों को नुकसान का मुआवजा दे दिया जाएगा।

इधर, बाढ़ की विभीषिका के बीच बिहार सरकार ने एक बार फिर नेपाल पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। 10 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा कि बाढ़ निरोधक योजनाओं को पूरा करने में नेपाल सरकार से सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार के सहयोगात्मक रवैये के कारण ही बाढ़ रोकने के लिए कारगर उपाय करने में एक महीना देर हो गया। 

 

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मूल आलेख हिंदी में उमेश कुमार राय 

हिंदी से अंग्रेजी अनुवाद स्वाति बंसल

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