दूषित पानी से त्रस्त ग्रामीणों ने वोट नहीं देने की ठानी

Submitted by Hindi on Thu, 04/28/2011 - 11:46
Source
जनसत्ता, 28 अप्रैल 2011

सभी हैंडपंपों में एक प्लेट लगा दिया है कि पानी पीने योग्य नहीं है। लेकिन प्रशासन ने पानी की कोई व्यवस्था नहीं की है। उन्होंने बताया कि मजबूरन हम लोगों को इसी दूषित पानी का सहारा लेना पड़ता है।

फतेहपुर, 27 अप्रैल। बसपा सरकार की व्यवस्था का दंश झेल रहे ग्रामीण शासन-प्रशासन को लेकर काफी नाराज है। अपने बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ भड़ास निकालनी शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने तो वोट न डालने की भी बात कही है। करीब सात साल से दूषित पानी पी रहे ग्रामीण सरकारी व्यवस्था को कोस रहे हैं। विकास खंड भिटौरा के ग्राम सभा औढेरा मजरे चौहष के ग्रामीणों ने इस टीम को भी नजरअंदाज कर दिया है। काफी कुरेदने पर ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाई।

इसी गांव में दो दर्जन से ज्यादा बच्चे व बुजुर्ग विकलांगता के शिकार हैं। इन लोगों के हाथ-पैर टेढ़े-मेढ़े हो गए हैं। 72 साल के छविनाथ, जो शारीरिक विकृति का शिकार हो गए हैं, ने बताया कि सात साल से गांव में लगे सभी हैंडपंपों का पानी दूषित हो गया है। जिसका पानी पीने से लोग विकलांगता की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 1500 लोगों की आबादी वाले मजरे में 8 हैंडपंप लगाए गए हैं। सभी दूषित पानी दे रहे हैं। प्रशासन इस ओर कई कारगर कदम नहीं उठा रहा।

उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि की भी निगाह इधर नहीं पड़ रही है। सिर्फ वोट मांगने आ जाते हैं। अब तो हम लोगों ने वोट न देने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने सभी हैंडपंपों में एक प्लेट लगा दिया है कि पानी पीने योग्य नहीं है। लेकिन प्रशासन ने पानी की कोई व्यवस्था नहीं की है। उन्होंने बताया कि मजबूरन हम लोगों को इसी दूषित पानी का सहारा लेना पड़ता है।

प्रशासन ने सात महिने पहले पानी की टंकी के लिए बोरिंग कराना शुरू किया था लेकिन इंजन खराब होने के कारण काम ठप पड़ा है। प्लोराइडयुक्त पानी पीने से कई लोग मौत के मुंह में भी चले गए। गांव के छोटे-छोटे बच्चे विकलांगता का शिकार हो रहे हैं। गांव के 20 वर्षीय सत्यप्रिय गौतम, 15 वर्षीय हंसप्रिय, 12 वर्षीय पवन कुमार, 13 वर्षीय श्रीपाल, 7 वर्षीय अंकीत, 70 वर्षीय सुर्जी समेत करीब 2 दर्जन बच्चे और बुजुर्ग दूषित पानी पीने से विकलांग हो गए हैं। कुछ दिन पहले प्रशासन ने टैंकर की व्यवस्था की थी, लेकिन वह व्यवस्था भी बंद हो गई।

बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित अभिभावक अब बच्चों के मौत की दुआ मांग रहे हैं। बसपा सरकार के प्रति ग्रामीणों में बेहद गुस्सा है। दलितों की मसीहा का ढोंग रचने वाली बसपा सरकार गरीब व दलितों की ही सबसे बड़ी दुश्मन है।

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