जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों के प्रवास में आई तेजी

Submitted by HindiWater on Wed, 12/18/2019 - 09:54
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दैनिक जागरण, 18 दिसंबर 2019

फोटो - Amar Ujala

ग्लोबल वार्मिग के खतरों के प्रति आगाह करने वाले एक अध्ययन में कहा गया है कि 20 साल पहले की तुलना में जलवायु परिवर्तन के कारण बसंत के मौसम में अब पक्षियों का प्रवास तेजी से बढ़ रहा है और वे अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए एक निश्चित मार्ग से होकर गुजरते हैं।

अमेरिका की मैसाचुसेट्स एमहस्र्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वायुमंडलीय तापमान और प्रवासन का समय निकटता से एक-दूसरे से जुड़ा रहता है, जो इलाके सबसे ज्यादा वार्मिग के शिकार हैं, वहां से पक्षियों का प्रवास सबसे ज्यादा और तेजी से हो रहा है। उन्होंने रात में घूमने वाले पक्षियों के प्रवासन का अध्ययन करने के लिए यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के 24 साल के रडार डाटा का विश्लेषण किया। नेचर क्लाइमेट चेंज नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्षो से पता चला है कि बसंत के मौसम में भी प्रवासी पक्षियों की संख्या में भारी गिरावट आ गई है।

जैव-विविधता को होगा नुकसान: अमेरिका में कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी (सीएसयू) के शोधकर्ता और इस अध्ययन के सह-लेखक काइल हॉर्टन ने कहा, ‘यदि हम पूरे महाद्वीप की बात करें तो पक्षियों के प्रवास के समय में बदलाव बाहरी तौर पर अच्छा हो सकता है। लेकिन ग्लोबल वार्मिग के कारण होने वाले इस बदलाव से दीर्घकाल में जैव-विविधता के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। हॉर्टन ने कहा कि पक्षियों के प्रवास के समय में बदलाव का मतलब केवल यह नहीं है कि प्रवासी जलवायु परिवर्तन के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।

आबादी पर पड़ रहा प्रभाव : कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के शोधार्थी और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक एंड्रयू फ्रांसवर्थ ने कहा कि पक्षी का प्रवास बड़े पैमाने पर बदलती जलवायु की प्रतिक्रिया के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक घटना है जिसमें प्रतिवर्ष अरबों पक्षी शामिल होते हैं और यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि पक्षियों की चाल जलवायु परिवर्तन को ट्रैक करती है। लेकिन जलवायु में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण पक्षियों की आबादी में भी सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है।

प्रभावी कदम उठाने की जरूरत : फ्रांसवर्थ ने कहा ने कहा, ‘यदि जलवायु परिवर्तन इसी गति से जारी रहा तो हो सकता है कि भविष्य में कई पक्षी विलुप्ति के कगार पर पहुंच जाएं या विलुप्त हो जाएं क्योंकि हर प्राणी एक सीमा तक ही हमारे वातावरण में होने वाले बदलावों का सह सकता है और उसके अनुकूल खुद को ढाल सकता है। इसलिए यदि हमें जैव विविधता को बनाए रखना है तो ग्लोबल वॉर्मिग को बढ़ने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

 

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