कालापानी

Submitted by RuralWater on Mon, 07/06/2015 - 13:13
Source
पीएसआई, देहरादून
.मध्य प्रदेश के धार जिले के मनावर प्रखण्ड के गरीब आदिवासी गाँव के लोगों ने सोचा नहीं था कि उन्हें कभी पीने के लिये स्वच्छ जल नसीब होगा। यह गाँव स्केलेटल फ्लोरोसिस से सबसे अधिक संख्या में प्रभावित लोगों वाले गाँव के तौर पर जाना जाता है।

इस गाँव के हैण्डपम्प और ट्यूबवेल का पानी फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा से दूषित है। इसके बावजूद लोग इस पानी को सालों से पीने के लिये और खाना पकाने के लिये इस्तेमाल करते रहे हैं। इसलिये यहाँ के लोगों के लिये यह विश्वास कर पाना मुश्किल है कि सालों से वे फ्लोराइडयुक्त पानी का इस्तेमाल करते रहे हैं और यही उनके गाँव में डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस के सबसे अधिक प्रभावितों के होने की वजह है।

उत्साह भरे माहौल के बीच पिछले महीने एक सामान्य समारोह में रिबन काटकर जल आपूर्ति योजना का उद्घाटन किया गया। लोगों को पूरा भरोसा है कि यह योजना जिसके जरिए सौ परिवारों के लिये सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है उनके गाँव की तस्वीर बदल देगी। इस अनूठे अवसर पर पूरे गाँव के लोग एक जगह उपस्थित हुए, उन्होंने साथ-साथ सबका भोजन पकाया, साथ बैठकर खाना खाया और मस्ती में साथ नाचे भी। स्वच्छ जल की उपलब्धता की खुशी में और इस समारोह के उत्साह में उन लोगों ने अपने उद्गार कुछ इस तरह व्यक्त किये।

गाँव की एक 35 साल की निवासी सक्कू बाई ने कहा, “जब से मुझे याद है, अनजाने में हमलोग हैण्डपम्प और ट्यूबवेल का फ्लोराइड वाला दूषित पानी ही ज्यादातर इस्तेमाल करते रहे हैं। मेरे पति गाँव के बाहर मजदूरी करते हैं और मुझे अपने दस साल के बच्चे की देखभाल, घर का कामकाज और खेत का काम करना होता है। मुझे लगता था कि शायद मैं इतनी मेहनत करती हूँ इसलिये मेरे जोड़ों में और कई दफा मेरे पेट में दर्द रहता है। मेरा बेटा भी अक्सर बीमार पड़ जाता था। लेकिन अब मुझे पता चल गया है कि यह सब उस पानी की वजह से हो रहा है जिसका हम इस्तेमाल करते आए हैं। मैं खुश हूँ कि मुझे इसके बारे में पता चल गया। अब मैं खुद को और अपने बच्चे के पानी की वजह से हड्डियों में होने वाली परेशानी से बचा पाऊँगी। यह उस पानी की वजह से मुमकिन होगा जो हमें इस योजना के जरिए मिलने वाला है।”

सक्कू बाई जो इस मौके के लिये खासतौर पर बढ़िया कपड़े पहनकर आई थी ने कहा, “हमारा गाँव अभिशप्त गाँव के रूप में जाना जाता है क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में लोग फ्लोरोसिस बीमारी से पीड़ित हैं। बाहर के लोग अक्सर हमारे गाँव में अपनी बेटियों की शादी करने से हिचकते हैं लेकिन अब हमें लगता है कि अब परिस्थितियाँ बदलेंगी। मुझे उम्मीद है कि हमलोगों को अब इस सामाजिक छवि से मुक्ति मिल जाएगी। अब हमारे गाँव में फ्लोरोसिस पीड़ितों की संख्या काफी घट जाएगी और एक दिन यह सर्वश्रेष्ठ गाँव के रूप में जाना जाएगा। मैं इस कार्यक्रम की शुक्रगुजार हूँ।”

पीएसआई टीम द्वारा आयोजित जागरुकता अभियान इतना प्रभावी रहा कि एक ग्रामीण उदय सिंह ने आधिकारिक रूप से अपना कुआँ इस्तेमाल के लिये पूरे गाँव को दान कर दिया। उदय सिंह का कुआँ उन कुछेक कुओं में से है जिसके पानी में फ्लोराइड की बहुत कम मात्रा पाई गई है और उसे पीने के लिहाज से सुरक्षित माना गया है।

इस आयोजन के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति होने के नाते उदय सिंह ने कहा, “आज मैं अपनी खुशी को बयाँ नहीं कर पा रहा हूँ। यह जानना कि आज के बाद से पूरा गाँव मेरे कुएँ का पानी ही इस्तेमाल करेगा, यह बात मुझे अत्यधिक खुशी दे रही है। पहले मैं सोचता था कि ऐसा करने से मुझे सरपंच चुनाव में खूब वोट मिलेंगे लेकिन आज मैं महसूस कर रहा हूँ कि कुएँ को दान करना मेरे जीवन का सबसे बेहतरीन काम है जिससे कई लोगों की जिन्दगी बच पाएगी। मेरे कुएँ का क्लोरीनेशन नियमित तौर पर किया जाता रहा है। मैं सचमुच इस बात से खुश हूँ कि मैंने इस कार्यक्रम के जरिए अपने गाँव के लिये कुछ किया है।”

जल उपयोगकर्ता समिति के एक सदस्य राज सिंह कहते हैं, “इस कार्यक्रम ने हम सबों को एकजुट कर दिया है। इसने सभी गाँव वालों को इसमें भाग लेने के लिये प्रोत्साहित किया। आज हम सब यहाँ जमा हुए हैं और साथ काम कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम इसी तरह एकजुट रहेंगे।”

जल उपयोगकर्ता समिति की एक महिला सदस्य रेशम बाई कहती हैं कि इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें नेतृत्व हासिल करने का पहला मौका हासिल हुआ है, जिससे उसका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। वे कहती हैं, “हमारे गाँव में हमलोग एक किस्म के पर्दा प्रथा का पालन करते रहे हैं जहाँ महिलाओं को निर्णय लेने और भागीदारी करने जैसे काम से रोका जाता रहा है। एक साल पहले जब पीएसआई की टीम ने यहाँ आना शुरू किया था जो किसी ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया था। मगर धीरे-धीरे हमलोगों ने बैठकों में भागीदारी करना शुरू कर दिया और फिर हम फैसले लेने में और जल उपयोगकर्ता समिति में सक्रिय भागीदार बन गए। यह मेरे जीवन का पहला मौका है जब मुझे नेतृत्व करने का अवसर मिला है और मुझे इस बात पर गर्व है। इस कार्यक्रम के जरिए स्वच्छता के मसले पर हमारी सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।”

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