कल्याणकारी योजनाओं से लोग पा सकते हैं रोज़गार

Submitted by HindiWater on Tue, 12/09/2014 - 15:59
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चरखा फीचर्स, दिसंबर 2014

इस प्रोजेक्ट के तहत चल रहे कामों की स्थिति को जानने के लिए अंजुमन देही कलमकराने, सुरनकोट (ग्रामीण लेखकों का समूह) जब फागला के मोहल्ला धो पहुँचा तो वहाँ पर बने स्नान घर के निर्माण को अधूरा पाया। स्नान घर के अन्दर न तो पानी था और न ही उसके दरवाज़े। शायद इसी वजह से एक युवती चश्मे के पानी से सर धोती दिखाई दी। इसी तरह फागला के मोहल्ला पीरां में पानी का एक टैंक तामीर किया गया था। उसको हम सिर्फ टैंक कह सकते हैं मगर पानी वाला टैंक नहीं क्योंकि यह सिर्फ एक ढांचा ही था और इसके अन्दर पानी बिल्कुल नहीं था।

विधान सभा चुनाव के दूसरे चरण में जम्मू-कश्मीर में 71 फीसदी मतदान हुआ। बाढ़ प्रभावित जम्मू-कश्मीर में बढ़े मतदान प्रतिशत से साफ है कि राज्य की जनता सत्ता की कमान किसी ऐसी पार्टी को सौंपना चाहती है जो बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास के लिए कदम उठाए और राज्य में लोगों के लिए आजीविका के साधन जुटाए।

गौरतलब है कि राज्य में आई बाढ़ से खेती-बाड़ी के बर्बाद होने और माल-मवेशियों के मरने से लोगों के पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है। जिला पुंछ भौगोलिक दृष्टि से तो पिछड़ा हुआ है ही साथ ही सीमावर्ती जिला होने की वजह से हर तरह की जानकारी से वंचित है। हालांकि यहाँ के नौजवानों का रूझान शिक्षा की ओर पूरी तरह से है और वह निपुण भी हैं, मगर वह हमेशा बेरोज़गारी का रोना रोते रहते हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है कि हर युवा जो शिक्षा हासिल करता है उसका मकसद सिर्फ और सिर्फ सरकारी नौकरी ही है और वह उसी की प्रतीक्षा करते-करते अपने जीवन का सबसे कीमती समय बर्बाद कर देता है।

बेरोज़गारी किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है बल्कि बेरोज़गार नौजवान समाज और देश के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। इसकी मिसाल पुंछ के अतीत से ली जा सकती हैं जहाँ बेरोज़गारी के चलते कुछ नौजवान गलत रास्ते पर चले गए थे।

बेरोज़गारी की समस्या को सरकार और उसकी कल्याणकारी योजनाओं की नाकामी से जोड़ सकते है जो काफी हद तक सही भी हो सकता है, मगर इसके लिए हम स्वयं भी जिम्मेदार हैं। यह सच सबको स्वीकार करना होगा कि सरकारी नौकरी ही रोज़ी-रोटी का एक मात्र ज़रिया नहीं है। हाँ अगर इसके बदले में यह सवाल उठे कि पुंछ में प्राइवेट सेक्टर नहीं है तो इसका जवाब यह है कि सरकार की ओर से लोगों को रोज़गार देने के लिए तरह-तरह की योजनाएँ चलाई जा रही हैं।

यह योजनाएँ सिर्फ केन्द्र तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि यह देश के हर कोने में हैं और काफी महत्वपूर्ण हैं और हर एक व्यक्ति के लिए हैं। सरकार की बहुत सारी योजनाएँ हैं जिनसे बेरोज़गारी के मर्ज का इलाज सम्भव है। मगर सरकार की उन योजनाओं से फायदा लेने के लिए ज़रूरी है कि आपको इसकी जानकारी हो।

इस लेख के माध्यम से आपको सरकार की ओर से चलाई जा रही एक योजना के बारे में जानकारी दी जा रही है जिसे ‘‘इंटीग्रेटेड वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट’’ के नाम से जाना जाता है। यह प्रोजेक्ट 2013 से पुंछ में चल रहा है। इस विभाग के एक कर्मचारी एहतेशाम मोहताशिम ने बताया कि इस विभाग का मुख्य कार्य पानी का बचाव और इसकी कमी का हल निकालना है।

इस विभाग के एक और अधिकारी कफील अहमद भट्टी ने विभाग के काम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि हमने इस प्रोजेक्ट के काम को दो चरणों में बाँटा है। पहले चरण के तहत हम तकरीबन 59 फीसदी काम पूरा कर चुके हैं। इसमें दो महत्वपूर्ण काम, पहला बेसलाइन सर्वेक्षण और दूसरा ईपीए यानी एण्ट्री प्वाइण्ट एक्टिविटीज़ शामिल थे। उन्होंने आगे बताया कि हमने सुरनकोट के गाँवों को दो हिस्सों में बाँटकर फागला फर्स्ट और फागला सेकेण्ड का नाम दिया है।

जिसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि फागला फर्स्ट में 12 पंचायतें जिनमें धन्धीधड़ा की एक, संगला की तीन, गोन्थल की दो, पमरोट की 1, करलकटल की 1, लढ़ोंग की 1, मोहड़ा बछाई की 2, फागला की 1 पंचायत शामिल है। इसी तरह फागला सेकेण्ड में भी 12 पंचायतें जिनमें मड़होट की 4, डोडी की एक, हाडी की 2, मलां की 1, हाड़ी बुड्ढा की 2, नडि़या की 1 और सेढ़ी ख्वाजा की 1 पंचायत शामिल है।

उन्होंने आगे बताया कि दूसरे चरण के तहत वर्क फेज़ आता है जो अभी शुरू नहीं हुआ। इस चरण के काम के बारे में विस्तार से बताते हुए कफील भट्टी ने बताया कि इसके अन्तर्गत बहुत सारे निर्माण से जुड़े हुए काम आते हैं, मगर लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने वाली कई योजनाएँ भी इसमें शामिल हैं। जिनसे लोगों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि सिर्फ सुरनकोट ब्लाक की 24 पंचायतों के लिए कुल 13602600 की रकम मौजूद है जिसमें फागल फर्स्ट के लिए 7273800 रुपए और फागला सेकेण्ड के लिए 6328800 रुपए हैं। इसमें स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं और मुर्गी पालन, पशु पालन और सिलाई का काम किया जाता है। उनका कहना था कि इन योजनाओं से लाभ लेने के लिए कोई भी उनके पास नहीं आता, इसका कारण उन्होंने लोगों में जागरूकता की कमी को बताया।

इस प्रोजेक्ट के तहत चल रहे कामों की स्थिति को जानने के लिए अंजुमन देही कलमकराने, सुरनकोट (ग्रामीण लेखकों का समूह) जब फागला के मोहल्ला धो पहुँचा तो वहाँ पर बने स्नान घर के निर्माण को अधूरा पाया। स्नान घर के अन्दर न तो पानी था और न ही उसके दरवाज़े। शायद इसी वजह से एक युवती चश्मे के पानी से सर धोती दिखाई दी। इसी तरह फागला के मोहल्ला पीरां में पानी का एक टैंक तामीर किया गया था।

उसको हम सिर्फ टैंक कह सकते हैं मगर पानी वाला टैंक नहीं क्योंकि यह सिर्फ एक ढांचा ही था और इसके अन्दर पानी बिल्कुल नहीं था। इस बारे में जब विभाग के प्रोजेक्ट ऑफिसर अत्तार चन्द कलोटरा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने यह काम किए हैं उनके कुछ बिल बाकी हैं और जब तक वह अपने काम को पूरा नहीं करते उन्हें बाकी का पैसा अदा नहीं किया जाएगा। उन्होंने सम्बन्धित जिम्मेदारों से काम कहा कि जल्द-से-जल्द कामों को पूरा किया जाए।

साथ में उन्होंने इस बात पर खुषी जताई कि सरकार की योजनाओं को कामयाब बनाने के लिए आप जैसे नौजवानों की ज़रूरत है जो इस पर अपनी नज़र रखें ताकि विभाग अपने मकसद में कामयाब हो सके और योजना का ज़्यादा-से-ज़्यादा फायदा लोगों को पहुँच सके। उन्होंने इस बात को माना कि लोगों को इन योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं हैै। लिहाज़ा इस बात की ज़रूरत है कि जनता तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचाई जाए और इससे जानकारी लेकर वह फायदा उठा सके।

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