कमला, कोसी और बागमती खतरे के निशान से ऊपर, कई गांवों में घुसा पानी

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/13/2020 - 16:56

बिहार और नेपाल के तराई इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण उत्तर बिहार की महानंदा, कोसी, कमला और बागमती नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे उत्तरी बिहार में बाढ़ के हालात बनने शुरू हो गए हैं।

बागमती नदी सीतामढ़ी के 4 फ्लड स्टेशनों, मुजफ्फरपुर के एक और शिवहर के एक फ्लड स्टेशन में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सीतामढ़ी के धेंग ब्रिज फ्लड स्टेशन में नदी का जलस्तर 70.75 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से 0.65 मीटर ज्यादा है। वहीं सीतामढ़ी के सोनाखन फ्लड मॉनीटरिंग स्टेशन में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 0.40 मीटर ऊपर बह रहा है। 12 जुलाई को यहां जलस्तर खतरे के निशान से 1.45 मीटर ऊपर था। इसी तरह मुजफ्फरपुर और शिवहर में भी ये नदी खतरे के निशान 1 मीटर तक ऊपर बह रही है।

कमला बालान नदी मधुबनी के दो फ्लड स्टेशनों झंझारपुर (रेलपुल) और जयनगर में खतरे के निशान से ऊपर है। जयनगर में नदी खतरे के निशान से करीब 0.70 मीटर जबकि झंझारपुर (रेलपुल) में 2.75 मीटर ऊपर बह रही है। महानंदा नदी पूर्णिया और कटिहार में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। 

कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने का अनुमान

केंद्रीय जल आयोग की तरफ से जारी बुलेटिन के अनुसार, बाल्मीकिनगर में पिछले 24 घंटों में 91 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि गलगलिया में 161 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसी तरह बेनीबाद में 82 मिलीमीटर और जयनगर में 103 मिलीमीटर बारिश हुई है। 

भारतीय मौसमविज्ञान विभाग के मुताबिक, बारिश का सिलसिला अभी जारी रहेगा। उधर, मीडिया रपटों के मुताबिक, नेपाल में भी अगले तीन दिनों तक बारिश जारी रह सकती है, जिस वजह से नदियों के जलस्तर में और इजाफा होने का अनुमान है।

जल संसाधन विभाग के सूत्रों ने बताया कि रविवार की शाम तक कोसी बराज से 2,49,795 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है, जबकि गंडक बराज से 239000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है।

 

जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “इन नदियों में जलस्तर का ट्रेंड बढ़ता हुआ दिख रहा है। इसके मद्देनजर जिलास्तरीय अफसरों को अलर्ट रहने को कहा गया है।”

 

कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

इस बीच कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस जाने से लोगों के पास खाने-पीने का संकट उत्पन्न हो गया है। दरभंगा जिले के घनश्यामपुर ब्लॉक के दो गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इन गावों में कोसी और कमला नदी का पानी घुस गया है।

जिले के डीएम थियागराजन एसएम ने कहा कि गांवों में पानी घुस जाने के बाद कम्युनिटी किचेन शुरू किया गया है, जहां लोगों को खाना मुहैया कराया जा रहा है। 

दूसरी तरफ, मीडिया रपटों के अनुसार, गोपालगंज जिले के 170 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई गांवों का संपर्क भी टूट चुका है। लोग घरों में ही चौकी व ऊंचे स्थानों पर रहने को विवश हैं। इन गांवों तक अभी भी राहत सामग्री व राहत दल नहीं पहुंचा है। 

हालांकि, गोपालगंज के डीएम अरशद अजीज ने कहा है कि नदी तटबंध के बाहर के किसी भी गांव में अभी तक पानी नहीं घुसा है।

 

गोपालगंज के डीएम अरशद अजीज ने इंडिया वाटर पोर्टल से कहा, “ नदी तटबंध के भीतर के 15-16 गांवों में पानी घुसा है, लेकिन तटबंध के बाहर के किसी भी गांव में अभी तक बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है। इन गांवों से 300-400 लोग निकल कर आए हैं। उन्हें राहत शिविरों में रखा गया है और सभी तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। बहुत सारे लोग गांवों में अब भी हैं, लेकिन वे बाहर नहीं आना चाह रहे हैं। हमलोगों ने उन्हें नाव दे दिया है। हालात पर नजर रखी जा रही है।”

 

उधऱ, मधुबनी की कमला बालान नदी के तटबंध के भीतर बसे कुछ गांवों में भी बाढ़ का पानी घुस गया है।

 

मधुबनी के झंझारपुर ब्लॉक की कोठिया पंचायत के मुखिया लाल मोहन झा ने इंडिया वाटर पोर्टल को बताया, “नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता है, तो मेरी पंचायत में भी पानी घुस जाएगा। अभी मेनहथ में पानी आ चुका है।”

 

बिहार के सीमांचल में पड़ने वाले किशनगंज जिले के भी कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। किशनगंज के बहादुरगंज ब्लॉक के एक निवासी ने वीडियो भेजकर बताया है कि किस तरह उनके गांव में पानी घुस गया है और लोग जरूरी सामान व मवेशियों को लेकर स्कूल में शरण लिए हुए हैं। एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने वीडियो संदेश देकर बताया है कि सिंघीबारी गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है और सड़क से होकर गुजर रहा है जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

 

बहादुरगंज के बीडीओ जुल्फिकार आदिल ने कहा कि नदी के किनारे के कुछ घरों में पानी घुसा था, लेकिन अभी निकल चुका है। फिलहाल किसी भी गांव में बाढ़ का पानी नहीं है।

 

आम लोग कर रहे मदद

 

राहत कार्य में जुटे सोहेल अख्तर और अन्य लोगराहत कार्य में जुटे सोहेल अख्तर और अन्य लोग

कटिहार जिले के बारसोई ब्लॉक की कई पंचायतों में पिछले दो हफ्तों से बाढ़ का पानी घुसा हुआ है, लेकिन सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है। बारसोई ब्लॉक के ये गांव महानंदा नदी के किनारे बसे हुए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाढ़ का पानी घर-आंगन तक में प्रवेश कर चुका है। लोग चौकी व अन्य ऊंची जगहों पर शरण लिए हुए हैं। कुछ स्थानीय लोग अपने बूते बाढ़ में फंसे हुए इन लोगों की मदद कर रहे हैं। स्थानीय निवासी सोहेल अख्तर भी लोगों की मदद करने के लिये आगे आए हैं और अपने कुछ साथियों और शिक्षकों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों को खाने-पीने का सामान उपलब्ध करवा रहे हैं। बाढ़ में फंसे लोगों तक खाना और फल आदि दिये जा रहे हैं। बाढ़ में फंसी जिंदगियां राहत पहुंचाने वाले लोगों को मसीहा की तरह लाचार आंखों से देख रही हैं।

 

सोहेल ने इंडिया वाटर पोर्टल को बताया, “हम लोग पका हुआ चावल और फल लोगों तक पहुंचा रहे हैं। फलों में भी खट्टे फल दिए जा रहे हैं क्योंकि डॉक्टरों ने हमें सलाह दी है कि खट्टे फल कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं और चूंकि अभी कोरोना महामारी फैली हुई है, तो ऐसे में खट्टे फल लोगों को दोहरा फायदा पहुंचाएंगे।”

 

सोहेल अख्तर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ में फंसे हुए लोगों को देखकर उन्होंने मदद करने का मन बनाया है। इस काम में उनके परिवार के अन्य सदस्य, मित्र और शिक्षक भी उनके साथ लगे हुए हैं। 

अख्तर अभी तक 3 पंचायतों के प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचा चुके हैं और बाकी 5 पंचायतों में भी जल्द ही राहत सामग्री पहुंचाएंगे।

 

सोहेल अख्तर ने कहा, “तीन परिवारों को हमलोगों ने अपने घर में शरण दी थी क्योंकि उनके घर बाढ़ से तबाह हो गए थे।” 

आपका सहयोग

हम निरंतर इस बात की अपील कर रहे हैं कि आप भी अपने इलाके में तटबंधों में किसी भी प्रकार की दरार या अन्य कोई समस्या देखें तो तुरंत हेल्पलाइन नं 18003456145 पर कॉल कर जानकारी  साझा करें।

ट्विटर पर @WRD_Bihar (जल संसाधान विभाग) को टैग करते हुए #HelloWRD के साथ लोग तटबंधों की जानकारी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर विभाग तुरंत संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को सूचित करेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

आप इंडिया वाटर पोर्टल (हिन्दी) पर भी जानकारी साझा कर सकते हैं। जानकारी देते समय आप अपना नाम, स्थान, मोबाइल नं., ईमेल और फोटो भी साझा करें। आपकी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। 

हमसे संपर्क करें- ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ई-मेल  

मूल आलेख हिंदी में उमेश कुमार राय 

हिंदी से अंग्रेजी अनुवाद स्वाति बंसल

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