लघु सिंचाई कमान क्षेत्र का नियोजन

Submitted by Hindi on Thu, 12/22/2011 - 15:52
Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, चतुर्थ राष्ट्रीय जल संगोष्ठी, 16-17 दिसम्बर 2011
लघु सिंचाई परियोजनाएं आज के संदर्भ में बहुत ही महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। क्योंकि बढ़ती जनसंख्या व बड़े बांधों जैसे नर्मदा सागर, सरदार सरोवर एवं टिहरी बांध परियोजना के कारण बड़ी संख्या में लोगों का विस्थापन व एक बड़े भू-भाग का डूब में आना, आज की परिस्थिति में लाभकारी सिद्ध नहीं हो रहा है।

इन्हीं सब कारणों से लघु सिंचाई परियोजनाएं भविष्य में भारत के सिंचाई परिदृश्य में ज्यादा उपयोगी सिद्ध होंगी। इसी कारण से यह जरूरी हो जाता है कि लघु कमान क्षेत्रों के नियोजन और जलाशय प्रबंधन को भी अब बड़ी परियोजनाओं के जैसा महत्व देना चाहिए जिससे कि उपलब्ध संसाधनों का भी संपूर्ण विकास और सही-सही उपयोग हो सके। हालांकि दोनों परियोजनाओं के लिए विधि लगभग समान ही है पर छोटी परियोजना के लिए नियोजन अलग होता है। क्योंकि वहां पर सूक्ष्म से सूक्ष्म बिन्दुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। उपयुक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुये मेहगांव लघु सिंचाई परियोजना जो 800 08’00” पूर्वी देशांश व 23010’45” उत्तरी अक्षांश पर कुंडम ब्लाक, जबलपुर म0प्र0 में स्थित है। कमान क्षेत्र को अध्ययन के लिए चुना गया। इस परियोजना में 575 मी0 लम्बा मिट्टी का बांध बनाया गया है जो 16.92 मीटर ऊँचा है जिसकी भंडारण क्षमता 210 हेक्टेयर - मीटर है। परियोजना का कुल जलग्रहण क्षेत्र 515 है व कमान क्षेत्र 350.1 हेक्टेयर है, जिसमें कि 284.7 हेक्टेयर शुद्ध कमान क्षेत्र है। इस अध्ययन में परियोजना के लिए सर्वाधिक उपयुक्त नियोजन नीति का निर्धारण किया गया है।

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