पर्वत और उनकी नदियां

Submitted by Hindi on Fri, 02/18/2011 - 13:51
Source
गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा
(1) हिमालय पर्वत में से उद्गम पाने वाली नदियां- गंगा, सरस्वती, चंद्रभागा, (चिनाब), यमुना, शुतुद्री (सतलुज), वितस्ता (झेलम), इरावती (रावी), कुहू (काबूल), गोमती, धूतपापा (शारदा), बाहुदा (राप्ती), दृषद्वती (चितंग), विपाशा (बियास), देविका (दीग), सरयू (घाघरा), रंक्षू (रामगंगा), गंडकी (गंडक), कौशिकी (कोसी), त्रित्या और लोहित्या (ब्रह्मपुत्र)।

(2) पारियात्र याने अरावली पर्वत में से उद्गम पाने वाली नदियां- वेदस्मृति (बनास), वेदवती (बेरछ), वृत्रघ्नी (उतंगन), सिंधु (काली सिंध), वेण्या या वर्णाशा नंदिनी अथवा चंदना (साबरमती), सदानीरा या सतीरापारा (पार्वती), चर्मण्वती या धन्वती (चंबल), तूपी या रूपा या सूर्य (गंभीर), विदिशा या विदुषा (बेस), वेत्रवती या वेणुमती (बेतवा), शिप्रा या अवर्णी या अवंती।

(3) ऋक्ष पर्वत में से उद्गम पानी वाली नदियां- मंदाकिनी, दशार्णा (धसान), चित्रकूटा, तमसा (तौंस), पिप्पलिश्रोणी (पैसुनी), पिशाचिका, करमोदा या करतोया (कर्मनाशा), चित्रोत्पला या नीलोत्पला, विपाशा या विमला (बेवास), वंजुला या चंचला (जम्नी), बालुवाहिनी (वधैन), सुमेरुजा या सितेरजा (सोनार- बीरमा), शुक्तिमती (केन, शुक्ली या मक्षुणा (सक्री), त्रिविदा या ह्रदिका और क्रमू या क्रमात (क्रम्ह)।

(4) विंध्य पर्वत में से उद्गम पाने वाली नदियां- शिप्रा या भद्रा (सिप्रा), पयोष्णी, निर्विध्या (नेबुज), तापी निषधा या निषधावती (सिंद), वेण्वा या वेणा (वेणगंगा), वैतरणी (बैत्रणी), सिनीवाली या शिति बाहू , कुमुद्वती (स्वर्ण रेखा), करतोया या तोया (ब्राह्मणी), महागौरी (दामोदर), और पूर्णा, शोण (सोन), महानद (महानदी, और नर्मदा।

(5) सह्य (सह्याद्रि) पर्वत में से उद्गम पाने वाली नदियां- गोदावरी, भीमरथी (भीमा), कृष्णवेण्या (कृष्णा), वेण्या (वेणा), तुंग भद्रा, सुप्रयोगा (हगरी), बाह्य (वरदा), कावेरी और बंजुला (मंजीरा)।

(6) मलय पर्वत में से उद्गम पाने वाली नदियां-कृतमाला (ऋतु माला, वैगाई), ताम्रपर्णी, पुष्पजा (पुष्पवती, पंबिअर) और सत्पलावती (उत्पलावती, पेरियर)।

(7) महेन्द्र पर्वत में से उद्गम पाने वाली नदियां- पितृसोमा अथवा त्रिसामा, ऋषिकुल्या, इक्षुका या इक्षुला (बहुदा), त्रिदिवा या वेगवती, लांगुलिनी (लांगुलिया) और वंशकरा अथवा वंशधरा।

(8) शुक्तिमत पर्वत में से उद्गम पानेवाली नदियां- ऋषि का कुमारी अथवा सुकुमारी (सुकतेल), मंदगा (मंड), मंदवाहिनी महानदी), कृपा (अर्प), पलाशिनी (जोंक), और वामन (सुदामा)।

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