फ्लोराइड से धार जिले में बढ़ रही विकलांगता

Submitted by admin on Wed, 02/05/2014 - 10:51
धार जिले को फ्लोराइड की समस्या के लिए पूरे देश भर में जाना जाता है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार इस बात को चिंतित है किंतु लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इस दिशा में बड़ी ही लापरवाही कर रहा है। शासन द्वारा जिले को करीब 250 फिल्टर उपलब्ध कराए गए थे जिन्हें स्कूलों में 300 लीटर पानी की टंकी के साथ वितरित कर दिया गया। धार। आदिवासी बहुल धार जिले में फ्लोराइड युक्त पानी से बच्चों में विकलांगता व दांतों की खराबी की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में लाखों रुपए की लागत से खरीदकर तिरला सहित सरदारपुर आदि विकासखंड में वितरित किए गए फ्लोराइड मुक्त पानी के फिल्टर कबाड़ के रूप में स्कूल में सड़ रहे हैं।

दरअसल फ्लोराइड युक्त पानी को शुद्ध पानी में बदलने वाले इन फिल्टरों को वितरित तो कर दिया गया किंतु पीएचई ने विद्यालय के शिक्षकों को उसके उपयोग की विधि नहीं समझाई। वहीं इसमें से ज्यादातर फिल्टर लीकेज है। शासन का लाखों रुपया खर्च हो गया और एक भी बच्चा अभी तक शुद्ध पानी नहीं पी पाया है।

धार जिले को फ्लोराइड की समस्या के लिए पूरे देश भर में जाना जाता है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार इस बात को चिंतित है किंतु लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इस दिशा में बड़ी ही लापरवाही कर रहा है। शासन द्वारा जिले को करीब 250 फिल्टर उपलब्ध कराए गए थे जिन्हें स्कूलों में 300 लीटर पानी की टंकी के साथ वितरित कर दिया गया।

ये वे विद्यालय है, जो कि फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्र में है। जहाँ के बच्चे विकलांगता झेल रहे है। साथ ही दांतों की खराबी से पीड़ित है। तिरला विकासखंड के ग्राम हिम्मतनगर के ईजीएस शाला में रखा यह फिल्टर धूल खा रहा है। इसी प्रकार की स्थिति ईजीएस ग्राम माली की कुंडी में है। जो कि सीमेंट की बोरियों के बीच में फँसा हुआ है।

शिक्षक का कहना है कि इसका उपयोग एक भी बार नहीं हो सका। इसके अलावा ग्राम मोहनपुरा के माध्यमिक विद्यालय में जहाँ शिक्षकों के सामने फ्लोराइड प्रभावित बालक जितेंद्र एक उदाहरण है वहाँ भी शिक्षक इसे उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

वहाँ की शिक्षिका लक्ष्मी ठाकुर व संगीता चौहान ने बताया कि हमें न तो इसको चलाने की विधि बताई गई है और ना ही यह अच्छा फिल्टर है। सारा पानी लीकेज हो जाता है। मोहनपुरा ग्राम के ही प्राथमिक विद्यालय में कबाड़ के रूप में रखा यह फिल्टर उपयोग ही नहीं हो पा रहा है।

शिक्षक मोतीलाल पाटीदार ने बताया कि यह फिल्टर बुरी तरह से लीकेज हो चुका है। फ्लोराइड की समस्या से बेहद पीड़ित खांदनखुर्द के विद्यालय में भी फिल्टर का यही हाल है। जिले भर में जहाँ भी यह फिल्टर बाँटे गए है, उसे चलाने की तकनीक नहीं बताने के साथ-साथ उसके रख-रखाव की व्यवस्था नहीं मालूम होने के कारण करीब 8 माह से धूल खा रहे व कबाड़ हो चुके यह फिल्टर एक भी बच्चे को शुद्ध पानी नहीं दे पाए है।

फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर


ग्राम मोहनपुरा से लेकर अन्य ग्रामों में जहाँ भी स्कूल है, उसके पास ही हैंडपंप लगे हुए हैं। इन हैंडपंप का पानी उपयोग करना बच्चों से लेकर अन्य सभी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

फिल्टर जो कि स्वच्छ पानी दे सकता है किंतु स्कूल के बच्चे इस पानी को पीने के लिए मजबूर है। ग्राम मोहनपुरा में शिक्षक तो अपने घरों से बोतल में शुद्ध पानी ले जाते है किंतु बच्चे सेहत खराब करने वाला फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर है।

अब सुध लेंगे


लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री कोमल प्रसाद ने चर्चा में बताया कि जिले में करीब 250 फिल्टर बाँटे गए हैं। कीमत को लेकर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि अनुमानित रूप से एक फिल्टर 15 हजार रुपए का होगा।

उल्लेखनीय है कि इसकी कीमत काफी अधिक है। श्री कोमल प्रसाद ने बताया कि शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया था। जिस कंपनी द्वारा इसकी आपूर्ति की गई है उसे यह जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि फिल्टर कबाड़ हो रहे हैं तो यह बहुत ही दुख का विषय है। मैं अपने सहायक यंत्रियों को इसके लिए निर्देश दूँगा। हम शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए भी कार्यक्रम बना रहे हैं।

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