

मध्य प्रदेश की क्षिप्रा नदी
फोटो - डॉ. कुमार गौरव के सौजन्य से
जलवायु परिवर्तन, बढ़ती मानवीय गतिविधियों और जल की बढ़ती मांग के बीच शुष्क क्षेत्रों की नदियों को समझने और उनके संरक्षण के उपाय तलाशने के लिए देश के शोधकर्ता, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और अन्य विशेषज्ञ भोपाल में जुटेंगे। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भोपाल में 14 से 16 दिसंबर 2026 तक ‘XeroFluvia: A Conference on Dryland Rivers’ का आयोजन किया जाएगा।
नदियों को अक्सर सालभर बहने वाले जलस्रोतों के रूप में देखा जाता है, लेकिन कई नदियों में पानी का प्रवाह मौसमी होता है या कुछ विशेष परिस्थितियों में ही दिखाई देता है। शुष्क और जल की कमी वाले क्षेत्रों में ऐसी नदियों की प्रकृति, उनका बदलता प्रवाह और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ उनका संबंध समझना जल प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण है। XeroFluvia सम्मेलन का उद्देश्य इन्हीं नदी प्रणालियों के विज्ञान, प्रबंधन और स्थिरता से जुड़े सवालों पर चर्चा करना है।
IISER भोपाल के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित यह सम्मेलन शोधकर्ताओं, नदी विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनर्स, नीति निर्माताओं और विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य बदलती जलवायु, पर्यावरणीय परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक बदलावों के बीच शुष्क क्षेत्रों की नदियों को समझने, उनकी निगरानी करने और उनके प्रबंधन के लिए नए दृष्टिकोण विकसित करना है।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए आयोजन समिति के सदस्म्मेय डॉ. कुमार गौरव ने बताया कि इस सम्मेलन में दस प्रमुख विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। इनमें मौसमी और अंतरालिक नदियों की जल विज्ञान संबंधी विशेषताएं, नदी तंत्र पर मानवीय गतिविधियों का प्रभाव, पर्यावरणीय प्रवाह, नदी गलियारों और बाढ़ के मैदानों का प्रबंधन तथा नदी निगरानी की आधुनिक तकनीकें शामिल हैं।
इसके अलावा, डिजिटल जल प्रणालियों, सेंसर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्विन और डेटा आधारित मॉडलिंग के उपयोग पर भी चर्चा होगी। बाढ़, सूखा और अन्य जल संबंधी आपदाओं की निगरानी, पूर्वानुमान और जोखिम आकलन के साथ पारंपरिक ज्ञान, नदी प्रबंधन की नीतियों तथा भूजल और सतही जल के आपसी संबंध भी सम्मेलन के महत्वपूर्ण विषय होंगे।
उन्होंने बताया कि, सम्मेलन में प्री-कॉन्फ्रेंस वेबिनार, मुख्य व्याख्यान, आमंत्रित वक्ताओं के सत्र, तकनीकी सत्र और पोस्टर प्रस्तुतियां होंगी। शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों को अपने शोध, कार्यप्रणाली, व्यावहारिक अनुभव और केस स्टडी साझा करने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन के बाद 17 दिसंबर को मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में नर्मदा नदी के अध्ययन के लिए एक वैकल्पिक फील्ड ट्रिप प्रस्तावित है। इसमें नदी के प्रवाह की गति और नदी चैनल के अनुप्रस्थ खंडों का मापन, रेत खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों के प्रभावों का अध्ययन शामिल होगा। प्रतिभागियों को Acoustic Doppler Current Profiler (ADCP) से नदी प्रवाह मापन और ड्रोन आधारित मैपिंग का प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा।
बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में नदी प्रणालियों को समझना और उनके लिए टिकाऊ समाधान तलाशना जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। XeroFluvia सम्मेलन इसी उद्देश्य से वैज्ञानिक शोध, व्यावहारिक अनुभव और नीतिगत दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने का प्रयास करेगा।
सम्मेलन से जुड़ी जानकारी: https://xerofluvia.iiserb.ac.in
ईमेल: xerofluvia@iiserb.ac.in
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