डॉ. कुमारी रोहिणी
डॉ. कुमारी रोहिणी इंडिया वॉटर पोर्टल हिंदी में संपादक के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे जल, नदियों, भूजल, आर्द्रभूमि, जलवायु और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर तथ्य-आधारित, शोधपरक और सरल हिंदी में सामग्री तैयार करने और संपादित करने का काम करती हैं। उनका विशेष जोर जटिल पर्यावरणीय और जल संबंधी मुद्दों को इस तरह प्रस्तुत करने पर रहता है कि वे आम पाठकों के लिए सहज हों, लेकिन तथ्य और संदर्भ की गहराई भी बनी रहे।
भाषा, साहित्य, अनुवाद और संपादन के क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ रोहिणी ने अकादमिक और संपादकीय दोनों क्षेत्रों में काम किया है। वे कोरियाई भाषा और साहित्य की विशेषज्ञ हैं और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विदेशी भाषा अध्ययन विभाग में लगभग पांच वर्षों तक कोरियाई भाषा पढ़ा चुकी हैं। उन्होंने दिल्ली विश्विद्यालय के दक्षिण पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग में भी कोरियाई भाषा शिक्षण से जुड़े कार्य किए हैं। भाषा शिक्षण के साथ उनका काम साहित्यिक अनुवाद, संपादन, साहित्यिक आलोचना और भारत-कोरिया सांस्कृतिक संबंधों तक फैला है।
रोहिणी को कोरियाई-हिंदी, अंग्रेजी-हिंदी और साहित्यिक अनुवाद का विशेष अनुभव है। उनकी रुचि खास तौर पर सीधे कोरियाई से हिंदी में अनुवाद, भारतीय विद्यार्थियों के लिए अनुवाद शिक्षण और साहित्य के जरिए भाषा सीखने की संभावनाओं में रही है। उन्होंने कोरियाई साहित्य, अनुवाद सिद्धांत और भारतीय भाषाओं में विश्व साहित्य की उपस्थिति जैसे विषयों पर लेखन और वक्तव्य दिए हैं। उनकी हिंदी अनुवादित पुस्तकों में समकालीन अंतरराष्ट्रीय साहित्य की कई महत्वपूर्ण कृतियां शामिल हैं। सामंथा हार्वी के बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यास Orbital के उनके हिंदी अनुवाद को वैली ऑफ वर्ड्स का वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ अनुवाद पुरस्कार भी मिल चुका है।
इंडिया वॉटर पोर्टल में रोहिणी का काम विशेष रूप से हिंदी पाठकों के लिए विश्वसनीय जल और पर्यावरण संबंधी सामग्री तैयार करने पर केंद्रित है। वे नदियों और नदी बेसिन, भूजल संकट, आर्द्रभूमि, बाढ़, जलाशय, शहरी जल प्रबंधन, जल प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण से जुड़े विषयों पर सरकारी रिपोर्टों, तकनीकी दस्तावेजों और शोध अध्ययनों को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करती हैं। उनकी संपादकीय शैली में स्रोतों की प्रामाणिकता, आंकड़ों की जांच, स्थानीय संदर्भ और सहज हिंदी को खास महत्व दिया जाता है।
संपादकीय और अनुवाद कार्यों के अलावा रोहिणी कार्यशालाओं, व्याख्यानों, साहित्यिक आयोजनों और शैक्षणिक मंचों पर भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने भाषा, अनुवाद, कोरियाई साहित्य और भारत-कोरिया संबंधों से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और पाठकों के साथ संवाद किया है। वे अनुवाद को केवल भाषा बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि संदर्भ, संस्कृति और पाठक के बीच पुल बनाने का माध्यम मानती हैं।
काम के अलावा रोहिणी को साहित्य पढ़ना, यात्रा और विभिन्न संस्कृतियों को समझना पसंद है। उनकी विशेष रुचि ऐसे लेखन में है जो साहित्य, भाषा और पर्यावरण को आम पाठकों के अनुभव से जोड़ सके।