लेसर येलो लेग सिग पक्षी 

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फोटो - वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन से ई-मेल पर प्राप्त 

दम तोड़ते वेटलैंड्स के बीच 49% प्रवासी प्रजातियां विलुप्ति की ओर

स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स माइग्रेटरी स्पीशीज - अंतरिम रिपोर्ट 2026 गुरुवार को जारी की गई। इस रिपोर्ट में पृथ्‍वी से विलुप्त होतीं प्रजातियों पर चर्चा की गई है।
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बढ़ती मानव गतिवधियों के कारण दुनिया भर में तमाम जीवों का जीवन संकट में है। हजारों की संख्‍या में जीव ऐसे हैं जो विलुप्त होने की कगार में हैं। ऐसे में अगर प्रवासी पक्षियों की बात करें तो उनके लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। मार्च 2026 में ब्राजील में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के महासम्मेलन (CMS COP15) से पहले जारी एक नई अंतरिम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संधियों के माध्यम से संरक्षित होने के बावजूद, प्रवासी पक्षियों व जीवों की संख्‍या में सुधार के बजाय गिरावट आई है।  

1970 से अब तक 22% प्राकृतिक आवास नष्ट

ग्लोबल वेटलैंड्स आउटलुक 2025 के अनुसार वर्ष 1970 के बाद से, अनुमानित 41.1 करोड़ हेक्टेयर आर्द्रभूमियां जो वैश्विक कुल क्षेत्रफल का लगभग 22% हैं, नष्ट हो चुकी हैं, और इसमें अभी भी 0.52% की वार्षिक दर से गिरावट जारी है। वर्तमान में वेटलैंड्स का क्षरण, उनके पूरी तरह खत्म होने जितना ही बड़ा संकट बन गया है। शेष बचे हुए वेटलैंड्स में से लगभग 25% पारिस्थितिक रूप से खराब स्थिति में हैं, और सभी क्षेत्रों में यह अनुपात लगातार बढ़ रहा है। कृषि विस्तार, प्रदूषण, बुनियादी ढांचे का विकास, आर्द्रभूमि में जल पहुंचने में अवरोधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों जैसे कई परस्पर दबावों ने इनके पुनरुद्धार को और अधिक जटिल और तत्काल आवश्यक बना दिया है।

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सारुस क्रेन 

फोटो - वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन से ई-मेल पर प्राप्त 

खतरे में जल के प्रहरी: आंकड़े क्या कहते हैं?

रिपोर्ट का सबसे डरावना पहलू यह है कि 49% प्रवासी प्रजातियों की आबादी अब गिरावट की ओर है, जो दो साल पहले 44% थी। यह बदलाव साधारण परिवर्तन नहीं है, बल्कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के असंतुलन की ओर गंभीर इशारा है। 

लगभग एक चौथाई (24%) CMS-सूचीबद्ध प्रजातियां विलुप्ति के खतरे में हैं। वहीं 2022 के बाद से 26 प्रजातियों को 'अधिक खतरनाक' श्रेणी में डाला गया है यानि कि ये तेजी से बदतर स्थिति की ओर अग्रसर हैं। इनमें 18 केवल समुद्री पक्षी हैं। 

यह आंकड़े 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स माइग्रेटरी स्पीशीज' की अंतरिम रिपोर्ट 2026 में प्रस्तुत किए गए हैं। इन नई चेतावनियों को 23-29 मार्च, 2026 तक ब्राजील के कैम्पो ग्रांडे में 'वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन' (CMS COP15) की 15वीं बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा, जो कि संयुक्त राष्ट्र की एक संधि है। इस बैठक के बाद विलुप्त होने की कगार पर सूचीबद्ध जीवों की सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसे हम इंडिया वाटर पोर्टल पर भी प्रकाशित करेंगे।  

कम होता वेटलैंड्स का दायरा यानि खत्म होते सुरक्षित ठिकाने

जलीय पक्षियों और समुद्री जीवों के लिए 'की बायोडायवर्सिटी एरियाज' (KBA) उनके जीवन का आधार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में ऐसे 9,372 महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई है। 

  • चिंताजनक तथ्य यह है कि इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों का औसतन 47% हिस्सा किसी भी संरक्षित दायरे में नहीं आता है। 

  • 'ग्लोबल वेटलैंड आउटलुक 2025' के अनुसार, दुनिया के पांचवें हिस्से से अधिक वेटलैंड्स वर्तमान में 'खराब' स्थिति में हैं। प्रदूषण, शहरीकरण और अनियंत्रित इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इसके प्रमुख कारण हैं।

रिपोर्ट से निकले कुछ विशेष ज्ञान-बिंदु:

  • एवियन इन्फ्लुएंजा का कहर: 2021 से फैले H5N1 वायरस ने अफ्रीकी पेंगुइन (अत्यंत संकटग्रस्त) और दक्षिण अमेरिकी सी लायन जैसे जीवों की आबादी को भारी नुकसान पहुँचाया है। 

  • समुद्री पक्षी 'स्लेंडर-बिल्ड कर्लियू' (Slender-billed Curlew) जैसी प्रजातियों का अब विलुप्त माना जाना इस बात का प्रमाण है कि यदि समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो परिणाम कितने विनाशकारी हो सकते हैं। 

  • भारत के तटीय क्षेत्रों सहित पूर्वी एशियाई-ऑस्ट्रेलियाई और अमेरिकी फ्लाईवे में प्रवासी पक्षियों की आबादी में भारी कमी दर्ज की गई है। 

  • इन पक्षिओं के प्रवास में कई बाधाएं आ रही हैं जैसे फेंसिंग (बाड़े), बांध, सड़कें और बिजली की लाइनें, आदि इन जीवों के सदियों पुराने रास्तों में मौत का कारण साबित हो रहे हैं। 

क्या अब भी उम्मीद है?

रिपोर्ट के अनुसार समन्वित संरक्षण प्रयासों के कारण साइगा एंटीलोप की स्थिति में सुधार हुआ है और इसे 'एंडेंजर्ड' से 'नियर थ्रेटेंड' श्रेणी में लाया गया है। इसी तरह, सीमिटर-हॉर्न्ड ओरिक्स और भूमध्यसागरीय मोंक सील की आबादी में भी मामूली वृद्धि देखी गई है, जो यह दर्शाती है कि सही निवेश और राजनीतिक इच्छाशक्ति से बदलाव संभव है। 

केवल संकट में जागना काफी नहीं

CMS की कार्यकारी सचिव एमी फ्रैंकेल ने अंतरिम रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, "यदि हम केवल संकट के चरम पर पहुंचने पर हस्तक्षेप करेंगे, तो बहुत देर हो जाएगी। हमें समरकंद रणनीतिक योजना (2024-2032) के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तुरंत प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है।

क्या है समरकंद रणनीतिक योजना 2024-2032?
फरवरी 2024 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित CMS COP14 के दौरान समरकंद रणनीतिक योजना (Samarkand Strategic Plan) अपनाई गई थी। यह अगले दशक (2032 तक) के लिए दुनिया भर में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण का एक 'ब्लूप्रिंट' या रोडमैप है। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य उन प्रजातियों के विलुप्ति के खतरे को कम करना है जो एक देश से दूसरे देश प्रवास करती हैं। पक्षियों और जानवरों के प्रवास मार्ग अक्सर क्षतिग्रस्त या बाधित हो जाते हैं। यह योजना सुनिश्चित करती है कि उनके रुकने के स्थान और प्रजनन क्षेत्र आपस में जुड़े रहें और सुरक्षित हों। इसके अलावा अवैध शिकार, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों को कम करने के लिए सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर देती है। इसके तहत विकासशील देशों को प्रवासी जीवों के संरक्षण के लिए तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाती है।

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