प्रयागराज में महाकुंभ (साभार - डाउन टू अर्थ)
प्रयागराज में महाकुंभ (साभार - डाउन टू अर्थ)

महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में बढ़ा मल-संबंधी फीकल कोलीफार्म का स्तर

सीपीसीबी ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट, कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान नदियों में फीकल कोलीफार्म का स्तर बढ़ा है, जल प्रदूषण से स्नान के लायक नहीं रहा पानी।
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नई दिल्ली, पेट्र। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान विभिन्न स्थानों पर फीकल कोलीफार्म का स्तर बढ़ा पाया गया है। परिणाम है कि कई जगहों पर जल स्नान के लायक नहीं है। महाकुंभ में गंगाभक्त ऐसे पानी से नहा रहे हैं, जो नहाने लायक नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने रिपोर्ट दायर कर सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को यह जानकारी दी। सीपीसीबी के अनुसार फीकल कोलीफार्म सीवेज प्रदूषण का संकेतक है। इसकी संख्या 100 मिलीलीटर पानी में 2500 तक होनी चाहिए।

क्या होता है फीकल कोलीफार्म 

फीकल कोलीफार्म (Fecal Coliform) एक प्रकार का कीटाणु है जो मल संबंधी प्रदूषण का प्रतीक है. यह कीटाणु मानव या जानवरों के शरीर के अंगों में पाए जाते हैं और उनके शरीर के अवशेषों को नदियों और जल स्रोतों में जाने के कारण वे जल प्रदूषण का कारण बनते हैं। 

प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में सीवेज रोकने के मुद्दे पर एनजीटी में सुनवाई

प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में सीवेज प्रवाह को रोकने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि सीपीसीबी ने रिपोर्ट दायर की थी, जिसमें कुछ उल्लंघनों की ओर इशारा किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है, निगरानी वाले स्थानों पर फीकल कोलीफार्म (एफसी) के संबंध में नदी के जल की गुणवत्ता स्नान के लायक नहीं थी। महाकुंभ मेले के दौरान, बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज में गंगा नदी में स्नान करते हैं, जिससे फीकल कोलीफार्म की मात्रा में वृद्धि हुई है। पीठ ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने व्यापक कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के ट्रिब्यूनल के पहले के निर्देश का पालन नहीं किया है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि यूपीपीसीबी ने केवल कुछ जल परीक्षण रिपोर्टों के साथ एक कवरिंग लेटर दाखिल किया था। केंद्रीय प्रयोगशाला, यूपीपीसीबी के प्रभारी द्वारा भेजे गए 28 जनवरी, 2025 के कवरिंग लेटर के साथ संलग्न दस्तावेज की समीक्षा करने पर भी पता चलता है कि विभिन्न स्थानों पर फीकल कोलीफार्म के उच्च स्तर पाए गए हैं। ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश राज्य के वकील को रिपोर्ट की जांच करने और जवाब दाखिल करने के लिए एक दिन का समय दिया।

पीठ ने यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव और प्रयागराज में गंगा नदी में पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार संबंधित राज्य प्राधिकरण को 19 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होने का निर्देश दिया।

महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में मल संदूषण: एक गंभीर चिंता

हर 12 साल में एक बार आयोजित होने वाला महाकुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समारोहों में से एक है। लाखों श्रद्धालु इस दौरान प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर स्नान करते हैं। हालांकि, इस विशाल आयोजन के साथ कुछ गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं, जिनमें से एक है नदियों में मल संदूषण का बढ़ता स्तर।

फीकल कोलीफॉर्म का बढ़ता स्तर

हाल ही में आई खबरों के अनुसार, महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर काफी बढ़ गया है। फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का एक समूह है जो मानव और जानवरों के मल में पाया जाता है। पानी में इसकी उपस्थिति मल संदूषण का संकेत देती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

फीकल कोलीफॉर्म बढ़ने से दो चीजें होगी। पहला जल जनित रोग: फीकल कोलीफार्म का उच्च स्तर विभिन्न जल जनित रोगों जैसे कि हैजा, टाइफाइड, दस्त आदि का कारण बन सकता है। यह विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक है। और दूसरा पर्यावरण पर प्रभाव: मल संदूषण नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है। यह जलीय जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है और नदियों के पानी की गुणवत्ता को कम कर सकता है।

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