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भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) या रूम सागर: परिचय, इतिहास और रोचक तथ्य
भूमध्य सागर जिसे हिंदी में रूम सागर भी कहा जाता है, विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समुद्रों में से एक है। यह यूरोप, एशिया और अफ्रीका, तीनों महाद्वीपों के बीच स्थित एक विशाल अंतरमहाद्वीपीय सागर है। प्राचीन काल से ही यह व्यापार, संस्कृति, सभ्यता, नौवहन और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
भूमध्य सागर का नाम लैटिन भाषा के शब्द Mediterraneus से लिया गया है, जिसका अर्थ है "भूमि के बीच स्थित समुद्र" । यही कारण है कि इसे हिंदी में भूमध्य सागर कहा जाता है।
भूमध्य सागर का परिचय
भूमध्य सागर पश्चिम में जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (Strait of Gibraltar) के माध्यम से अटलांटिक महासागर से जुड़ा है। पूर्व में यह स्वेज नहर (Suez Canal) के जरिए लाल सागर (Red Sea) और फिर हिंद महासागर से जुड़ता है। उत्तर में यूरोप, दक्षिण में अफ्रीका और पूर्व में एशिया इसकी सीमाए बनाते है।
यह सागर लगभग 25 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी औसत गहराई लगभग 1,500 मीटर है, जबकि इसकी अधिकतम गहराई कैलिप्सो डीप में लगभग 5,267 मीटर मानी जाती है।
भूमध्य सागर कहां स्थित है?
भूमध्य सागर तीन महाद्वीपों से घिरा हुआ है -
उत्तर - यूरोप
दक्षिण - अफ्रीका
पूर्व - एशिया
पश्चिम - जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के माध्यम से अटलांटिक महासागर
भूमध्य सागर से जुड़े प्रमुख देश
भूमध्य सागर के तट पर लगभग 22 देश स्थित हैं। इनमें प्रमुख है -
यूरोप - स्पेन, फ्रांस, इटली, ग्रीस, क्रोएशिया, स्लोवेनिया, अल्बानिया, मोंटेनेग्रो ,माल्टा
एशिया - तुर्की, साइप्रस, सीरिया, लेबनान, इज़राइल, फ़िलिस्तीन
अफ्रीका - मिस्र, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, मोरक्को
रूम सागर क्यों कहा जाता है?
भारत और पश्चिम एशिया के प्राचीन साहित्य में भूमध्य सागर को रूम सागर कहा गया है। इसका कारण यह है कि इस क्षेत्र पर लंबे समय तक रोमन साम्राज्य और बाद में पूर्वी रोमन साम्राज्य, जिसे "रूम" कहा जाता था, का प्रभाव रहा। इसलिए भारतीय, फारसी और अरबी ग्रंथों में इसे रूम सागर के नाम से भी जाना जाता है।
भूमध्य सागर का इतिहास
भूमध्य सागर मानव सभ्यता का पालना माना जाता है। इसके तट पर विकसित हुई प्रमुख सभ्यतायें जिसमें मिस्र की सभ्यता, यूनानी सभ्यता, रोमन सभ्यता, फोनीशियन सभ्यता, कार्थेज सभ्यता शामिल है। यही सागर प्राचीन व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और समुद्री मार्गों का प्रमुख केंद्र था। यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच व्यापारिक जहाज इसी मार्ग से आते-जाते थे।
भूमध्य सागर का आर्थिक महत्व
अंतरराष्ट्रीय व्यापार - विश्व व्यापार का एक बड़ा हिस्सा भूमध्य सागर से होकर गुजरता है। स्वेज नहर के माध्यम से एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का यह सबसे छोटा और महत्वपूर्ण मार्ग है।
पर्यटन - भूमध्य सागर के किनारे स्थित शहर जैसे बार्सिलोना, रोम, एथेंस, वेनिस, नीस, माल्टा विश्व के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिने जाते है।
मत्स्य पालन - यह क्षेत्र विभिन्न प्रकार की समुद्री मछलियों, ट्यूना, सार्डिन और समुद्री खाद्य पदार्थों के लिए प्रसिद्ध है।
ऊर्जा संसाधन - हाल के वर्षों में भूमध्य सागर के पूर्वी भाग में प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार मिले हैं, जिससे इसका भू-राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
भूमध्य सागर की प्रमुख विशेषताएं
यह लगभग चारों ओर से भूमि से घिरा समुद्र है।
जिब्राल्टर जलडमरूमध्य इसे अटलांटिक महासागर से जोड़ता है।
स्वेज नहर इसे लाल सागर से जोड़ती है।
इसका जल सामान्यतः अधिक खारा (Saline) होता है।
यहाँ गर्म और शुष्क ग्रीष्म ऋतु तथा हल्की, वर्षायुक्त सर्दियाँ होती हैं।
यह विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है।
भूमध्यसागरीय जलवायु (Mediterranean Climate)
भूमध्य सागर के आसपास पाए जाने वाली जलवायु को भूमध्यसागरीय जलवायु कहा जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं -
गर्म एवं शुष्क ग्रीष्म ऋतु
हल्की एवं वर्षायुक्त शीत ऋतु
जैतून, अंगूर, संतरा और नींबू की खेती के लिए उपयुक्त
पर्यटन के लिए अनुकूल मौसम
भारत में ऐसी जलवायु प्राकृतिक रूप से नहीं पाई जाती, लेकिन हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ उंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी कुछ विशेषताएं सीमित रूप में देखी जा सकती है
भूमध्य सागर में मिलने वाली प्रमुख नदियां
कई महत्वपूर्ण नदियां भूमध्य सागर में गिरती हैं, जिनमें शामिल है -
नील नदी (Nile)
रोन नदी (Rhône)
पो नदी (Po)
एब्रो नदी (Ebro)
टाइबर नदी (Tiber)
भूमध्य सागर के प्रमुख द्वीप
सिसिली (इटली)
सार्डिनिया (इटली)
कॉर्सिका (फ्रांस)
साइप्रस
क्रीट (ग्रीस)
माल्टा
पर्यावरणीय चुनौतियां
भूमध्य सागर कई पर्यावरणीय समस्याओं का सामना कर रहा है -
समुद्री प्रदूषण
प्लास्टिक कचरा
अत्यधिक मत्स्य दोहन
जलवायु परिवर्तन
समुद्र के तापमान में वृद्धि
जैव विविधता में कमी
इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न भूमध्यसागरीय देशों द्वारा संयुक्त संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
भूमध्य सागर या रूम सागर केवल एक समुद्र नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति, व्यापार और वैश्विक संपर्क का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच स्थित यह समुद्र आज भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पर्यटन, मत्स्य पालन और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ते प्रदूषण के बीच इसके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतत समुद्री प्रबंधन आवश्यक है।
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