पुनर्वास (Rehabilitation) क्या है? अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

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पुनर्वास (Rehabilitation) क्या है? अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

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पुनर्वास (Rehabilitation) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति, परिवार, समुदाय या समूह को किसी आपदा, बीमारी, दुर्घटना, संघर्ष, विकास परियोजना या विस्थापन के बाद पुनः सामान्य जीवन जीने योग्य बनाया जाता है। इसमें केवल आवास उपलब्ध कराना ही शामिल नहीं होता, बल्कि आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर की पुनर्स्थापना भी शामिल होती है।

सरल शब्दों में, किसी संकट या नुकसान के बाद लोगों को फिर से सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को पुनर्वास कहा जाता है।

पुनर्वास की परिभाषा

पुनर्वास वह सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसके तहत प्रभावित व्यक्तियों या समुदायों को उनके खोए हुए संसाधनों, आजीविका, आवास और सामाजिक अवसरों की भरपाई करते हुए पुनः स्थापित किया जाता है। भारत सरकार की भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन संबंधी नीतियों के अनुसार पुनर्वास का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को बेहतर या कम से कम पूर्ववत जीवन स्तर उपलब्ध कराना है।

पुनर्वास के उदाहरण

कुछ प्रमुख पुनर्वास स्थितियां निम्न प्रकार है -

  • बांध निर्माण से विस्थापित गांवों का पुनर्वास

  • सड़क, रेल या औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास

  • बाढ़, भूकंप या चक्रवात प्रभावित लोगों का पुनर्वास

  • युद्ध या संघर्ष प्रभावित लोगों का पुनर्वास

  • दिव्यांग व्यक्तियों का सामाजिक और व्यावसायिक पुनर्वास

  • नशामुक्ति और स्वास्थ्य पुनर्वास कार्यक्रम

पुनर्वास के प्रमुख प्रकार

  • सामाजिक पुनर्वास - प्रभावित व्यक्तियों को सामाजिक जीवन में पुनः स्थापित करना।

  • आर्थिक पुनर्वास - रोजगार, कृषि भूमि, व्यवसाय या अन्य आय स्रोत उपलब्ध कराना।

  • भौतिक पुनर्वास - आवास, सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना।

  • चिकित्सा पुनर्वास - बीमारी, दुर्घटना या दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार और सहायता प्रदान करना।

  • आपदा पुनर्वास -  बाढ़, भूकंप, चक्रवात या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों का पुनर्स्थापन।

पुनर्वास का महत्व

  • जीवन स्तर की बहाली - पुनर्वास प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में लौटने का अवसर प्रदान करता है।

  • आजीविका सुरक्षा - रोजगार और आय के साधन उपलब्ध कराकर आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जाती है।

  • सामाजिक न्याय - विकास परियोजनाओं या आपदाओं से प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा होती है।

  • गरीबी और असमानता में कमी - संसाधनों की हानि से उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक संकट को कम किया जा सकता है।

  • सतत विकास को बढ़ावा - विकास परियोजनाओं में पुनर्वास सुनिश्चित करने से सामाजिक संघर्ष कम होते हैं।

  • मानवाधिकार संरक्षण - प्रभावित समुदायों को सम्मानजनक जीवन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

पुनर्वास को प्रभावित करने वाले कारक

  • विस्थापन का कारण - परियोजना आधारित, प्राकृतिक आपदा या संघर्षजनित विस्थापन की प्रकृति अलग होती है।

  • सरकारी नीतियां - पुनर्वास की सफलता नीति और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।

  • भूमि और संसाधनों की उपलब्धता - पुनर्वास के लिए पर्याप्त भूमि और आधारभूत सुविधाएं आवश्यक होती हैं।

  • सामुदायिक भागीदारी - स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पुनर्वास अधिक प्रभावी बनता है।

  • वित्तीय संसाधन - पर्याप्त बजट और दीर्घकालिक सहायता पुनर्वास की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत में पुनर्वास की कानूनी व्यवस्था

भारत में भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से जुड़े पुनर्वास का प्रमुख कानूनी आधार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 है।

इस अधिनियम का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना है।

पुनर्वास और पर्यावरण

बड़े बांध, खनन परियोजनाएं, औद्योगिक क्षेत्र और वन्यजीव संरक्षण परियोजनाएं अक्सर लोगों के विस्थापन का कारण बनती हैं। ऐसे मामलों में प्रभावी पुनर्वास पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, समुद्री कटाव, सूखा और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके चलते जलवायु-प्रेरित विस्थापन (Climate-induced Displacement) की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में पुनर्वास भविष्य की जलवायु अनुकूलन रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

पुनर्वास के उपयोग

  • विस्थापित परिवारों का पुनर्स्थापन

  • आपदा प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण

  • आजीविका बहाली

  • सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना

  • स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं की उपलब्धता

  • सामुदायिक विकास

  • मानवाधिकार संरक्षण

पुनर्वास केवल लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर बसाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन, आजीविका, सामाजिक संबंधों और भविष्य को पुनः स्थापित करने का प्रयास है। विकास परियोजनाओं, आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच प्रभावी पुनर्वास सामाजिक न्याय, मानवाधिकार संरक्षण और सतत विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन गया है।

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