.jpg?w=480&auto=format%2Ccompress&fit=max)
.jpg?w=480&auto=format%2Ccompress&fit=max)
क्या आप जानते हैं कि पानी सोने से भी ज्यादा मूल्यवान है? सोने के बगैर तो आप ताउम्र जिंदगी काट सकते हैं लेकिन पानी के बगैर शायद एक दिन भी नहीं। जो चीज इतनी अनिवार्य और कीमती है, क्या आप उसे व्यर्थ में बहा तो नहीं रहे?
यह तो आप और हम सभी जानते हैं कि गर्मी में जल संकट गहरा जाता है। यह स्थिति सारे देश में प्रत्येक गांव और शहर में उत्पन्न होती है, जहां लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं तथा उसे पाने के लिए मीलों की दूरी तय करते हैं। विडम्बना है कि हम पानी के लिए सरकार या प्रशासन को कोसते हैं लेकिन अपने भीतर झांक कर नहीं देखते कि हम इस दुर्लभ वस्तु का कितना दुरूपयोग या अपव्यय करते हैं।काश, यदि हम अपनी जिम्मेदारी को समझें और पानी के इस्तेमाल में मितव्ययता बरतें तो इसकी काफी बचत हो सकती है। शायद आप नहीं जानते कि जाने-अनजाने में आप अपने ही घर-परिवार में कितना पानी बर्बाद कर देते हैं।
'भूमिगत जलस्त्रोतों में आर्सेनिक, लेड, पारा, कैडमियम और फ्लोराइड जैसे सूक्ष्म तत्वों की मात्रा बढ़ रही है, जो कि हानिकारक हो सकती है। ये तत्व जब शरीर में जमा होने लगते हैं तो तरह-तरह की बीमारियां पैदा करते हैं। आर्सेनिक के कारण कैंसर की आशंका बढ़ जाती है, खासतौर पर गुर्दे, यकृत, आंत और त्वचा कैंसर की। इसी प्रकार फ्लोराइड की अधिकता से हड्डियां कमजोर होने लगती है तथा जोड़ों में दर्द की शिकायत हो सकती है। कैडमियम का प्रभाव गुर्दों पर पड़ता है जबकि पारे की अधिकता मस्तिष्क के केंद्रीय तंत्रिकातंत्र को प्रभावित करती है।'
क्या आप जानते हैं कि घरों में लगे नल से मामूली लीकेज होने पर भी महीने भर में सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। हर एक मिनट में एक नल से 50 बूंद पानी टपकता है। घर में नल खराब है या लीकेज है उसके हिसाब से पानी का अपव्यय होता है। अधिकांश घर-परिवारों में ब्रश करने के दौरान वॉश बेसिन का नल खुला रखा जाता है। यदि दो मिनट भी एक व्यक्ति को ब्रश करने में लगते हैं। तो चार लीटर पानी बह जाता है। यदि परिवार में पांच सदस्य हैं तो 20 लीटर पानी नष्ट हो जाता है। यदि रात्रि को सोने के पहले भी ब्रश करने की आदत है तो उसमें भी 20 लीटर पानी बर्बाद हो सकता है। यानि एक दिन में 40 लीटर पानी का अपव्यय। शुद्ध और सुरक्षित पेयजल के लिए आजकल घरों में आरओ मशीन लगाई जाने लगी है। क्या आपने कभी गौर किया है कि एक लीटर पानी पीने के लिए चार लीटर पानी व्यर्थ में वह जाता है। यह वह पानी है जिसका इस्तेमाल किसी अन्य कार्य में नहीं हो सकता। यदि आपके परिवार में 20 लीटर पानी की रोजाना खपत है तो 80 लीटर पानी की बर्बादी ।
टॉयलेट में पानी का अपव्यय बहुत होता है। एक बार फ्लश चालू करने में 20 लीटर पानी खर्च हो जाता है। यदि परिवार में पांच सदस्य हैं और 24 घंटे में दो बार भी शौच के लिए जाते हैं तो 200 लीटर पानी की बर्बादी फ्लश की बजाय बाल्टी से पानी देने से इस अपव्यय को कम किया जा सकता है। वॉशिंग मशीन ने आपका काम भले ही आसान कर दिया हो, लेकिन उसमें कपड़े धोने के लिए न्यूनतम 25 लीटर वॉश में तथा 50 लीटर स्पिन करने के दौरान खर्च होता है। यदि 2-2 कपड़ों के लिए मशीन लगाई जाए तो पानी की बर्बादी बहुत होती है। इसलिए जब वांछित मात्रा में कपड़े इकट्ठे हो जाएं, तब मशीन चालू करना चाहिए। शॉवर से नहाने में मजा जरूर आता है लेकिन पानी की बर्बादी भी खूब होती है क्योंकि जितना पानी शरीर पर गिरता है, उससे कहीं अधिक शरीर के चारों ओर गिरता है। इसकी बजाय बाल्टी से नहाने में 50 प्रतिशत पानी की बचत हो सकती है।
यदि आप नल के नीचे रखकर बर्तन मांजते, धोते या साफ करते हैं तो पानी बहुत नष्ट होता है। इसकी बजाय टब में पानी लेकर धोएं तो इसकी बर्बादी कम होगी। पुरुषों की आदत होती है कि वॉश बेसिन के सामने खड़े होकर शेविंग करते हैं और वह इस दौरान नल चालू कर देते हैं। यदि पांच मिनट भी उन्हें शेविंग में लगते हैं तो काफी मात्रा में पानी व्यर्थ में बह जाता है।घर में दो पहिया वाहन और चार पहिया वाहनों को धोने के लिए पाइप का इस्तेमाल किया जाता है। एक बार में एक कार को पाइप से धोने में कम से कम 150 लीटर पानी खर्च होता है। जबकि बाल्टी से धोने में 50 लीटर भी खर्च नहीं होता।
ऐसे घर परिवार भी हैं जो नीचे के टैंक से ऊपर की टंकी भरने के लिए मोटर तो चलाते हैं लेकिन उसे बंद करना भूल जाते हैं। ऐसे में टंकी ओवरफ्लो होती रहती है और पानी व्यर्थ में बहता रहता है। यह भी देखा गया है कि घर के सदस्य, खासतौर पर बच्चे गिलास भर पानी तो लेते हैं लेकिन आधा पीकर आबा जूठा छोड़ देते हैं, जो फेंकने में जाता है। हर बार ऐसा होता है। ऐसे में कई लीटर पानी दिनभर में व्यर्थ चला जाता है। उतना ही पानी गिलास में भरें जितना पीना हो ।
'
पानी मानव की मूल आवश्यकता है। इसकी सर्वाधिक महत्वपूर्ण जरूरत पीने के लिए है। भोजन के बगैर व्यक्ति एक हफ्ते जिंदा रह सकता है, लेकिन पानी के बगैर शायद एक दिन जो पानी आपके लिए इतना जरूरी है, उसके बारे में कितने सचेत हैं आप? क्या वह पूर्णरूप से शुद्ध या निरापद है? अशुद्ध या प्रदूषित पानी असुरक्षित पानी की श्रेणी में आता है और उसके सेवन का मतलब है बीमारियों को दावत देना ।'
बाथ-टब में बैठकर नहाने से भी काफी मात्रा में पानी खर्च होता है। बाथ टब को भरने में जितना पानी लगता है उतने से पूरा परिवार नहा सकता है। घर में बगीचा हो या गमले में बागवानी की हो तो पाइप से पानी देने में पानी बहुत खर्च होता है। इसकी बजाय शॉवर से देने से पानी की बचत होती है। पानी एक राष्ट्रीय सम्पदा है जो असीमित नहीं है। उसकी बर्बादी रोकना हर नागरिक का कर्तव्य है। क्यों न इसकी शुरूआत हम अपने घर-परिवार से ही करें ?
यह तो आप और हम सभी जानते हैं कि जल ही जीवन है और जीवन के लिए जल अनिवार्य है। भोजन के बगैर भले ही हम कुछ दिन जी लें, लेकिन पानी के बगैर एक दिन निकालना भी दूभर हो जाता है। सच तो यह है कि पानी का सेवन शरीर को सामान्य रूप से गतिशील बनाने में मददगार होता है। पानी का सेवन न केवल हमें विभिन्न रोगों की चपेट में आने से बचाता है, अपितु कुछ रोगों की तो रामबाण दवा भी है।
गौरतलब है कि प्लास्टिक में पाए जाने वाले रसायन सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक होते हैं। इसमें एंडोक्राइनल डिज़ीज जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, पॉलिसिस्टिक ओवरी के साथ कैंसर और हार्ट की बीमारी तक हो सकती है। बोतलबंद पानी की भी एक्सपायरी डेट होती है। अतः उसे खरीदते समय इसका ध्यान रखना चाहिए। एक्सपायरी डेट निकल चुकी हो तो उसे किसी भी कीमत पर नहीं खरीदें ।
संपर्क करें:
डॉ. विनोद गुप्ता 43 / 2, सुदामानगर, रामटेकरी, मन्दसौर (म.प्र.) 458001 मो. न.: 9826042811 ईमेल:
anucomputer@rediffmail.com
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें