वलयाकार सूर्यग्रहण

वलयाकार सूर्यग्रहण

फोटो - नासा के सौजन्य से 

समुद्री जल और जीवों पर सूर्य ग्रहण का प्रभाव, घटना के पीछे का विज्ञान

जानिए सूर्य ग्रहण समुद्री जल और समुद्री जीवन को कैसे प्रभावित करता है। पुदुचेरी में किए गए वैज्ञानिक शोध पर आधारित विस्तृत लेख।
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सदियों से सूर्य ग्रहण को लेकर मानवीय जिज्ञासा और अनेक भ्रांतियां जुड़ी रही हैं। आज जब हम एक और सूर्य ग्रहण के साक्षी बन रहे हैं, तो एक सामान्य प्रश्न अक्सर हमारे मन में उठता है: क्या सूर्य ग्रहण हमारी पृथ्‍वी को प्रभावित करता है? इसका उत्तर है हॉं, लेकिन यह प्रभाव अल्पकालिक होता है और सीधे-सीधे समुद्री जल पर पड़ता है। 

पौराणिक कथाएं ग्रहण की वजह से पड़ने वाले प्रभाव को अलग-अलग रूप में देखती हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह घटना पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन में आने वाले एक व्यवधान के रूप में होता है। यह व्यवधान समुद्र की पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव डालता है, जोकि ऊंची-ऊंची लहरों के रूप में दिखाई भी देता है। 

17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण 

आज यानी 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्यग्रहण लग रहा है। यह एक वलयाकार सूर्यग्रहण है, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) भी कहते हैं। भारतीय समयानुसार ग्रहण के आरंभ का समय दोपहर 3:26 बजे है। शाम 5:42 बजे ग्रहण अपनी चरम सीमा पर होगा और शाम 7:57 बजे ग्रहण समाप्त हो जाएगा। करीब लगभग 4 घंटे 31 मिनट तक की अवधि का यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। यह मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, मेडागास्कर और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।

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समुद्री लहरें

फोटो- मैथ्‍यू टी राडेर (विकीकॉमन्स) 

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या होता है? 

सूर्य ग्रहण केवल एक दृश्य घटना नहीं है, बल्कि यह एक तीव्र वायुमंडलीय और भौतिक परिवर्तन है। जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है, तो निम्नलिखित वैज्ञानिक परिवर्तन होते हैं:

  • सौर विकिरण में कमी: चंद्रमा की छाया के कारण पृथ्वी की सतह पर पहुंचने वाले सौर विकिरण में अचानक से भारी गिरावट आती है।

  • तापमान में गिरावट: सतह के वायु तापमान तेजी से कम होता है।  

  • वायुमंडलीय दबाव और हवा: तापमान बदलने से दबाव प्रवणता में बदलाव आता है, जिससे हवा की दिशा अक्सर बदल जाती है।

  • ओजोन परत में बदलाव: चंद्रमा की छाया की सुपरसोनिक गति 'ग्रेविटी वेव्स' उत्पन्न करती है, जो समताप मंडल (Stratosphere) में ओजोन की सांद्रता को अस्थायी रूप से कम कर सकती हैं।

समुद्री जल की गतिशीलता पर प्रभाव

समुद्र की ऊपरी परत सूर्य के प्रकाश और गर्मी पर अत्यधिक निर्भर होती है। सूर्य ग्रहण इस प्राकृतिक चक्र को बाधित करता है:

  • सतही ऊष्मन: सामान्य दिनों में सूर्य की किरणें समुद्र की ऊपरी सतह को गर्म करती हैं, जिससे तापीय स्तरीकरण बना रहता है। ग्रहण के दौरान यह प्रक्रिया रुक जाती है।

  • प्रकाश संश्लेषण में ठहराव: फाइटोप्लांकटन प्रकाश संश्लेषण के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं। ग्रहण के दौरान प्रकाश की तीव्रता में अचानक कमी (जैसे 10,000 लक्स की गिरावट) इस जैविक प्रक्रिया को धीमा कर देती है।

पुदुचेरी के कराईकल तट पर अध्ययन के निष्कर्ष

अव्वैयार सरकारी महिला महाविद्यालय, पुडुचेरी में भौतिक विभाग के डॉ. सुकुमारन संतोष कुमार और अरिग्नार अन्ना सरकारी कला महाविद्यालय, पुडुचेरी के भौतिक विभाग के डॉ. रेथिनसामी रेंगैयन द्वारा 2009 में किए गए एक अध्‍ययन के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान न केवल ऊंची-ऊंची लहरें उठती हैं बल्कि समुद्री जल का pH मान काफी कम हो जाता है, जिससे पानी अधिक अम्लीय हो जाता है।

कराईकल तट पर किए गए अध्‍ययन के दौरान डॉ. संतोष और डॉ.  रेंगैयन ने एक अंशांकित पीएच मीटर और उच्च-रिजोल्यूशन टेलीस्कोप का उपयोग करके समुद्री जल के नमूनों का परीक्षण किया। प्रयोग तीन चरणों में किया गया। पहला चरण - ग्रहण के दौरान, दूसरा सामान्य दिनों में, और तीसरा चरण बिना जोखिम वाली परिस्थितियों में।

अध्‍ययन में निम्न निष्‍कर्ष प्राप्त हुए -

  1. pH मान में गिरावट: पहली बार यह देखा गया कि सूर्य ग्रहण के दौरान समुद्री जल का pH मान काफी कम हो जाता है, जिससे पानी अधिक अम्लीय (Acidic) हो जाता है।

  2. सांख्यिकीय परिवर्तन: सामान्य जल और समुद्री जल के अंतर में पूर्ण ग्रहण के दौरान 20% और वलयाकार ग्रहण के दौरान 40% की कमी देखी गई।

  3. गामा विकिरण का प्रभाव: ओजोन परत में कमी के कारण छोटी तरंगदैर्ध्य वाली विकिरणें (विशेषकर गामा किरणें) पृथ्वी की सतह तक पहुंचती हैं, जो समुद्री जल में आयनों को अधिक सक्रिय कर देती हैं, जिससे pH मान गिर जाता है।

  4. रिकवरी: ग्रहण समाप्त होने के लगभग एक घंटे बाद समुद्री जल अपनी सामान्य अवस्था (pH मान) में वापस आने लगा।

क्या आप जानते हैं? 
सूर्य ग्रहण के दौरान समुद्री जल का pH मान घटने का मतलब है कि उसकी लवणता (Salinity) में अस्थायी बदलाव आता है। 2010 का वलयाकार ग्रहण सहस्राब्दी का सबसे लंबा ग्रहण था, जो भारत के रामेश्वरम से होकर गुजरा था। ग्रहण के दौरान हवा की दिशा में बदलाव दबाव में बदलाव के कारण होता है, जिससे लहरें तेज़ हो जाती हैं।

समुद्री जीवों पर सूर्य ग्रहण का प्रभाव

अध्‍ययन के अनुसार समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र इस अल्पकालिक परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होता है। सूर्य ग्रहण के दौरान निम्न गतिविधियां होती हैं:

  • व्यवहार में बदलाव: लवणता और pH में बदलाव के कारण समुद्री जीव (जैसे मछलियाँ और प्लवक) गहराई की ओर चले जाते हैं।

  • मछलियों की प्रतिक्रिया: मछलियाँ अक्सर इस अंधेरे को सूर्यास्त समझ लेती हैं और आश्रय की तलाश में सुस्त हो जाती हैं।

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