2026 के केंद्री बजट में पानी और पर्यावरण क्षेत्र को काफ़ी कुछ मिला, पर कुछ उम्‍मीदें अधूरी भी रह गईं। 

2026 के केंद्री बजट में पानी और पर्यावरण क्षेत्र को काफ़ी कुछ मिला, पर कुछ उम्‍मीदें अधूरी भी रह गईं। 

स्रोत : इंडिया वाटर पोर्टल

बजट 2026 : ‘ग्रीन ग्रोथ’ को बढ़ावा, ‘ब्लू इकोनॉमी’ को रफ्तार देने की कोशिश

कार्बन कैप्चर, 20 नए आंतरिक जलमार्गों के विकास की घोषणा से सरकार ने दिया पानी और पर्यावरण को संरक्षण का संकेत, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग के लिए कोई ऐलान न होने से मायूसी
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आर्थिक विकास में पानी और पर्यावरण को संरक्षण देने को लेकर वैश्विक स्‍तर पर बढ़ते ज़ोर के बीच 2026 के बजट में इन दोनों ही क्षेत्रों को लेकर की जाने वाली घोषणाओं का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा था। हालांकि बजट में इसे लेकर कोई बहुत बड़ी या धमाकेदार घोषणा तो नहीं की गई है, पर आर्थिक विकास में ‘ग्रीन ग्रोथ’ को बढ़ावा और ‘ब्लू इकोनॉमी’ को रफ्तार देने के स्‍पष्‍ट संकेत वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजटीय भाषण में मिले हैं। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत का यूनियन बजट 2026-27 पर्यावरण और जल संसाधनों के मोर्चे पर सिर्फ वादों और लुभावनी घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय ’ग्रीन ग्रोथ’ और ‘ब्लू इकोनॉमी’ को आर्थिक ढांचे से इंटीग्रेट करने का नज़रिया रखता है। आइए, पानी और पर्यावरण जसे क्षेत्रों से जुड़ी बजट की प्रमुख घोषणाओं और उनके संभावित प्रभावों पर इनसे जुड़े बजटीय आंकड़ों के साथ एक नज़र डालते हैं। 

कार्बन कैप्चर और उपयोग (CCU) परियोजना के लिए ₹20,000 करोड़ 

इस बजट में पर्यावरण क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा निवेश आया है Carbon Capture, Utilisation and Storage (CCUS) तकनीक को बढ़ावा देने के रूप में। इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका लक्ष्य भारी-उद्योग (जैसे स्टील, सीमेंट आदि) से निकलने वाले CO₂ उत्सर्जन को कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करना है। इससे हरित विकास यानी Green Growth को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट पेश करते CCUS सेवाओं के लिए ₹20,000 करोड़ की राशि अगले पांच वर्षों में सरकार की ओर से खर्च किए जाने की घोषणा की। इससे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों जैसे स्टील और सीमेंट में कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित कर वायु प्रदूषण, ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन और ग्‍लोबल वॉर्मिंग पर लगाम कसी जा सकेगी क्‍योंकि भारत में कार्बन उत्सर्जन का करीब 30% हिस्सा बिजली उत्पादन से और 25% हिस्सा स्टील व सीमेंट उद्योग से आता है। देश और अर्थव्‍यवस्‍था के लिए बेहद ज़रूरी इन सेक्टर्स को अचानक बंद करना संभव नहीं। ऐसे में CCU टेक्नोलॉजी वह रास्ता है, जिससे उद्योग चलते भी रहेंगे और पर्यावरणीय नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। 

बजट में उठाया गया यह कदम 2070 तक भारत के NET-ZERO Emission के लक्ष्‍य को प्रापत करने नीति को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन में 45% की कटौती और 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सिर्फ नियम-कानून नहीं, बल्कि भारी वित्तीय निवेश जरूरी है और यही इस बजट में दिखाई देता है। बजट में की गई पहल विशेष रूप से उन उद्योगों में पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करेगी, जो आज भारत के औद्योगिक उत्सर्जन का बड़ा हिस्सा पैदा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि CCUS को अपनाने से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि इससे ग्रीन टेक्नोलॉजी में भी निवेश बढ़ेगा साथ ही बड़ी संख्‍या में Green Jobs यानी हरित रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।  संक्षेप में इन चीज़ों को  बिंदुवार तरीके से कुछ इस प्रकार समझा जा सकता है- 

  • स्टील, सीमेंट, पावर प्लांट जैसे भारी उद्योग कम प्रदूषण करेंगे

  • भारत के Climate Commitments (Net Zero 2070) की दिशा में ठोस कदम

  • ग्रीन जॉब्स और नई टेक्नोलॉजी आधारित इंडस्ट्री खड़ी होगी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ग्रीन इकोनॉमी की साख बढ़ेगी

<div class="paragraphs"><p>बजट में 20 नए अंतरर्देशीय जलमार्गों के विकास की घोषणा से देश में 'ब्‍लू इकोनॉमी' को मज़बूती मिलने के साथ ही 'ग्रीन जॉब्‍स' में बढ़ोतरी की भी उम्‍मीद है।&nbsp;</p></div>

बजट में 20 नए अंतरर्देशीय जलमार्गों के विकास की घोषणा से देश में 'ब्‍लू इकोनॉमी' को मज़बूती मिलने के साथ ही 'ग्रीन जॉब्‍स' में बढ़ोतरी की भी उम्‍मीद है। 

स्रोत : पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय 

20 नए आंतरिक जलमार्गों से Blue Economy को मिलेगा Boom

बजट की एक और महत्त्वपूर्ण घोषणा अगले पांच वर्षों में देश में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways) को चालू करने का लक्ष्य रखा जाना है। इसके ज़रिये आंतरिक जल परिवहन (inland waterways) को मजबूत किया जाएगा। इससे जहां पारंपरिक सड़क-रेल मार्गों पर दबाव कम होगा, वहीं माल की ढुलाई की लागत भी कमी आएगी। मिसाल के तौर पर ट्रकों के ज़रिये 1 टन माल को सड़क से 1 किलोमीटर ढोने में ₹2.5–3.0 का खर्च आता है। रेल से ढुलाई होने पर यही खर्च ₹1.5–2.0 तक का होता है, जबकि जलमार्ग से लॉजिस्टिक खर्च घटकर ₹1 प्रति किलोमीटर से भी कम हो सकता है।  

इसके साथ ही माल ढुलाई के डीज़ल से चलने वाले ट्रकों पर निर्भरता कम होने से पर्यावरण का भी संरक्षण होगा। क्‍योंकि इससे जीवाष्‍म ईंधन की खपत घटेगी और प्रदूषण कम होगा। एक अनुमान के मुताबिक, अगर माल ढुलाई का सिर्फ 10% हिस्सा भी जलमार्गों पर शिफ्ट होता है, तोहर साल 50 लाख टन CO₂ उत्सर्जन कम हो सकता है। Logistics के लिए Road transport की जगह Water Transport से 60–70% कम कार्बन उत्‍सर्जन होगा। गौरतलब है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्‍पाद यानी GDP का करीब 14% है, जबकि विकसित देशों में यह 8–9% के आसपास है।

इसके अलावा 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास होने से छोटे जहाजों और नौकाओं के संचालन में बढ़ोतरी होने से लोगों को इनमें रोजगार मिलेगा। साथ ही नदी किनारे पोर्ट, गोदाम के विकास से वाटर सेक्‍टर में रोजगार में भारी बढ़ोतरी यानी बड़ी संख्‍या में Green Jobs पैदा होने की उम्‍मीद भी है। साथ ही आंतरिक जल मार्गों के विकास के लिए नदियों से गाद हटाने उन्‍हें चौड़ा किए जाने और अवैध बालू उत्‍खन रुकने की भी उम्‍मीद है। इससे गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, सिंधु और नर्मदा समेत देश की कई बड़ी नदियों की दशा में भी सुधार आने की संभावना है। जलमार्गों को लेकर सरकार की योजना में यह बातें भी शामिल हैं-

  • इनलैंड जलमार्गों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम को लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य जल परिवहन का हिस्सा 2047 तक 12% तक बढ़ाना है, जो आज अनुमानित रूप से 6% है।

  • इसके अलावा वाराणसी और पटना जैसे केंद्रों में शिप रीपेयर इकोसिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

कुल मिलाकर, विश्लेषकों के अनुसार इनलैंड वाटर वेज़ के विस्तार से भारत की ब्लू इकोनॉमी को व्यापक लाभ मिल सकता है, चाहे वह लॉजिस्टिक लागत हो, रोजगार हो या जल-आधारित आर्थिक गतिविधियों का विस्तार।

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बजट 2026-27: देश भर में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का होगा एकीकृत विकास
<div class="paragraphs"><p>2026 के केंद्री बजट में पानी और पर्यावरण क्षेत्र को काफ़ी कुछ मिला, पर कुछ उम्‍मीदें अधूरी भी रह गईं।&nbsp;</p></div>
<div class="paragraphs"><p>जलमार्ग से  माल ढुलाई को बढ़ावा दिए जाने से जहां लॉजिस्‍टक की लागत में कमी आएगी, वहीं  उत्‍सर्जन&nbsp;कम होने से पर्यावरण&nbsp;को भी संरक्षण मिलेगा और नदियों की हालत में भी सुधार की उम्‍मीद है।</p></div>

जलमार्ग से माल ढुलाई को बढ़ावा दिए जाने से जहां लॉजिस्‍टक की लागत में कमी आएगी, वहीं उत्‍सर्जन कम होने से पर्यावरण को भी संरक्षण मिलेगा और नदियों की हालत में भी सुधार की उम्‍मीद है।

स्रोत : विकी कॉमंस  

वाटर सेक्टर को बजट में क्या-क्‍या मिला

वाटर सेक्टर के लिए 2026-27 के वित्तीय वर्ष में कुल आवंटन: ₹72,820.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने से सिस्टम-स्तरीय आवंटन बहुत बड़ा तो नहींदिखता है, पर इससे  यह संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण और शहरी जल आपूर्ति तथा उसकी गुणवत्ता को ध्यान में रखकर ढांचागत खर्च यानी Infrastructure Expenditure को प्राथमिकता दी है। बजट में वाटर सेक्‍टर के लिए किए गए ₹72,820.18 करोड़ रुपये के कुल आवंट में से ₹66,770.47 करोड़ की राशि Jal Jeevan Mission / National Rural Drinking Water Programme जैसी पेयजल आपूर्ति योजनाओं के लिए रखी गई है। साथ ही JJM योजना की अवधि को बढ़ाकर 2028 तक कर दिया गया है। इसके अलावा ₹8,800 करोड़ DAPSC (Directly Attributed Programme Support Component) के लिए रखा गया है, जो मिशन से जुड़े प्रशासनिक व्‍यय व अन्‍य खर्चों को कवर करता है। यह आवंटन संकेत देता है कि हर घर तक सुरक्षित जल पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने ग्रामीण जल आपूर्ति का विस्तार और सततता दोनों पर सरकार ने निवेश जारी रखा है।

नोट : विभिन्‍न मदों में बजट राशि के आवंटन के आंकड़े पिछले वर्षों के बजटों के औसत खर्च और सरकार के नीतिगत दस्तावेजों के विवरणों पर आधारित हैं।

<div class="paragraphs"><p>बजट में 500 जलाशयों व अमृत सरोवरों की घोषणा से गांवों में तालाबों के सूखने से गहराते जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी।</p></div>

बजट में 500 जलाशयों व अमृत सरोवरों की घोषणा से गांवों में तालाबों के सूखने से गहराते जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

स्रोत : विकी कॉमंस

500 जलाशयों और अमृत सरोवरों से खेती, पशुपालन को मिलेगा सहारा

बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास की घोषणा की गई है। इससे जल संचय को बढ़ावा मिलेगा और देश में बढ़ते जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी। खासकर, ग्रामीण इलाकों में भूजल के स्‍तर में सुधार आने से किसानों को खेती के लिए पानी मिलना आसान होगा। इससे फसल उत्‍पादन में बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा। अमृत सरोवर स्‍कीम के तहत जलाशयों और तालाबों को बढ़ावा देने खेती की वर्षा पर निर्भरता घटेगी और पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए पर्याप्‍त पानी मिल सकेगा। इस तरह जलाशयों के विकास से ग्रामीण इलाकों में जल सुरक्षा बढ़ेगी। यह जलाशय सूखे की स्थिति से निपटने भी मददगार होंगे। साथ ही पानी की उपब्‍धता बढ़ने से लोगों, खासकर महिलाओं का जीवन आसान होगा। क्‍योंकि घर के लिए पानी का इंतज़ाम करने की जिम्‍मेदारी अकसर उनके कंधों पर ही होती है।

मत्‍स्‍य पालन और मछली निर्यात को बढ़ावा, मछुआरों को सौगात

बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास की घोषणा से मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारतीय जहाजों द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और खुले समुद्र में पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त करने की घोषणा मछुआरों के लिए एक बड़ी सौगात मानी जा रही है। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला (Fisheries Value Chain) को स्टार्टअप, महिला समूहों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) के ज़रिये बाजार से जोड़ा जाएगा।

इसके अलावा अब  समुद्र से पकड़ कर सीधे  विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई मछलियों को भी निर्यात माना जाएगा। इससे भारतीय समुद्री मछुआरों और फिशिंग कंपनियों समुद्र में पकड़ी गई मछलियों को पहले भारतीय तट पर उतारने और उसके बाद निर्यात करने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी, जैसा कि निर्यात सार्टिफिकेट के लिए अबतक करना पड़ता था। इससे उनकी ट्रांसपोर्टेशन लागत में कमी आएगी और सीधे तौर पर उनकी आय में इज़ाफा होगा।

<div class="paragraphs"><p>जलापूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए देश में ट्रीटमेंट प्‍लांट जैसे इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर और रीयल टाइम मॉनिटरिंग की व्‍यवस्‍था  को बढ़ावा देने की सख्‍त ज़रूरत है।</p></div>

जलापूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए देश में ट्रीटमेंट प्‍लांट जैसे इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर और रीयल टाइम मॉनिटरिंग की व्‍यवस्‍था को बढ़ावा देने की सख्‍त ज़रूरत है।

स्रोत : इंडिया वाटर पोर्टल

पानी की निगरानी के लिए PPP को बढ़ावा देने के संकेत

बजट में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी निगरानी व्यवस्था को लेकर सीधे वित्तीय घोषणा तो नहीं की गई, लेकिन अब नीति-स्तर पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी, जल सुरक्षा और साझेदारी को अगले चरण में प्रमुखता से देखा जा रहा है। बजट से संकेत मिलता है कि देश की जलापूर्ति व्‍यवस्‍था और समूचे वाटर सेक्‍टर में भारी-भरकम निवेश की ज़रूरत को देखते हुए अब सरकार का रुख अब  पानी की गुणवत्ता निरंतर ट्रैक करने और स्वच्छ जल सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को आगे बढ़ाने का है। इसके ज़रिये सिर्फ पानी की आपूर्ति तक सीमित न रहकर उसका “सुरक्षित और साफ पानी” सुनिश्चित किया जा सके। सरकार की ओर से अब पानी सुरक्षा को स्वास्थ्य-जल-जलवायु एजेंडा के साथ जोड़ कर आगे बढ़ाने का नज़रिया अपनाया जा रहा है, ताकि राज्यों, विभागों और निजी भागीदारों के बीच कोऑर्डिनेशन रीयल टाइम मॉनिटरिंग व डेटा एनालिसिस के जरिए, पानी की गुणवत्ता ट्रैकिंग और समस्याओं का त्‍वरित निवारण किया जा सके, जिससे कि दूषित पानी पीने से होने वाली बीमारियों और मौतों की घटनाओं पर सख्‍ती से लगाम लगाई जा सके।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ग्रीन बिल्डिंग से जुड़ी घोषणाएं नदारद

इस बजट में रेन वाटर हार्वेस्टिंग (rainwater harvesting) और ग्रीन बिल्डिंग (green buildings) के लिए कोई अलग-सी नई, केंद्रीय घोषणा या विशिष्ट राशि आवंटित नहीं की गई है। हालांकि, जल संसाधन और पर्यावरण के संरक्षण को मजबूती देने के लिए इन दोनों ही क्षेत्रों को मजबूत बजटीय समर्थन की ज़रूरत विशेषज्ञों की ओर से जताई गई थी, लेकिन बजट 2026 के दस्तावेजों में इसे लेकर अलग से कोई महत्‍वपूर्ण घोषणा नहीं किया जाने से मायूसी हुई है। इस कमी को देखते हुए विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले संसदीय सत्रों में इन विषयों पर अधिक स्पष्ट नीति दिशा की आवश्यकता होगी, खासकर शहरी इलाकों में जल संरक्षण और सस्‍टेनेबल और ग्रीन बिल्डिंग्‍स को लेकर।

<div class="paragraphs"><p>वाॅटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग जैसे पर्यावरणीय उपायों को बजट में और बढ़ावा दिए जाने की उम्‍मीद थी, जो फिलहाल पूरी नहीं हुई।&nbsp;</p></div>

वाॅटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग जैसे पर्यावरणीय उपायों को बजट में और बढ़ावा दिए जाने की उम्‍मीद थी, जो फिलहाल पूरी नहीं हुई। 

स्रोत : इंडिया वाटर पोर्टल 

क्‍या रहा बजट का कुल हिसाब-किताब

कुल मिला कर देखा जाए तो पानी और पर्यावरण के क्षेत्र के मामले में यह बजट बड़ी-बड़ी घोषणाओं और और रकमों के आवंटन से हटकर और महज़ एक पारंपरिक वित्तीय दस्तावेज से आगे निकलकर जल, पर्यावरण और आर्थिक विकास को जोड़ने वाली रणनीतियों के विकास की संभावनाओं से भरा हुआ है। बजट में Carbon Capture जैसी तकनीकों पर भारी निवेश ने यह संकेत दिया है कि सरकार पर्यावरण-स्मार्ट औद्योगिक वृद्धि को प्राथमिकता दे रही है। देश में 20 नए National Waterways के विकास से जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होने के साथ पर्यावरणीय लाभ मिलेगा साथ ही ब्लू इकोनॉमी को मज़बूती मिलेगी। पानी की गुणवत्ता की निगरानी जैसी चीजों के लिए PPP मॉडल के संकेत यह दिखाते हैं कि सरकार सिस्टम-लैवल जल प्रबंधन को तेज़ा और बेहतर बनाने की तैयारी में है। हालांकि, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग जैसे क्षेत्रों को बजट में सीधे तौर पर कोई भी वित्तीय प्रोत्साहन न मिलने से थोड़ी मायूसी हुई है, पर उम्‍मीद की जा रही है कि यह विषय आने वाले दिनों में संसदीय चर्चा और सरकार की आगामी वित्‍तीय घोषणाओं का हिस्सा बन सकता है।

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केंद्रीय बजट 2026 : जलापूर्ति का दायरा बढ़ाने के साथ ही जल-सुरक्षा को मज़बूत बनाने की भी सख्‍़त ज़रूरत
<div class="paragraphs"><p>2026 के केंद्री बजट में पानी और पर्यावरण क्षेत्र को काफ़ी कुछ मिला, पर कुछ उम्‍मीदें अधूरी भी रह गईं।&nbsp;</p></div>

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