फोटो - पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों पर काम शुरू, अगले 5 वर्षों में होंगे चालू, देखें पूरी सूची
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले पॉंच वर्षों में देश में 20 नए राष्ट्रीय जल मार्गों को विकसित कर उन्हें क्रियाशील करने का प्रस्ताव रखा था। इस कार्य की शुरुआत ओडिशा में एनडब्ल्यू-5 से हो चुकी है। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक केंद्रों को के बीच यातायात व्यवस्था को और सुगम बनाने का है।
बजट सत्र में 20 जलमार्गों का प्रस्ताव
1 फरवरी 2026 को लोक सभा में बजट प्रस्तुत करते समय केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि कार्गो की पर्यावरणीय रूप से सतत आवाजाही के उद्देशय को बढ़ावा देने के लिए बजट में पूरब में डानकुनी तथा पश्चिम में सूरत से कनेक्ट करने के लिए नए डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही यह बजट अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जल मार्गों (एनडब्ल्यू) को क्रियाशील बनाने का भी प्रस्ताव रखा है।
उन्होंने कहा कि यह कार्य ओडिशा में एनडब्ल्यू-5 से आरंभ होकर तलचर और अंगूल के खनिज अवयव समृद्ध क्षेत्रों तथा कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केन्द्रों से पारादीप और धमरा के बंदरगाहों को जोड़ेगा।
इससे अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग के हिस्से को 2047 तक 6 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक बढ़ाने की उम्मीद है। वित्त मंत्री ने कहा कि रेल और सड़क से एक मॉडल शिफ्ट को प्रोत्साहित करने के लिए एक तटीय कार्गो संवर्धन स्कीम लॉन्च की जाएगी।
जलमार्गों के विकास के लिए तैयार की जाएगी मैन पावर
जलमार्गों का उद्देश्य सस्ता, स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन बढ़ाना है। इन जल मार्गों को माल वाहक नौकाओं के यातायात के अनुकूल बनाने का कार वृहद स्तर पर किया जाएगा, जिसमें जल मार्गों का विकास उच्च स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए वित्त मंत्री ने मैन पावर को जरूरी प्रशिक्षण देने के लिए क्षेत्रीय केन्द्रों व प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की बात कही है। इन संस्थानों में जलमार्ग के पूरे क्षेत्र में नौकरियों के अनुकूल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे युवाओं को लाभ मिलेगा।
इसके अलावा बजट में अंतर्देशीय जलमार्गों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए वाराणसी एवं पटना में एक जहाज मरम्मत इकोसिस्टम की स्थापना करने का प्रस्ताव भी रखा है।
20 नए जलमार्गों की सूची जिन्हें क्रियाशील बनाने का कार्य शुरू हो चुका है
वर्तमान में देशभर में 111 अधिसूचित राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways) हैं। इनमें से 32 राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल और यात्री परिवहन का संचालन हो रहा है, जबकि अगले पाँच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को परिचालन में लाने का प्रस्ताव है। प्रस्तुत है नए जलमार्गों की सूची जिसका स्रोत पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय है।
भारत के राष्ट्रीय जलमार्गों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
वर्तमान में देश भर में कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्ग अधिसूचित किए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई 20163.05 किलोमीटर है
राष्ट्रीय जल मार्ग 01 देश का सबसे लंबा जल मार्ग है, जिसकी लंबाई 1620 किमी है। यह गंगा-भागिरथी-हुगली नदी प्रणाली पर है जो प्रयागराज से हलदिया तक जाता है।
राष्ट्रीय जलमार्ग-2 ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित है और यह पूर्वोत्तर भारत के लिए जीवनरेखा माना जाता है।
देश का सबसे छोटा राष्ट्रीय जलमार्ग 69 है जो मणिमुथारु नदी तमलनाडु पर है। इसकी कुल लंबाई मात्र 5 किमी है।
जलमार्ग परिवहन, सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 60–70% तक कम ईंधन खर्च करता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है।
राष्ट्रीय जलमार्ग-3 केरल के वेस्ट कोस्ट कैनाल पर स्थित है और यह देश का सबसे अधिक सक्रिय जलमार्ग माना जाता है।
एक बार्ज (नाव) में जितना माल ढोया जा सकता है, उतना माल ले जाने के लिए लगभग 50 ट्रकों की जरूरत पड़ती है।
राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास से पर्यटन, मत्स्य पालन और स्थानीय रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलता है।
जलमार्गों पर भारी माल जैसे कोयला, सीमेंट, अनाज और स्टील का परिवहन अधिक किफायती होता है।
भारत का जलमार्ग नेटवर्क न केवल नदियों, बल्कि नहरों, बैकवाटर और झीलों को भी शामिल करता है।
राष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों को सीधे बाजारों से जोड़ने में मदद मिलती है, जिससे क्षेत्रीय विकास तेज होता है।
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