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नर्मदा नदी के 32 नाम, उनके पर्यायवाची और प्रमुख संगम स्थल
म.प्र. की जीवन रेखा कहलाने वाली नर्मदा नदी प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भारत की सात सर्वाधिक पवित्र नदियों में से एक है। हिन्दुओं के छोटे-बडे सभी धार्मिक संस्कारों और देवी-देवताओं के पूजन में स्नान के लिए चढाए जाने वाले जल को अभिमंत्रित करने के लिए छः अन्य पवित्र नदियों के साथ नर्मदा का भी आव्हान किया जाता ह।
यद्यपि ऋग्वेद में नर्मदा का उल्लेख नहीं मिलता, परन्तु इस बारे में विद्वानों का मत है कि उत्तर भारत में आर्यों का जो पहला दल आया था वह सघन वनों के कारण सम्भवतः प्रायद्वीप में गंगा-सिन्धु के मैदान से आगे नहीं बढ सका था। अतः ऋग्वेद के रचयिता आर्यों ने नर्मदा देखी ही नहीं थी।
ऋग्वेद की बात छोड जी जाए तो अन्य अनेक प्राचीन ग्रंथों में नर्मदा का उल्लेख मिलता है। कई पुराणों में नर्मदा की उत्पत्ति और महिमा के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है जबकि प्रसिद्ध स्कंद पुराण का रेवा खण्ड तो पूरी तरह से नर्मदा की उत्पत्ति और महिमा के वर्णन को ही समर्पित है।
नर्मदा पुराण तो नर्मदा को लेकर अलग से रचा गया ग्रन्थ है। इसके अतिरिकत अनेक अन्य प्राचीन ग्रंथों में जिनमें वाल्मीकि रामायण और कालिदास का मेघदूत सम्मिलित है, नर्मदा का वर्णन आता है। यूनानी विद्वान टॉलमी ने इसे नोम्माडोस या नम्माडियस कहा है। नर्मदा को उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच की सीमा भी माना जाता है।
नर्मदा की उत्पत्ति के संबंध में अनेक किंवदंतियाँ हैं। कहीं इसे भगवान शिव के शरीर से बहे स्वेद (पसीने) से उत्पन्न मानते हुए शांकरी कहा गया है तो कहीं मैकल पर्वत से उत्पन्न होने के कारण ऋक्षपादप्रसूता या मैकलसुता भी कहा गया है।
चन्द्रमा से उत्पन्न होने की मान्यता के कारण कुछ लोगों ने इसे सोमोद्भवा का नाम भी दिया है। देवताओं को आह्लाद देने वाली होने के कारण इसे ’नर्म-ददाति इति नर्मदा‘ कहा गया है। स्कंदपुराण में ही अन्यत्र इसे सात कल्पों के क्षय होने पर भी नष्ट न होने वाली ’सप्तकल्पक्षयेक्षीणे न मृता तेन नर्मदा‘ (न मृता या न मरने वाली अतः नर्मदा) कहा गया है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि उत्पत्ति और गुणों के आधार पर इस महान नदी को समय-समय पर अनेक नामों से पुकारा गया। पन्द्रह नाम तो स्ंकद पुराण के रेवाखण्ड में ’नर्मदापंचदशनामवर्णन‘ में एक साथ मिलते है।
डा. अयोध्या प्रसाद द्विवेदी ने अपनी पुस्तक संस्कृति स्त्रोतस्विनी नर्मदा, 1987 तथा डा. के. शंकरन उन्नी 1996 ने भी नर्मदा के अनेक नामों की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला है। कुछ संशयात्मक या विरोधाभाषी नामों को छोड कर नर्मदा के जितने नाम ज्ञात हो सके है वे निम्नानुसार है -
नर्मदा नदी और संगम स्थल -
नर्मदा नदी और उनके संगम स्थल के नाम निम्न प्रकार है -
नर्मदा नदी के नाम की और संगम स्थल की उपर्युक्त तालिका गुजरात विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में वर्ष 2024 में प्रकाशित एक शोधपत्र से लिए गए है। यह शोध डॉ. मोहिनी प्रवीणभाई जोशी ने किया है।
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