अयोध्‍या में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरयू तट पर स्थित  ‘राम की पैड़ी’ की गहन सफाई करााकर इसको और भव्य बनाने की तैयारी राज्‍य सरकार कर रही है।

अयोध्‍या में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरयू तट पर स्थित ‘राम की पैड़ी’ की गहन सफाई करााकर इसको और भव्य बनाने की तैयारी राज्‍य सरकार कर रही है।

फोटो : विकी कॉमंस

अयोध्‍या में सरयू तट को और भव्य बनाने की तैयारी, यूपी सरकार करा रही ‘राम की पैड़ी’ की गहन सफाई

रख-रखाव कार्यों के चलते राम की पैड़ी में फिलहाल बंद हुआ स्नान, कुछ दिन तक श्रद्धालु नहीं लगा सकेंगे डुबकी
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  • राम की पौड़ी में 20 जून तक चलेगा सिल्ट सफाई का काम

  • पैड़ी में रोका गया सरयू नदी के जल का प्रवाह 

  • प्रतिदिन करीब 50 हजार श्रद्धालु आते हैं यहां

  • अब सरयू तट की ओर रुख कर रहे हैं स्नानार्थी

पिछले दो-ढाई वर्षों में पर्यटन के मामले में अयोध्‍या उत्‍तर प्रदेश में काफी तेजी से उभरा रहा है। यहां बने राम मंदिर को देखने के लिए बड़ी संख्‍या में अब देशभर से लोग यहां आ रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्र और राज्‍य सरकार यहां कई प्रकार की पर्यटन सुविधाएं विकसित करने और विशेष आयोजनों पर ज़ोर दे रही है। 

इसी के तहत बीते कुछ वर्षों से दीवाली पर्व पर अयोध्‍या स्थित राम की पैड़ी पर दीपोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हर साल दीये जलाने का विश्‍व रिकॉर्ड बन और टूट रहा है। दीपोत्‍सव के इस आयोजन स्‍थल को बेहतर बनाने की ओर कदम बढ़ाते हुए अब सरकार ने राम की पैड़ी की सफाई, जलकुंड से गाद हटाने और मरम्‍मत के अन्‍य कामों को शुरू किया है। इसके लिए राम की पैड़ी में सरयू नदी के पानी के प्रवाह को रोककर इसे 20 जून तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। 

सिल्‍ट निकालने और सफाई के लिए पैड़ी का सारा पानी निकाल कर इसे खाली कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से काफी ज़ोर-शोर से यहां सफाई कार्य कराया जा रहा है, ताकि 20 जून तक की निर्धारित अवधि के भीतर कार्य पूरा कर राम की पैड़ी को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोला जा सके।

पानी हटने के बाद राम की पैड़ी पर सामान्य दिनों की चहल-पहल की जगह सन्नाटा दिखाई दे रहा है। प्रतिदिन करीब 50 हजार श्रद्धालु यहां स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन अब सभी श्रद्धालु और स्नानार्थी सरयू तट की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में सरयू घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से वहां भी काफी भीड़ देखी जा रही है। 

राम मंदिर के बाद दूसरा प्रमुख आकर्षण है राम की पैड़ी

अयोध्या आने वाला शायद ही कोई श्रद्धालु या पर्यटक हो, जिसकी यात्रा राम की पैड़ी पहुंचे बिना पूरी होती हो। सरयू तट पर बनी यह भव्य घाट श्रृंखला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आधुनिक अयोध्या की पहचान भी बन चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार हर वर्ष दीपावली पर यहीं लाखों दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला भव्य दीपोत्सव आयोजित करती है। इस आयोजन की तस्वीरें दुनिया भर में अयोध्या की नई पहचान गढ़ चुकी हैं।

इसी बढ़ती लोकप्रियता के बीच इन दिनों राम की पैड़ी का बड़ा हिस्सा सफाई, मरम्मत और रखरखाव कार्यों के कारण आम लोगों के लिए बंद है। घाटों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है, मशीनें और कर्मचारी मरम्मत में जुटे हैं। नतीजा यह है कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को सरयू स्नान और घाटों के पूर्ण दर्शन से वंचित होना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर सुविधाओं और सुरक्षित घाटों के लिए जरूरी है।

राम की पैड़ी क्या है और इसका इतिहास क्या कहता है?

राम की पैड़ी सरयू नदी के तट पर स्थित घाटों और सीढ़ियों की एक विस्तृत श्रृंखला है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान राम और अयोध्या के लोगों का जीवन सरयू नदी से गहराई से जुड़ा था। वर्षों से श्रद्धालु यहां स्नान करते रहे हैं।

हालांकि वर्तमान स्वरूप में दिखाई देने वाली राम की पैड़ी अपेक्षाकृत आधुनिक निर्माण है। इसका विकास मुख्य रूप से 1980 के दशक में किया गया था, जब सरयू तट को एक भव्य धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनी। बाद के वर्षों में कई चरणों में इसका विस्तार और पुनर्विकास हुआ। राम मंदिर आंदोलन और फिर मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी, जिसके चलते राम की पैड़ी को भी नए स्वरूप में सजाया-संवारा गया।

आज यह केवल स्नान घाट नहीं, बल्कि अयोध्या का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है। सुबह की आरती, शाम की रोशनी, सरयू आरती और दीपोत्सव जैसे आयोजन इसे देश के प्रमुख धार्मिक नदी तटों में शामिल करते हैं।

<div class="paragraphs"><p>बीते कुछ वर्षों से दीवाली पर्व पर  राम की पैड़ी पर दीपोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हर साल दीये जलाने का विश्‍व रिकॉर्ड बन और टूट रहा है।</p></div>

बीते कुछ वर्षों से दीवाली पर्व पर राम की पैड़ी पर दीपोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हर साल दीये जलाने का विश्‍व रिकॉर्ड बन और टूट रहा है।

फोटो : विकी कॉमंस

दीपोत्सव से दुनिया भर में चमकी पहचान

पिछले कुछ वर्षों में राम की पैड़ी की पहचान सबसे अधिक दीपोत्सव से जुड़ी है। हर वर्ष दीपावली के अवसर पर यहां लाखों दीपक जलाए जाते हैं और कई बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए गए हैं। इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो दुनिया भर में प्रसारित होते हैं।

दीपोत्सव ने राम की पैड़ी को धार्मिक स्थल से आगे बढ़ाकर एक वैश्विक सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। इसका सीधा प्रभाव राम की पैड़ी पर भी दिखाई देता है, जहां सालभर भारी भीड़ बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते दबाव के कारण घाटों और संबंधित संरचनाओं का समय-समय पर रखरखाव आवश्यक हो जाता है।

क्यों शुरू हुआ सफाई और मेंटेनेंस का काम?

राम की पैड़ी पर हर दिन हजारों लोग स्नान करते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के उपयोग के कारण घाटों की सीढ़ियों, रेलिंग, जल निकासी व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और अन्य संरचनाओं पर दबाव पड़ना स्वाभाविक है।

इसके अलावा सरयू नदी अपने साथ गाद, काई और अन्य अवसाद भी लाती है। इससे सीढ़ियां फिसलन भरी हो जाती हैं। बरसात और जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कई स्थानों पर संरचनात्मक मरम्मत की भी आवश्यकता पड़ती रहती है।

यही कारण है कि प्रशासन ने व्यापक सफाई और मरम्मत अभियान शुरू किया है ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

मेंटेनेंस के तहत हो रहे क्या-क्या काम ?

सफाई अभियान केवल सामान्य झाड़ू-पोछे तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत कई तकनीकी और संरचनात्मक कार्य भी शामिल हैं।

घाटों की सीढ़ियों पर जमी काई और गाद हटाई जा रही है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की जा रही है। कुछ स्थानों पर पत्थरों और टाइलों को बदला जा रहा है। जल निकासी तंत्र की सफाई की जा रही है ताकि वर्षा के दौरान जलभराव की समस्या न हो।

इसके अलावा रेलिंग, सुरक्षा बैरियर और प्रकाश व्यवस्था की भी जांच की जा रही है। जहां जरूरत है, वहां मरम्मत या प्रतिस्थापन का काम किया जा रहा है। कई स्थानों पर पेंटिंग और सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है ताकि घाटों का स्वरूप आकर्षक बना रहे।

विशेष ध्यान उन हिस्सों पर दिया जा रहा है जहां दीपोत्सव और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान सबसे अधिक भीड़ जुटती है।

 क्या है पूरी योजना, कबतक चलेगा काम?

प्रशासन की योजना केवल मौजूदा मरम्मत तक सीमित नहीं है। उद्देश्य यह भी है कि आगामी त्योहारों, विशेषकर दीपोत्सव और बड़े धार्मिक आयोजनों से पहले पूरी व्यवस्था को बेहतर स्थिति में लाया जाए। घाटों के विभिन्न हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इससे पूरे परिसर को एक साथ बंद करने की आवश्यकता नहीं पड़े। हालांकि कुछ प्रमुख हिस्सों में सुरक्षा कारणों से आम लोगों की आवाजाही रोकनी पड़ी है।

काम पूरा होने के बाद घाटों को पहले से अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और आकर्षक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का दावा है कि इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव में सुधार होगा। वैसे तो सिल्‍ट सफाई का काम 20 जून तक पूरा कर राम की पैड़ी को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल देने की योजना है। पर, काम की गति को देखकर लग रहा है कि इसमें तय समय-सीमा से ज्‍़यादा वक्‍त लगने वाला है। इस महीने के अंत या उसके एकाध हफ्ते बाद तक यह काम चलता रहने के आसार नज़र आ रहे हैं। 

क्या पहले भी होती रही है ऐसी सफाई?

राम की पैड़ी पर नियमित सफाई तो प्रतिदिन होती है, लेकिन व्यापक स्तर की मरम्मत और रखरखाव समय-समय पर आवश्यकता के अनुसार किया जाता है। विशेष आयोजनों से पहले भी घाटों की विशेष सफाई कराई जाती रही है।

दीपोत्सव, रामनवमी और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के बाद भी कई बार घाटों की विशेष सफाई और मरम्मत की जाती है। हालांकि इसके लिए कोई निश्चित वार्षिक कैलेंडर सार्वजनिक रूप से निर्धारित नहीं है। आमतौर पर संरचनाओं की स्थिति, भीड़ का दबाव और मौसम को देखते हुए निर्णय लिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तेजी से अयोध्या में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए भविष्य में नियमित अंतराल पर बड़े मेंटेनेंस कार्यक्रमों की आवश्यकता पड़ सकती है।

बढ़ती भीड़ के साथ बढ़ रही रखरखाव की चुनौती

राम मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। शहर का बुनियादी ढांचा भी तेजी से विकसित हो रहा है।

इस बढ़ती भीड़ का दबाव राम की पैड़ी पर सबसे अधिक दिखाई देता है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल नए निर्माण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि समय पर रखरखाव न किया जाए तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं और पर्यटकों का अनुभव भी प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से अब अयोध्या के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए दीर्घकालिक रखरखाव मॉडल विकसित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

निष्कर्ष: थोड़ी असुविधा, लंबे समय का लाभ

सफाई और मरम्मत कार्य का सबसे प्रत्यक्ष असर पर्यटकों पर पड़ता दिख रहा है। पैड़ी बंद किए जाने की जानकारी न होने के कारण कई श्रद्धालु यहां स्नान के लिए पहुंचते हैं, लेकिन घाटों के कुछ हिस्सों में प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

दूर-दराज से आने वाले पर्यटक अक्सर राम मंदिर के साथ राम की पैड़ी को अपनी यात्रा का प्रमुख आकर्षण मानते हैं। ऐसे में बैरिकेडिंग और निर्माण कार्य देखकर उन्हें थोड़ी मायूसी होती है। हालांकि अधिकांश श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि यदि यह काम बेहतर सुविधाओं और सुरक्षा के लिए किया जा रहा है, तो कुछ दिनों की असुविधा स्वीकार की जा सकती है। क्‍योंकि, राम की पैड़ी आज केवल एक घाट नहीं, बल्कि नई अयोध्या की पहचान बन चुकी है। 

दीपोत्सव से लेकर सरयू आरती तक, यह स्थल हर वर्ष करोड़ों लोगों को आकर्षित करता है। ऐसे में इसकी सफाई, मरम्मत और संरक्षण केवल सौंदर्यीकरण का मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा और पर्यटन प्रबंधन का भी प्रश्न है। इसलिए लोगों का मानना है कि फिलहाल पर्यटकों को कुछ असुविधा जरूर हो रही है, लेकिन यदि इस सफाई अभियान के बाद आने वाले वर्षों में राम की पैड़ी और अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और आकर्षक रूप में सामने आएगी। अयोध्या की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह निवेश भविष्य की जरूरत भी है और शहर की नई पहचान को बनाए रखने की ओर एक ज़रूरी कदम भी है।

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