राजधानी नई दिल्‍ली में आयोजित हुआ ब्रिक्‍स के पर्यावरण मंत्रियों का 12वां सम्‍मेलन, जिसकी अध्‍यक्षता भारत ने की। सम्‍मेलन में पर्यावरण से जुड़े विषयों पर चार ज्ञान कोशों का विमोचन किया गया। 

राजधानी नई दिल्‍ली में आयोजित हुआ ब्रिक्‍स के पर्यावरण मंत्रियों का 12वां सम्‍मेलन, जिसकी अध्‍यक्षता भारत ने की। सम्‍मेलन में पर्यावरण से जुड़े विषयों पर चार ज्ञान कोशों का विमोचन किया गया। 

फोटो : दूरदर्शन

ब्रिक्‍स पर्यावरण मंत्रियों के 12वें सम्‍मेलन में पर्यावरण सहयोग पर सहमति बनाने की कोशिश

‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ की थीम पर आयोजित हुआ सम्‍मेलन
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नई दिल्ली के भारत मंडपम में 17-18 अगस्‍त को ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों के 12वें सम्‍मेलन में सदस्‍य देशों के बीच पर्यावरणीय मुद्दों पर आपसी सहमति बना कर सहयोग बढ़ाने की कोशिश की गई। इसके लिए सदस्य देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के बीच कई सत्रों में गहन विचार-विमर्श और चर्चाएं हुईं। सम्‍मेलन की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ यानी Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability को रखा गया। पर्यावरण सहयोग को मजबूत करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करने के उद्देश्‍य से आयोजित  इस सम्मेलन की अध्‍यक्षता भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। उन्‍होंने कहा कि सम्‍मेलन के अध्यक्ष के रूप में, भारत पर्यावरण को बचाने के लिए एक खुले, रचनात्मक और सर्वसम्मति-आधारित संवाद को आगे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्ध है।

बैठक में सतत विकास (Sustainable Development) को आज के दौर की प्राथमिकता मानते हुए इसके लिए नीति निर्माण, प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही इस समूची प्रक्रिया में जनभागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्‍यकता जताई। इस दिशा में भारत के उल्‍लेखनीय योगदान का जिक्र करते हुए पर्यावरण मंत्री ने बताया कि भारत ने 2005 से 2022 के बीच प्रदूषण उत्सर्जन में करीब 37% की कमी लाई है। ऐसा इसलिए संभव हो सका, क्‍योंकि भारत की कुल बिजली उत्‍पादन का 50% से अधिक हिस्सा अब स्वच्छ स्रोतों से प्राप्त होता है। 

केंद्रित और प्रभावी कार्रवाई पर जोर

बैठक में विकासशील देशों की वास्तविकताओं के अनुरूप ज़मीनी स्‍तर पर जन-केंद्रित पर्यावरणीय कार्रवाई की अपील की गई। एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य जारी कर ब्रिक्स देशों के बीच पर्यावरण संबंधी ज्ञान को साझा करने, तकनीकी सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण, और मजबूत संस्थागत साझेदारी के जरिये सामूहिक क्षमता विकसित करने की आवयकता जताई गई।  संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य में मुख्‍य रूप से यह चार बातें शामिल हैं:

  1. संवहनीय जीवनशैली (Sustainable lifestyle) से जुड़े ज्ञान को ब्रिक्‍स सदस्‍यों के बीच आपस में साझा करना (Knowledge sharing), अनुसंधान और नवाचार (Research and innovation) को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स संस्थानों का नेटवर्क स्थापित करना।

  2. मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संवहनीय भूमि प्रबंधन (sustainable land management) और पारिस्थितिकी तंत्र अनुकूलन के लिए एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए एक ब्रिक्स सिद्धांत (BRICS Doctrine) तैयार करना ।

  3. ब्रिक्स देशों में जंगलों में आग की घटनाओं से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया पर आम सहमति।

  4. पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित प्रयासों से जलवायु अनुकूलन के प्रयासों को बढ़ावा देना।

अबतक हुए ब्रिक्‍स पर्यावरण सम्‍मेलनों पर एक नज़र

चार पर्यावरणीय ज्ञान कोशों का अनावरण 

इस मौके पर ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह द्वारा तैयार किए गए चार ज्ञान कोशों (Knowledge Repository) का अनावरण भी किया। यह संकलन ब्रिक्स देशों में पर्यावरण संरक्षण के लिए रचनात्मक सुझाव और जानकारियां प्रदान करने के लिए तैयार  किए गए हैं। इनमें सदस्य देशों की पर्यावरणीय कार्यप्रणालियों, स्थानीय ज्ञान, नए उपायों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनुभवों को शामिल किया गया है। जारी किए गए चारों ज्ञान कोशों की विषय वस्‍तु इस प्रकार है -

1. टिकाऊ जीवनशैली पर ज्ञान संग्रह (Knowledge Repository on sustainable lifestyle) : इस संग्रह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और यूएई के उदाहरण शामिल हैं। इसमें टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत बदलाव, व्यवहार में परिवर्तन, पर्यावरण शिक्षा, सामुदायिक भागीदारी, टिकाऊ उपभोग (Sustainable Consumption), पुनर्चक्रण आधारित अर्थव्यवस्था (Recycling-based Economy), पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और स्वच्छ ऊर्जा (Clean energy) जैसे विषयों और उनसे जुड़े प्रयासों की जानकारी दी गई है। भारत की ओर से इसमें मिशन LiFE, पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम और संभव अभियान जैसे प्रयासों को शामिल किया गया है। यह संग्रह लोगों की भागीदारी और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए आपसी सीख, संयुक्त शोध और बहुपक्षीय सहयोग का आधार उपलब्ध कराता है।

2. जंगल की आग के प्रबंधन पर एकीकृत ज्ञान संग्रह (Knowledge Repository on Integrated Forest Fire Management) : जलवायु परिवर्तन, लंबे समय तक सूखा और बढ़ते तापमान के कारण जंगलों में आग की घटनाएं और उनकी तीव्रता बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान एकीकृत वनाग्नि प्रबंधन (Integrated forest fire management) को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख विषय के रूप में आगे बढ़ाया। इस संग्रह में आग की रोकथाम, स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, तकनीक, तैयारी और समन्वित कार्रवाई से जुड़े बेहतर उपायों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य जंगलों, जैव विविधता और लोगों की आजीविका की रक्षा के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

3. एकीकृत भू-दृश्य आधारित हरितीकरण पर ज्ञान संग्रह (Knowledge Repository on Integrated Landscape-based Greening) : इस संग्रह में भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, जैव विविधता में कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी आपस में जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के अनुभव और नीतिगत उपाय शामिल हैं। इसमें पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और जैव विविधता संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने वाले उपायों को रेखांकित किया गया है। साथ ही ज्ञान और अनुभव साझा करने, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग, संयुक्त शोध तथा निगरानी और आकलन के लिए साझा तरीकों को विकसित करने पर जोर दिया गया है।

4. संसाधनों के बेहतर उपयोग और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर ज्ञान संग्रह (Knowledge Repository on Extended Producer Responsibility and Circular Economy) : इस संग्रह में संसाधनों के बेहतर उपयोग और चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए ब्रिक्स देशों की नीतियां, नियम और संस्थागत व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसमें समुदाय आधारित कचरा प्रबंधन, डिजिटल कचरा विनिमय मंच, चक्रीय अर्थव्यवस्था की योजनाएं, डिजिटल निगरानी व्यवस्था, पुनर्चक्रण प्रमाणन और कचरा क्षेत्र में किए गए सुधारों को प्रस्तुत किया गया है। संग्रह में भारत द्वारा विकसित बाजार आधारित विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) व्यवस्था का भी उल्लेख है। इसमें केंद्रीकृत डिजिटल मंच और विभिन्न प्रकार के कचरे को इसके दायरे में शामिल करने की व्यवस्था प्रमुख है।

इन चारों ज्ञान संग्रहों के माध्यम से ब्रिक्स देश पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने, जैव विविधता की रक्षा, कचरा प्रबंधन और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा कर सकेंगे।

क्‍या है भारत का मिशन LiFE

Mission LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) भारत की पहल से शुरू हुआ एक वैश्विक पर्यावरण हितैषी जन-अभियान है, जिसका उद्देश्य लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जैसे पानी और ऊर्जा बचाना, कचरा कम करना, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचना और टिकाऊ भोजन अपनाना। इसका फुल फॉर्म LiFE – Lifestyle for Environment है। मिशन LiFE का मूल विचार है कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबला केवल सरकारों की नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से भी किया जा सकता है। इसका लक्ष्य लोगों को ‘Pro-Planet People’ यानी पृथ्वी के हित में जिम्मेदार व्यवहार करने वाले नागरिकों के रूप में प्रेरित करना है।  इस पहल की अवधारणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में ग्लासगो में आयोजित COP26 में वैश्विक स्तर पर सामने रखी थी। इसके बाद 20 अक्टूबर 2022 को गुजरात के केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की मौजूदगी में मिशन LiFE को औपचारिक रूप से लॉन्च किया।

2031-2035 के लिए भारत की जलवायु प्रतिबद्धता

सम्‍मेलन में अपने अध्‍यक्षीय संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2031-2035 के लिए भारत का नया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (एनडीसी) समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा के साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए, जिसमें समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन, जिम्मेदार नवाचार और विकास-केंद्रित संवहनीयता को बढ़ावा मिले। भारत सहित सभी ब्रिक्‍स देशों में पर्यावरणीय असुरक्षा अक्सर व्यापक विकास प्राथमिकताओं से जुड़ी है। उन्होंने जंगलों में आग की रोकथाम, तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी, प्रतिक्रिया और आग की घटनाओं के बाद पुनर्बहाली के क्षेत्र में ब्रिक्स सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया। साथ ही जलवायु वित्त, अनुकूलन और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के महत्व पर जोर दिया। भूपेंद्र यादव ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की चार प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। इनमें पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना, वनरोपण एवं वन अग्नि प्रबंधन और आपदा से निपटने की क्षमता, चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा अनुकूलन शामिल हैं। 

डिजिटल इंटरेक्टिव पवेलियन रहा आकर्षण का केंद्र

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने डिजिटल इंटरेक्टिव पवेलियन स्थापित किया। यह सम्‍मेलन में भाग लेने आए प्रतिभागियों के बीच खासतौर पर आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें इमर्सिव गेमिंग और इंटरैक्टिव तकनीकों के माध्यम से भारत की प्रमुख पर्यावरणीय पहलों को प्रदर्शित किया गया। पवेलियन ने संवहनीय जीवनशैली को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों का व्यापक अनुभव उपलब्ध कराया। दो दिवसीय बैठक के दौरान ब्रिक्स प्रतिनिधियों को भारतीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने का भी अवसर मिला, जिनमें भारतीय संस्कृति की विविधता और जीवंतता प्रदर्शित हुई।

<div class="paragraphs"><p>17-18 अग<del>स्‍त</del> को नई दिल्‍ली में आयोजित&nbsp;ब्रिक्‍स पर्यावरण मंत्रियों के 12वें सम्‍मेलन&nbsp;की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रही।&nbsp;</p></div>

17-18 अगस्‍त को नई दिल्‍ली में आयोजित ब्रिक्‍स पर्यावरण मंत्रियों के 12वें सम्‍मेलन की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रही। 

फोटो : पीआईबी

ब्रिक्स क्या है, कौन हैं इसके सदस्य

ब्रिक्स (BRICS) उभरती अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ के देशों का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग समूह है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका और आवाज को मजबूत करना है।

BRIC शब्द पहली बार 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल किया था। बाद में इन देशों ने सहयोग का औपचारिक ढांचा बनाया और 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद समूह का नाम BRICS हो गया और उसने 2011 के शिखर सम्मेलन में पहली बार हिस्सा लिया।

2026 में ब्रिक्स के 11 सदस्य देश हैं: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया। इनमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई 2024 में शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य बना

नोट : मूल BRIC में ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। दक्षिण अफ्रीका 2011 में जुड़ा। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE पूर्ण सदस्य बने। इंडोनेशिया जनवरी 2025 में पूर्ण सदस्य बना।

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<div class="paragraphs"><p>राजधानी नई दिल्‍ली में आयोजित हुआ&nbsp;ब्रिक्‍स के पर्यावरण मंत्रियों का 12वां सम्‍मेलन, जिसकी अध्‍यक्षता भारत ने की। सम्‍मेलन में पर्यावरण से जुड़े विषयों पर चार ज्ञान कोशों का विमोचन किया गया।&nbsp;</p></div>

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