दुनिया भर में हवा की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली स्विस फर्म IQAir की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश रहा।
स्रोत : यूनिसेफ
पाकिस्तान बना दुनिया का सबसे प्रदूषित देश, भारत 5वें पायदान पर : IQAir ने जारी की 2025 की रिपोर्ट
दुनिया भर में हवा की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली स्विस फर्म IQAir ने आज (24 मार्च) अपनी वार्षिक रिपोर्ट की है। रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण के मामले में 2025 में भारत पांचवें स्थान पर रहा। इसका मतलब है कि भारत की रैंकिंग में दो स्थान का सुधार हुआ है, क्योंकि 2024 में भारत तीसरे स्थान पर था। वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को 2025 में दुनिया का सबसे अधिक प्रदूषण वाला देश घोषित किया गया है। पाकिस्तान की हवा में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माने जाने वाले PM 2.5 खतरनाक छोटे कणों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक स्तर से 13 गुना अधिक दर्ज़ की गई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्विस वायु गुणवत्ता निगरानी फर्म IQAir ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि पिछले वर्ष 13 देशों और क्षेत्रों ने औसत पीएम-2.5 स्तर को WHO के 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम के मानक पर बनाए रखा। इससे पिछले साल यानी 2024 में ऐसे देशों की संख्या केवल सात रही थी। आइए, डालते हैं IQAir की 2025 की रिपोर्ट की कुछ खास बातों पर एक नज़र -
रिपोर्ट के मुताबिक निगरानी में रखे गए दुनिया के कुल 143 देशों और क्षेत्रों में से 130 देश WHO के दिशा-निर्देशों व मानकों को पूरा करने में विफल रहे।
बांग्लादेश और ताजिकिस्तान सबसे प्रदूषित देशों की सूची में क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर थे। भारत की रैंकिंग में दो पायदानों का सुधार हुआ और वह 2024 में तीसरे पायदान से सरक कर 2025 में 5वें स्थान पर आ गया।
आंकड़ों के अनुसार, 2024 में सबसे अधिक प्रदूषण वाला देश चाड 2025 में चौथे स्थान पर रहा, लेकिन पिछले साल PM 2.5 सांद्रता में गिरावट संभवतः आंकड़ों की कमी का परिणाम है।
IQAir रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका क्रिस्टी चेस्टर श्रोएडर ने कहा, "मार्च में आंकड़ों के गुम होने से ऐसा प्रतीत हुआ कि (चाड में) PM 2.5 के स्तर में काफी गिरावट आई है, लेकिन सच्चाई यह है कि हम नहीं जानते।"
पिछले साल मार्च में अमेरिका ने बजट की कमी का हवाला देते हुए एक वैश्विक निगरानी कार्यक्रम को बंद कर दिया था, जो उसके दूतावास और वाणिज्य दूतावास भवनों से एकत्र किए गए प्रदूषण डेटा को संकलित करता था।
अमेरिका के इस फैसले से कई वायु प्रदूषण ग्रस्त देशों के लिए प्राथमिक डेटा का स्रोत समाप्त हो गया और सूचनाओं की कमी के कारण बुरुंडी, तुर्कमेनिस्तान और टोगो को 2025 की रिपोर्ट से बाहर कर दिया गया।
भारत का लोनी शहर 2025 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बना, जहां PM 2.5 का औसत स्तर 112.5 माइक्रोग्राम दर्ज़ किया गया। इसके बाद उत्तर पश्चिमी चीनी क्षेत्र शिनजियांग का होटान शहर 109.6 माइक्रोग्राम के साथ दूसरे स्थान पर होगा।
विश्व के शीर्ष 25 सबसे प्रदूषित शहर भारत, पाकिस्तान और चीन में स्थित हैं।
विश्व के केवल 14% शहर ही 2025 में WHO के मानक को पूरा कर पाए, जो एक साल पहले के 17% से कम है, कनाडा में लगी जंगल की आग के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप तक PM 2.5 का स्तर बढ़ गया है।
2025 में इस मानक को पूरा करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, आइसलैंड, एस्टोनिया और पनामा शामिल थे।
लाओस, कंबोडिया और इंडोनेशिया में पिछले वर्ष की तुलना में PM 2.5 के स्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण ला नीना के दौरान अधिक वर्षा और तेज हवाएं थीं। मंगोलिया में औसत सांद्रता में 31% की गिरावट आई और यह 17.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गई।
IQAir के अनुसार, कुल मिलाकर 75 देशों ने 2025 में पिछले वर्ष की तुलना में PM 2.5 के स्तर में कमी दर्ज की, जबकि 54 देशों में औसत सांद्रता में वृद्धि दर्ज की गई।
दुनिया की केवल 10–15% आबादी ही ऐसी हवा में सांस ले रही है जो WHO के 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम के सुरक्षित मानक के भीतर है।
भारत सहित दुनिया भर में वायु प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन से आता है।
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PM 2.5 क्या है और क्यों है सबसे खतरनाक?
PM 2.5 कण इतने छोटे होते हैं कि वे सीधे फेफड़ों के गहरे हिस्सों में जाकर जमा हो सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर, दिल की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। World Health Organization के अनुसार सुरक्षित वार्षिक PM 2.5 स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर माना जाता है, जबकि दक्षिण एशिया के कई देशों में यह स्तर 40–60 माइक्रोग्राम या उससे भी अधिक है। यह स्थिति इन देशों में न केवल स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ा रही है, बल्कि उत्पादकता और आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर रही है।
पाकिस्तान क्यों बना सबसे प्रदूषित देश?
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में औसत PM 2.5 स्तर वैश्विक सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक दर्ज किया गया। रिपोर्ट बताती है कि लाहौर और कराची जैसे शहरों में कई दिनों तक AQI बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। इससे स्कूल बंद करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनियां जारी करने जैसी स्थिति पैदा हुई। इसके अलावा राजधानी इस्लामाबाद और बड़े शहरों में सर्दियों के दौरान स्मॉग एपिसोड ने स्थिति को और खराब किया, जिसके चलते पाकिस्तान दुनिया में सबसे ज़्यादा वायु प्रदूषण वाला देश बन गया। इसकी प्रमुख वजहें हैं इस प्रकार हैं -
तेजी से बढ़ता शहरीकरण
कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भरता
वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि
निर्माण गतिविधियां और धूल प्रदूषण
सीमित प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था
पाकिस्तान के लिए चुनौती यह भी है कि प्रदूषण का एक हिस्सा सीमा पार से भी आता है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत और बढ़ जाती है।
भारत में वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 16–17 लाख असमय मौतें होती हैं, जो देश की कुल मौतों का करीब 17–18% तक हिस्सा मानी जाती हैं। वहीं, इसके चलते भारत को हर साल जीडीपी का लगभग 5–8% तक आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
IQAir की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की रैंकिंग में हालांकि दो पायदानों का सुधार हुआ है, पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
स्रोत : विकी कॉमंस
भारत की रैंकिंग में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार
रिपोर्ट के अनुसार भारत 2025 में सबसे प्रदूषित देशों की सूची में 5वें स्थान पर रहा, जबकि 2024 में वह तीसरे स्थान पर था। यानी दो स्थान का सुधार दर्ज किया गया। यह सुधार कई वजहों से संभव हुआ -
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत निगरानी बढ़ना
कुछ शहरों में उत्सर्जन नियंत्रण उपाय
स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी
मौसमी परिस्थितियों का अस्थायी योगदान
हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि भारत के कई शहर अभी भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। भारत का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन कर उभरा है और खुद राजधानी नई दिल्ली, गाजि़याबाद व कानपुर जैसे बड़े शहरों में PM 2.5 स्तर सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक पाया गया। इससे साफ है कि रैंकिंग में सुधार के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रदूषण संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।
वाहनों का उत्सर्जन भी हाल के दशकों में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बन गया है।
स्रोत : विकी कॉमंस
क्या है समाधान?
भारत में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए डेटा आधारित नीति, पारदर्शी मॉनिटरिंग और क्षेत्रीय सहयोग जरूरी है। देशभर में कुछ प्रमुख उपायों को करके इसे नियंत्रण में लाया जा सकता है-
पावर प्लांट से हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना।
वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत करना।
औद्योगिक उत्सर्जन मानकों को सख्ती से लागू करके औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम कसना।
प्रदूषण नियंत्रण की गतिविधियों में में देश के आम नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा देना।
देश के प्रमुख महानगरों व 10 लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहरों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन बिल्डिंग, अर्बन ग्रीन स्पेस को बढ़ावा देना और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू करना।
इसके साथ-साथ लो-कॉस्ट एयर क्वालिटी सेंसर, सैटेलाइट डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पूर्वानुमान प्रणाली भविष्य में प्रदूषण प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
दक्षिण एशिया क्यों बना वायु प्रदूषण का हॉटस्पॉट?
रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों और शहरों में दक्षिण एशिया के इलाके में हालात सबसे ज़्यादा खराब हैं। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं -
ऊर्जा के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता
तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार
कमजोर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था
फसल अवशेष जलाना और औद्योगिक उत्सर्जन
वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं। जीवाश्म ईंधन जलाने से जहां ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं, वहीं वही प्रक्रिया पीएम2.5 और अन्य प्रदूषक भी पैदा करती है। इससे हीट वेव, सूखा और जंगल की आग जैसी घटनाएं बढ़ती हैं, जो आगे चलकर वायु गुणवत्ता को और खराब करती हैं। इस दुष्चक्र को तोड़ने के लिए ऊर्जा संक्रमण, हरित परिवहन और टिकाऊ शहरी विकास बेहद जरूरी बताए गए हैं।
बांग्लादेश भी लंबे समय से शीर्ष प्रदूषित देशों में शामिल रहा है, जबकि चीन ने पिछले एक दशक में कड़े कदमों से अपने प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय कमी की है। यह तुलना दिखाती है कि सही नीति और तकनीकी निवेश से सुधार संभव है।
निष्कर्ष : डरें नहीं, सुधार की ओर कदम बढ़ाएं
IQAir की 2025 रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि हमारे देश भारत सहित सारी दुनिया अभी भी वायु प्रदूषण से लड़ाई में पीछे है। पाकिस्तान का सबसे प्रदूषित देश बनना और भारत की रैंकिंग में मामूली सुधार ही हो पाना दोनों ही दक्षिण एशिया के लिए चेतावनी हैं। हालांकि, पड़ोसी देश चीन और कुछ अन्य देशों के उदाहरण बताते हैं कि सही नीति, तकनीकी निवेश और जनभागीदारी से सुधार संभव है। कुल मिलाकर, अगर मौजूदा हालात से निराश हुए और डरे बिना निर्णायक कदम उठाए जाएं तो आने वाले वर्षों में न केवल हवा साफ हो सकती है, बल्कि स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और जलवायु के मोर्चे पर हालात बेहतर हो सकते हैं।
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