नागालैंड की प्रमुख नदियों की सूची - दोयांग, दिखू, धनसिरी, तिजू, मिलाक…

दोयांग जलाशय, वोखा, नागालैंड

दोयांग जलाशय, वोखा, नागालैंड

फोटो: मुरारी भालेकर | CC BY-SA 4.0 | विकिमीडिया कॉमन्स

Published on: 
8 min read
Summary
  • नागालैंड की नदियां मुख्य रूप से दो दिशाओं में बहती हैं। पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की नदियां ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली से जुड़ती हैं, जबकि पूर्वी हिस्से की नदियां म्यांमार की चिंदविन नदी प्रणाली की ओर जाती हैं।

  • दोयांग, दिखू, धनसिरी, तिजू, मिलाक, जुंगकी, लिखिमरो और लान्ये नागालैंड की प्रमुख नदियों में शामिल हैं।

  • दोयांग नागालैंड की प्रमुख नदियों में है। यह राज्य के पश्चिमी हिस्से की महत्वपूर्ण नदी प्रणाली का हिस्सा है।

  • मिट्टी का कटाव, गाद, शहरी प्रदूषण, नदी तट का कटाव और पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों में बदलाव राज्य के नदी प्रबंधन की प्रमुख चुनौतियां हैं।

नागालैंड का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी है। यहां की पहाड़ियों, घाटियों और जंगलों से अनेक छोटी-बड़ी नदियां और जलधाराएं निकलती हैं। ये नदियां खेती, स्थानीय सिंचाई, पेयजल, मत्स्य संसाधन और जलविद्युत के लिए महत्वपूर्ण हैं।

नागालैंड की नदियां दो अलग दिशाओं में बहती हैं और दो बड़ी नदी प्रणालियों से जुड़ती हैं। पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी नागालैंड की धनसिरी, दोयांग, दिखू और मिलाक जैसी नदियां असम की ओर बहती हैं। आगे ये ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली से जुड़ती हैं। दूसरी ओर तिजू और उससे जुड़ी जुंगकी, लिखिमरो और लान्ये जैसी नदियां पूर्व की ओर बहती हुई म्यांमार की चिंदविन नदी प्रणाली से जुड़ती हैं। नागालैंड की राज्य वन एवं पर्यावरण नीति में भी नदियों को इन्हीं दो बड़े बहाव समूहों में रखा गया है।

नागालैंड का क्षेत्रफल लगभग 16,579 वर्ग किलोमीटर है। राज्य का ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी है। इसलिए कई नदियां तेज ढलानों से होकर बहती हैं और बरसात में उनका प्रवाह तेजी से बढ़ सकता है। नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन योजना भी धनसिरी, दोयांग, दिखू, तिजू और मिलाक को राज्य की मुख्य नदियों में गिनती है।

नागालैंड की नदी प्रणाली

नागालैंड की नदियों को उनके बहाव के आधार पर दो बड़े समूहों में रखा जा सकता है।

राज्य की वन एवं पर्यावरण नीति भी नागालैंड की नदियों को मुख्य रूप से ब्रह्मपुत्र और चिंदविन की ओर बहने वाली नदी प्रणालियों में रखती है।

नागालैंड की प्रमुख नदियों की सूची

नागालैंड में कई बारहमासी और मौसमी नदियां तथा पहाड़ी जलधाराएं हैं। अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों में प्रमुख नदियों की सूची थोड़ी अलग मिलती है। नीचे राज्य सरकार और नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्रोतों में दर्ज प्रमुख नदियों को एक साथ दिया गया है।

इन स्रोतों में सभी नदियों का वर्गीकरण एक जैसा नहीं है। कुछ नदियां एक स्रोत में प्रमुख नदी के रूप में दर्ज हैं, जबकि दूसरे स्रोत में उन्हें बड़ी नदी प्रणाली से जुड़ी नदी या सहायक नदी के रूप में रखा गया है। इसलिए इस सूची का उद्देश्य राज्य की प्रमुख नदी प्रणालियों से जुड़ी महत्वपूर्ण नदियों को एक साथ दिखाना है।

दोयांग: नागालैंड की प्रमुख नदी

दोयांग नागालैंड की प्रमुख नदियों में है। चुबी, न्जू, त्सुई, तुल्लो और तिशी इसकी प्रमुख सहायक नदियों में शामिल हैं। सरकारी नदी विवरण में गरिफेमा/घटाशी क्षेत्र से लिफी तक दोयांग की लंबाई लगभग 167 किलोमीटर बताई गई है। यह आंकड़ा नदी की पूरी लंबाई का नहीं, रिपोर्ट में दर्ज हिस्से का है।

दोयांग नदी पर वोखा जिले में दोयांग जलविद्युत परियोजना बनी है। इसकी स्थापित क्षमता 75 मेगावाट है और इसमें 25-25 मेगावाट की तीन इकाइयां हैं। यह परियोजना वर्ष 2000 में चालू हुई थी।

दोयांग जलाशय का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के साथ पर्यटन और जल क्रीड़ा की गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है।

दिखू: पहाड़ियों से ब्रह्मपुत्र की ओर

दिखू नदी का उद्गम जुन्हेबोटो जिले के नुरोतो पहाड़ी क्षेत्र में बताया गया है। नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार फुये/सुरुमी क्षेत्र से नागिनिमोरा तक दिखू की लंबाई लगभग 171 किलोमीटर बताई गई है। यह उत्तर की ओर बहती हुई मोकोकचुंग और तुएनसांग क्षेत्र के बीच कई जगह प्राकृतिक सीमा भी बनाती है। यह आंकड़ा भी रिपोर्ट में दर्ज नदी हिस्से का है, इसे दिखू की पूरी लंबाई नहीं समझा जाना चाहिए।

यांग्यु और नानुंग इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं। आगे यह असम के मैदान में पहुंचकर ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली में मिल जाती है।

धनसिरी: दीमापुर से जुड़ी प्रमुख नदी

धनसिरी नागालैंड के पश्चिमी हिस्से की महत्वपूर्ण नदी है। यह पेरेन और दीमापुर क्षेत्र से गुजरती हुई असम की ओर बहती है और आगे ब्रह्मपुत्र में मिलती है। द्जुरा और दिफू या चाथे इसकी प्रमुख सहायक नदियों में शामिल हैं।

दीमापुर से गुजरने के कारण धनसिरी पर शहरी सीवेज, ठोस कचरे और दूसरी मानवीय गतिविधियों का दबाव भी है। नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड धनसिरी और उसकी सहायक नदियों की जल गुणवत्ता की निगरानी करता है। बोर्ड के अनुसार दीमापुर का सीवेज, नालों का गंदा पानी, ठोस कचरा और कुछ छोटे उद्योगों का अपशिष्ट धनसिरी के प्रदूषण के प्रमुख कारणों में हैं।

तिजू: नागालैंड से म्यांमार की ओर

तिजू नागालैंड की दूसरी बड़ी नदियों से अलग दिशा में बहती है। राज्य की कई बड़ी नदियां पश्चिम की ओर ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली में जाती हैं, जबकि तिजू पूर्व की ओर म्यांमार की तरफ बहती है।

यह मध्य नागालैंड से निकलकर जुन्हेबोटो और फेक सहित पूर्वी क्षेत्रों से गुजरती है और आगे म्यांमार की चिंदविन नदी प्रणाली से जुड़ जाती है। जुंगकी, लान्ये और लिखिमरो इसकी प्रमुख सहायक नदियों में शामिल हैं। ये नदियां नागालैंड के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी इलाकों का पानी तिजू नदी प्रणाली तक पहुंचाती हैं।

तिजू-जुंगकी और राष्ट्रीय जलमार्ग

तिजू और जुंगकी के एक हिस्से को राष्ट्रीय जलमार्ग-101 के रूप में चिन्हित किया गया है। लोंगमात्रा से अवाखुंग तक इस नदी मार्ग पर नाव से माल और लोगों की आवाजाही की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है।

अक्टूबर 2024 में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और नागालैंड सरकार के अधिकारियों ने तिजू-जुंगकी जलमार्ग का संयुक्त निरीक्षण और हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण भी किया।

जुंगकी: तिजू की प्रमुख सहायक नदी

जुंगकी तिजू की सबसे बड़ी सहायक नदियों में है। इसका उद्गम पूर्वी नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्र में होता है। यह नोकलाक, शामातोर और किफिरे क्षेत्र से जुड़ी नदी व्यवस्था से होकर आगे तिजू नदी में मिलती है।

तिजू-जुंगकी नदी प्रणाली आगे म्यांमार की चिंदविन नदी से जुड़ती है। इस कारण इसका महत्व नागालैंड की सीमा से बाहर तक जाता है।

मिलाक: मोकोकचुंग क्षेत्र की प्रमुख नदी

मिलाक नागालैंड के मोकोकचुंग क्षेत्र की प्रमुख नदियों में है। यह पश्चिम की ओर बहने वाली उन नदियों में है जो आगे ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली से जुड़ती हैं। त्सुरोंग इसकी प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलाक की जल गुणवत्ता की निगरानी भी करता है।

नागालैंड की प्रमुख सहायक नदियां

नागालैंड में कई छोटी नदियां बड़ी नदियों और नदी प्रणालियों से जुड़ती हैं। सरकारी स्रोतों में सभी छोटी नदियों और सहायक नदियों की एक जैसी सूची नहीं मिलती। इसलिए यहां उन्हीं प्रमुख सहायक नदियों को रखा गया है जिनका उल्लेख आधिकारिक स्रोतों में साफ तौर पर मिलता है।

नागालैंड की नदियों का सामाजिक और आर्थिक महत्व

नागालैंड में नदियां और छोटी पहाड़ी जलधाराएं खेती, सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन और जलविद्युत से जुड़ी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में छोटी नदी घाटियों और जलधाराओं का उपयोग खेती और सिंचाई में होता है। कई गांव और कस्बे पानी की अपनी जरूरतों के लिए नदियों, झरनों और छोटी जलधाराओं पर निर्भर हैं।

दोयांग जैसी नदियों पर जलविद्युत परियोजनाएं बनी हैं, जबकि नदियां और जलाशय स्थानीय मत्स्य संसाधनों से भी जुड़े हैं।

राज्य के जल संसाधन विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 270 सतही लघु सिंचाई योजनाओं से 10 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र तक सिंचाई पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था।

नागालैंड की प्रमुख जल परियोजनाएं

नागालैंड सरकार के 2025 के बेसिक फैक्ट्स दस्तावेज में दोयांग के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम सहित दिखू और तिजू-जुंगकी पर कई संभावित जलविद्युत परियोजनाओं का उल्लेख है। तालिका में दी गई परियोजनाओं में दोयांग जलविद्युत परियोजना चालू है, जबकि कई दूसरी परियोजनाएं अभी सर्वेक्षण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) या शुरुआती योजना के स्तर पर हैं।

नागालैंड की नदियों के सामने प्रमुख चुनौतियां

मिट्टी का कटाव और गाद

नागालैंड का अधिकांश भूभाग पहाड़ी और तीखी ढलानों वाला है। भारी बारिश के समय मिट्टी तेजी से बहकर नदियों तक पहुंच सकती है। इस मिट्टी और मलबे का एक हिस्सा नदियों में जमा होता है। इससे नदी तल ऊंचा हो सकता है, पानी के बहने की जगह कम हो सकती है और किनारों पर कटाव की समस्या बढ़ सकती है।

इसी वजह से राज्य की वन एवं पर्यावरण नीति नदी के पूरे जलग्रहण क्षेत्र के प्रबंधन और नदी किनारों पर पेड़ लगाने पर जोर देती है।

नदी तट का कटाव

मानसून में तेज बहाव से नदी किनारों का कटाव बढ़ सकता है। नागालैंड जल संसाधन विभाग ने तिजू जैसी नदियों पर कटाव रोकने के काम भी किए हैं। उदाहरण के लिए जुन्हेबोटो जिले में तिजू नदी के किनारों को कटाव से बचाने की एक परियोजना पूरी की गई है।

शहरी सीवेज और ठोस कचरा

शहरी क्षेत्रों से गुजरने वाली नदियों और छोटी जलधाराओं पर सीवेज और ठोस कचरे का दबाव है। धनसिरी के लिए तैयार प्रदूषण नियंत्रण योजना में घरेलू सीवेज, नगरपालिका कचरे और नालों से आने वाले प्रदूषित पानी को महत्वपूर्ण समस्या माना गया है। चाथे, द्जूना, द्जूचा, द्जू और सानो जैसी कुछ जलधाराओं में भी ऐसे हिस्सों की पहचान की गई है जहां पानी की गुणवत्ता खराब थी।

जलग्रहण क्षेत्र में बदलाव

पहाड़ी नदियों की स्थिति उनके आसपास के जलग्रहण क्षेत्र पर भी निर्भर करती है। ऊपर के इलाकों में जंगल, खेती, सड़कें और जमीन के इस्तेमाल में बदलाव से यह तय होता है कि बारिश का कितना पानी, मिट्टी और मलबा नदी तक पहुंचेगा। इसलिए जंगलों की कटाई, सड़क निर्माण और पहाड़ी ढलानों में दूसरे बदलाव का असर नीचे की नदी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

नदी प्रबंधन की प्रमुख पहलें

नागालैंड में नदियों और जल स्रोतों के प्रबंधन के लिए जल गुणवत्ता की निगरानी, सिंचाई, कटाव रोकने, जल संरक्षण और नदी सुधार से जुड़े काम चल रहे हैं।

नागालैंड की जल संसाधन सूचना प्रणाली (Water Resources Information System) में राज्य के जल संसाधनों से जुड़ी जानकारी GIS आधारित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें बारिश, सतही जल, भूजल और पानी की गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों की निगरानी की व्यवस्था भी है।

राज्य के 2026-27 के बजट में Nagaland Strategic Water Resilience Initiative (NSWRI) के लिए 24 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पानी के भंडारण की व्यवस्था मजबूत करने का प्रस्ताव है। यह पहल किसी एक नदी तक सीमित नहीं है, लेकिन राज्य में पानी जमा करने और सूखे समय के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य में धनसिरी, चाथे, द्जू और मिलाक सहित विभिन्न नदी और जल स्रोतों की गुणवत्ता की निगरानी भी करता है।

बेहतर नदी प्रबंधन के लिए आगे क्या जरूरी है?

नागालैंड में नदियों के प्रबंधन के लिए उनके पूरे जलग्रहण क्षेत्र को देखना जरूरी है। पहाड़ियों, जंगलों, खेती, सड़कों और बस्तियों में होने वाले बदलाव का असर आखिरकार नीचे बहने वाली नदियों तक पहुंचता है।

ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में मिट्टी का कटाव कम करना जरूरी है। नदी किनारों की प्राकृतिक वनस्पति को भी बचाना होगा। सड़क और दूसरे निर्माण कार्यों का मलबा नदियों में न पहुंचे, इसकी व्यवस्था भी जरूरी है।

शहरी क्षेत्रों में चुनौती अलग है। यहां सीवेज और ठोस कचरे को नदी और छोटी जलधाराओं तक पहुंचने से पहले रोकने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

नागालैंड की नदियों का बहाव राज्य की सीमा पर खत्म नहीं होता। पश्चिम की कई नदियां असम होते हुए ब्रह्मपुत्र प्रणाली से जुड़ती हैं, जबकि तिजू-जुंगकी जैसी नदियां म्यांमार की चिंदविन नदी प्रणाली तक जाती हैं। इसलिए नदी प्रबंधन की योजना बनाते समय केवल किसी एक जिले या नदी खंड को नहीं, बल्कि उसके पूरे जलग्रहण क्षेत्र और नीचे की ओर बहने वाले हिस्सों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

प्रमुख प्रामाणिक स्रोत

नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड – नागालैंड की नदियां
नागालैंड सरकार – राज्य की वन एवं पर्यावरण नीति: मीठे पानी के संसाधन और नदी प्रणालियां
नागालैंड सरकार – राज्य आपदा प्रबंधन योजना
नागालैंड जल संसाधन विभाग – नागालैंड जल संसाधन सूचना प्रणाली
नागालैंड जल संसाधन विभाग – प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: हर खेत को पानी और नदी तट संरक्षण परियोजनाएं
नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड – राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम
नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड – नदी पुनर्जीवन कार्ययोजनाएं
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण – तिजू-जुंगकी राष्ट्रीय जलमार्ग-101
नागालैंड राज्य परिवहन विभाग – अंतर्देशीय जल परिवहन
नागालैंड सरकार – नागालैंड के आधारभूत तथ्य, 2025
नागालैंड सरकार – राज्य बजट 2026-27
पूर्वोत्तर विद्युत शक्ति निगम (नीपको) – दोयांग जलविद्युत परियोजना

Also Read
केरलम की प्रमुख नदियों की सूची - नदी बेसिन, जल संसाधन और प्रबंधन की चुनौतियां
<div class="paragraphs"><p>दोयांग जलाशय, वोखा, नागालैंड</p></div>

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

India Water Portal - Hindi
hindi.indiawaterportal.org