IMD की चेतावनी में किस चिन्ह का क्या मतलब है? जानिए आसान भाषा में
भीषण गर्मी हो या बारिश का मौसम, जब-जब मौसम करवट लेता है तब-तब लोग अकसर बाहर निकलने से पहले अपने मोबाइल से मौसम का हाल पूछते हैं। मौसम से जुड़े ऐप कई बार विस्तार से बताने के बजाए केवल चिन्हों के माध्यम से मौसम का हाल बता देते हैं। चिन्ह जैसे - बादल के नीचे बूंदें, धुंधले बादल, चक्री, आदि। कई बार ऐसे चिन्ह सामने आ जाते हैं, जिन्हें देख लोग कंफ्यूज़ हो जाते हैं। फिर विस्तार से पढ़ने में उनका समय जाता है।
आप कंफ्यूज़ नहीं हों और आपका समय बच सके इसलिए हम आपको यहां मौसम विभाग की चेतावनियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले चिन्हों को आसान भाषा में बताने जा रहे हैं।
मौसम की चेतावनियों को क्यों जानना है जरूरी?
बदलते मौसम के साथ हमारे आसपास की परिस्थितियां भी तेजी से बदलती हैं। कभी चिलचिलाती धूप 'लू' का रूप ले लेती है, तो कभी आसमान से गिरती बिजली और भारी बारिश जनजीवन अस्त-व्यस्त कर देती है। अक्सर हम समाचारों में 'येलो अलर्ट' या 'सीवियर हीट वेव' जैसे शब्द सुनते हैं, लेकिन इनके वास्तविक मतलब नहीं मालूम होने पर लोग बाहर निकल पड़ते हैं और बाद में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के तकनीकी शब्दों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि आप हर मौसम के लिए पहले से तैयार रह सकें।
मौसम विभाग द्वारा उपयोग किए जाने वाले विभिन्न शब्दों का वर्गीकरण और उनका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
1. गर्मी के मौसम में मौसम विभाग की चेतावनियां
जब पारा सीमा लांघ जाए तब क्या है लू (Heatwave) की असली गणित आपको मालूम होनी चाहिए। ताकि आप खुद को भीषण गर्मी से बचा सकें। आम तौर पर जब तापमान सामान्य से 4.5°C अधिक हो तब लू यानि हीटवेव कहते हैं। और जब तापमान सामान्य से 6.4°C ज्यादा हो तब भीषण लू यानि एक्स्ट्रीम हीटवेव कहा जाता है। मैदानी, पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में हीट वेव के अलग-अलग मानक होते हैं।
गर्मी के दिनों में मौसम की इन चेतावनियों के बारे में आपको जरूर मालूम होना चाहिए-
Hot Day: गर्म दिन
Hot & Humid: गर्म और उमस भरा
Heat Wave: लू / ऊष्ण लहर
Warm Night: गर्म रात
2. वर्षा या मॉनसून के दिनों में मौसम विभाग की चेतावनियां
बारिश के मौसम में कई बार आसमान साफ देखते ही आप बाहर निकल पड़ते हैं। और अचानक बादल आते हैं पानी बरसने लगता है और आप भारी बारिश व जलभराव के बीच में फंस जाते हैं। ऐसे में मौसम के प्रति पहले से अलर्ट रहने में आनको निम्न चिन्ह मदद कर सकते हैं।
Heavy Rain: भारी वर्षा
Very Heavy Rain: बहुत भारी वर्षा
Extremely Heavy Rain: अत्यंत भारी वर्षा
Thunder & Lightning: गर्जना और बिजली चमकना
Hailstorm: ओलावृष्टि
3. मौसम विभाग कब देता है आंधी-तूफान की चेतावनी?
मौसम विज्ञान विभाग आंधी की चेतावनी तब जारी करता है जब वायुमंडल में कम दबाव और तापमान के भारी अंतर के कारण 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक की गति से हवाएं चलने की संभावना होती है। इसके लिए वैज्ञानिक रूप से हवा की गति और गरज के साथ उठने वाले बादलों की मैपिंग की जाती है। यदि हवा की रफ्तार 50-60 किमी/घंटा तक पहुँचने की उम्मीद हो, तो इसे 'धूल भरी आंधी' (Dust Storm) या 'गरज के साथ तूफान' (Thunderstorm) की श्रेणी में रखकर येलो या ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाता है।
मुख्य रूप से जब रडार पर 'कन्वेक्टिव एक्टिविटी' यानी जमीन की गर्मी के कारण हवा का तेजी से ऊपर उठना दिखाई देता है, तब विभाग जान-माल की सुरक्षा के लिए कुछ घंटों पहले चेतावनी जारी कर देता है।
आंधी-तूफान से जुड़े निम्न चिन्हों को नीचे तस्वीर में समझें :
Dust Storm: धूल भरी आँधी
Dust Raising Winds: धूल उड़ाने वाली हवाएँ
Strong Surface Wind: तेज सतही हवाएँ
Thunderstorm : गरज के साथ तूफान
Cyclone : चक्रवात
4. सर्दी और बर्फबारी से जुड़ी चेतावनियां
भारत में सर्दी और बर्फबारी से जुड़ी चेतावनियों को समझना न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बल्कि यातायात व्यवस्था के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कोहरे, शीत लहर और जमीनी पाले की वजह से अकसर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। उड़ानें व ट्रेनें स्थगित या रद्द कर दी जाती हैं। भारी हिमपात होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क यातायात थम जाता है और कई बार फसलें भी खराब हो जाती हैं। व्यक्तिगत रूप से देखें तो कई बार शीत लहर में बाहर निकलना सेहत के लिए हानिकारक हो जाता है।
इसके अलावा, अत्यधिक ठंड और कोहरे का सीधा असर यातायात, बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य (विशेषकर हृदय और श्वसन संबंधी रोगों) पर पड़ता है, इसलिए मौसम विभाग के इन संकेतों को समझकर हम संभावित दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य जोखिमों को कम कर सकते हैं।
Fog: कोहरा
Heavy Snow: भारी हिमपात (बर्फबारी)
Cold Wave: शीत लहर
Cold Day: ठंडा दिन
Ground Frost: जमीनी पाला / शीतदंश
मौसम विभाग द्वारा चेतावनी में इस्तेमाल होने वाले रंग
जब-जब चक्रवात, शीतलहर या एक्स्ट्रीम हीटवेव चलती है या समुद्र में तूफान या सुनामी, पहाड़ों पर भारी बर्फबारी या किसी भी इलाके में भारी बारिश की आशंका होती है तब मौसम विभाग अलर्ट जारी करता है। ये अलर्ट तीन रंगों में बांटे गए हैं जो इस प्रकार हैं:
पीला रंग : निगरानी रखें (सतर्क रहें)
नारंगी रंग : अलर्ट रहें (कार्रवाई के लिए तैयार रहें)
लाल रंग : चेतावनी (कार्रवाई करें)
यह याद रखना आवश्यक है कि मौसम की हर चेतावनी हमारे लिए एक जिम्मेदारी भी लेकर आती है। जब प्रशासन 'ऑरेंज' या 'रेड' अलर्ट जारी करे, तो उसे गंभीरता से लें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। अपनी स्थानीय मौसम रिपोर्ट पर भरोसा करें, अफवाहों से बचें और इन जानकारियों को दूसरों के साथ भी साझा करें। आपकी थोड़ी सी सजगता और तैयारी आपको और आपके परिवार को किसी भी प्राकृतिक आपदा के प्रभाव से सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो सकती है।
मौसम विभाग द्वारा जारी की जाने वाली ये चेतावनियां केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये हमारी सुरक्षा के लिए एक 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' की तरह काम करती हैं। चाहे वह भीषण लू की तपिश हो या मूसलाधार बारिश का अलर्ट, इन तकनीकी शब्दों और कलर-कोड को समझने से हम न केवल अपनी दैनिक गतिविधियों की बेहतर प्लान बना सकते हैं, बल्कि समय रहते जान-माल के नुकसान को भी रोक सकते हैं। प्रकृति के बदलते मिजाज के बीच जागरूक रहना ही बचाव की दिशा में हमारा पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
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