कुकरैल नदी के किनारे सुरक्षित वन क्षेत्र पेड़ों की कटाई और बढ़ते अतिक्रमण व शहरीकरण के कारण खतरे में है।
स्रोत : विकी कॉमंस
लखनऊ : कुकरैल नाइट सफारी के नाम पर अब नहीं कटेंगे 846 पेड़, चौड़ी सड़क के लिए पर्यावरण का नुकसान होने से बचा
कहा जाता है कि विकास अकसर अपने साथ विनाश भी लेकर आता है। यह बात उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सच साबित भी होती दिख रही थी। क्योंकि बहुप्रतीक्षित कुकरैल नाइट सफारी के लिए यहां फोर लेन सड़क बनाने की योजना थी। इसके लिए बड़ी संख्या में रास्ते में पड़ रहे पेड़ों की कटाई होने वाली थी। अब यह सड़क केवल दो लेन की बनेगी, जिससे करीब 846 पेड़ कटने से बच जाएंगे।
CEC की आपत्ति के बाद 4 लेन का प्रस्ताव खारिज
दरअसल, पीडब्ल्यूडी ने 17 फरवरी 2025 को कुकरैल नाइट सफारी तक चार लेन सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक इसपर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) ने गंभीर आपत्ति जताई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि चार लेन सड़क बनने पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा। इसके बाद नाइट सफारी तक प्रस्तावित चार लेन सड़क को रोकते हुए अब दो लेन सड़क बनाने का निर्णय लिया गया है। इस बदलाव से 846 से ज्यादा पेड़ अब कटाई से बच गए हैं। अब पीडब्ल्यूडी को दो लेन सड़क का नया प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने चार लेन सड़क के लिए स्वीकृत करीब 7 करोड़ रुपये का बजट भी शासन को सरेंडर कर दिया है। बता दें कि 2002 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CEC का गठन किया गया था। इस समिति का काम वन, पर्यावरण और वन्यजीव से जुड़े मामलों में कोर्ट की मदद करना है। समिति को बाद में 2008 में पुनर्गठन किया गया था।
चिड़ियाघर भी नहीं होगा शिफ्ट
नाइट सफारी के अलावा प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 150 एकड़ में नया प्राणी उद्यान विकसित किया जाना था। लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर को भी यहीं शिफ्ट किया जाना था। लेकिन, इसपर CEC की कड़ी आपत्तियों के कारण यह काम भी अब नहीं होगा। CEC ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कुकरैल नाइट सफारी में लखनऊ चिड़ियाघर को शिफ्ट करने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने चिड़ियाघर को मौजूदा स्थान पर ही बनाए रखने की सिफारिश की है। समिति ने लखनऊ जू को शहर का ‘ग्रीन लंग’ (हरित फेफड़ा) बताते हुए कहा है कि इसका शहर के भीतर रहना पर्यावरण और सामाजिक दृष्टि से जरूरी है।
लखनऊ जू प्रशासन ने बढ़ते ट्रैफिक और वन्यजीवों में जेनेटिक बीमारियों के खतरे का हवाला दिया था, लेकिन समिति ने इन तर्कों को सही नहीं माना। इसके अलावा जू हटाने के पक्ष में दिए गए तर्क जैसे जगह की कमी, पर्यटकों का दबाव और आधुनिकीकरण में कठिनाई को भी CEC ने सही नहीं पाया। सीईसी के अनुसार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल पहले से लागू हैं, इसलिए किसी तरह का जोखिम नहीं है। जू हटाने की बजाय आधुनिकीकरण पर जोर समिति ने कहा कि शहरी नियोजन के लिहाज से भी चिड़ियाघर को मौजूदा स्थान पर रखकर आधुनिक बनाना ज्यादा उपयुक्त है।
पेड़ों की कटाई से सिमटता जा रहा है कुकरैल के जंगल का दायरा।
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वन्यजीवों के आवास प्रभावित होने का भी खतरा
CEC ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से चेताया है कि नाइट सफारी जैसी परियोजनाएं केवल संरचनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इनके साथ मानवीय गतिविधियों में भी तेजी से वृद्धि होती है। सफारी के संचालन के दौरान पर्यटकों की आवाजाही, वाहनों का आवागमन, कृत्रिम रोशनी और ध्वनि प्रदूषण जैसे कारक लगातार बढ़ते हैं। इसका सीधा असर आसपास रहने वाले वन्यजीवों पर पड़ता है, जो स्वाभाविक रूप से शांत और कम हस्तक्षेप वाले वातावरण में पनपते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की गतिविधियों से जानवरों के भोजन, प्रजनन और आवागमन के प्राकृतिक पैटर्न प्रभावित हो सकते हैं। कई प्रजातियां अपने मूल आवास को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में पलायन करने लगती हैं, जिससे स्थानीय जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा, मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी बढ़ जाती है। लंबे समय में यह स्थिति पूरे क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को अस्थिर कर सकती है, जो किसी भी संरक्षित वन क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
इस तरह के CEC के पास पहुंचा मामला
उत्तर प्रदेश सरकार की कुकरैल रात्रि सफारी और लखनऊ चिड़ियाघर परियोजना के खिलाफ पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारियों के एक समूह ने 2023 में सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इसके बाद से ही यह प्रोजेक्ट कोर्ट की जांच के दायरे में है। याचिकाकर्ताओं ने वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि यह अधिनियम टीएन गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1996 में दिए गए फैसले में परिभाषित 'वन' की परिभाषा को कमजोर करता है।
मामले की सुनवाई के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने 19 फरवरी, 2024 को एक अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में उल्लिखित चिड़ियाघरों और सफारी की स्थापना के किसी भी प्रस्ताव को न्यायालय की पूर्व स्वीकृति के बिना अंतिम रूप से पारित या लागू नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्ता आलोक सिंह ने भी इस मामले में एक याचिका दायर की थी। वह इस मामले के अलावा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) में पर्यावरण से जुड़े इसी तरह के कई मामलों में पक्षकार हैं। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में कहा कि कुकरौल नाइट सफारी का प्रोजेक्ट आरक्षित वन (रिजर्व फॉरेस्ट) को काफी बुरी तरह से प्रभावित करेगा। इसके चलते हजारों घने पेड़ों की कटाई होगी, जिससे जंगल के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान होगा। साथ ही इससे जलवायु परिवर्तन का खतरा भी बढ़ जाएगा।
इन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए अगस्त 2025 के आखिरी सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में कुकरैल नाइट सफारी परियोजना को मंजूरी के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के पास भेज दिया था।
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति एनवी अंजारी और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की तीन सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार (29 अगस्त) को यह आदेश पारित किया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी 8 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय में एक पक्षकार बनने का आवेदन दायर किया, जिसमें सफारी स्थापित करने और लखनऊ चिड़ियाघर को कुकरैल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी थी। इससे पहले, कुकरैल नाइट सफारी परियोजना सर्वोच्च न्यायालय के 19 फरवरी, 2024 के उस आदेश के कारण रुक गई थी, जिसमें देश भर की केंद्र और राज्य सरकारों को सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के बिना वन क्षेत्रों (संरक्षित क्षेत्रों को छोड़कर) में चिड़ियाघर और सफारी स्थापित करने से रोक दिया गया था। यह आदेश तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने पारित किया था।
घडि़यालों के संरक्षण के लिए दुनिया भर में मशहूर हुआ करती थी कुकरैल नदी और पिकनिक स्पॉट।
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क्या है कुकरैल नाइट सफारी प्रोजेक्ट
16 अगस्त, 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी और चिड़ियाघर के निर्माण को हरी झंडी दी गई थी। तब यह देश का पहला और एशिया का 5वां नाइट सफारी प्रोजेक्ट था। इसकी अनुमानित लागत 1510 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
कुकरैल जंगल 2027.46 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। इसमें से 350 एकड़ में नाइट सफारी बनाया जाना था। यह पूरा प्रोजेक्ट दो फेज में पूरा करने की योजना है। पहले चरण में नाइट सफारी, एडवेंचर पार्क, बाड़े, गाइडेड टूर व्यवस्था, इको टूरिज्म जोन बनाया जाना था। इसके बाद दूसरे चरण में प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) के निर्माण और इको टूरिज्म सुविधाएं विकसित करने की योजना थी।
कुकरैल नाइट सफारी को सिंगापुर की नाइट सफारी की तर्ज पर डिजाइन किया जाना है, जहां टाइगर, लेपर्ड, भालू जैसे वन्यजीव खुले वातावरण में रात के वक्त भी देखे जा सकें। इको टूरिज्म के तहत नाइट सफारी में 72 फीसदी एरिया में हरियाली रहेगी। यहां एडवेंचर जोन कैफेटेरिया, 7-डी थिएटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग की भी सुविधा होगी। यहां पर सौर ऊर्जा का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
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