यूपी : रामपुर में सौ साल पुराने भाखड़ा बांध में दरार, जलाशय से रुक नहीं रहा का जल रिसाव

बहाव रोकने के लिए लगाई गई चार जियो ट्यूबों के तेज बहाव में बहने के बाद सिंचाई विभाग अब जलाशय के अंदर ही मिट्टी का कच्चा बांध बनाने की कोशिश कर रहा है
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की बिलासपुर तहसील में भाखड़ा नदी पर बना यह  ऐतिहासिक बांध करीब सौ साल पुराना है। 

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की बिलासपुर तहसील में भाखड़ा नदी पर बना यह ऐतिहासिक बांध करीब सौ साल पुराना है। 

फोटो : फेसबुक

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उत्‍तर प्रदेश के रामपुर में सौ साल पहले 1926 में अंग्रेजों द्वारा बनवाए गए ऐतिहासिक भाखड़ा बांध की मिट्टी धंसने से दरार आ गई है। इस दरार से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। करीब दो हफ्ते से जारी इस रिसाव का पानी अब आसपास के इलाकों में भरने लगा है। इससे बांध के नज़दीकी इलाकों की करीब 40 हजार की आबादी के प्रभावित होने की आशंका है। 

8 सितंबर की दोपहर भाखड़ा नदी के बांध में दरारें दिखनी शुरू हुई थीं। तीन दिन बाद 11 सितंबर को बांध का एक हिस्‍सा अचानक धमाके के साथ धंस गया था। बांध के ढांचे में धंसाव के बाद अब सराउंडिंग बाउंड्री वाल के दायीं ओर दरारें पड़ने से स्ट्रैक्चर भी धंस गया है। इससे क्षेत्र में खलबली मची हुई है और स्थानीय लोगों में किसी बड़े हादसे को लेकर गंभीर आशंका बनी हुई है। क्‍योंकि बांध से रिसते पानी के कारण सड़क भी धंस गई है। हालांकि, सिंचाई विभाग का दावा है कि खतरे वाली कोई बात नहीं है। मरम्मत कार्य के साथ ही नया बांध बनवाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बांध में दरार आने के बाद डीएम अजय कुमार द्विवेदी समेत अन्य अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर जल्द बांध पर मिट्टी और पत्थरों से पटान करने का आदेश दिया था। तात्‍कालिक कार्यवाही करते हुए मिट्टी और पत्थर डालने के बाद बांध में हुई खाई को पाट दिया गया था और रिसाव को रोकने के लिए डैम के जलाशय को तेजी से खाली किया जाने लगा। ताकि पानी का स्तर कम होने के बाद ही अंदरूनी रिसाव की तकनीकी मरम्मत कार्य शुरू करवाया जा सके।

<div class="paragraphs"><p>भाखड़ा बांध से रिस रहे पानी को राकने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई मिट्टी की दीवार।</p></div>

भाखड़ा बांध से रिस रहे पानी को राकने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई मिट्टी की दीवार।

फोटो : फेसबुक

चार जियो ट्यूब पानी में बहने के बाद अब नई रणनीति 

डैम के जलाशय से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए नहर विभाग की कोशिशें अब भी जारी हैं। पानी को रोकने के लिए लगाई गई चार जियो ट्यूब पानी के तेज बहाव में बहने के बाद विभाग ने अब जलाशय के अंदर ही मिट्टी का कच्चा बांध बनाकर पानी की धारा को मोड़ने की नई रणनीति अपनाई है। जियो ट्यूबों के बहने के बाद विभाग ने जेसीबी और पोकलेन मशीनों के जरिये जलाशय के अंदर ही करीब 40 मीटर लंबी व पांच मीटर ऊंची मिट्टी की दीवार खड़ी कर दी है। इसे दूसरी दीवार से जोड़कर पानी की धारा मोड़ने की तैयारी की जा रही है। विभाग ने जेसीबी और पोकलेन मशीनों के जरिये जलाशय के अंदर ही करीब 40 मीटर लंबी व पांच मीटर ऊंची मिट्टी की दीवार खड़ी कर दी है। विभाग के मुताबिक बारिश थमने और धूप निकलने से मरम्‍मत कार्य में थोड़ी सहूलियत हुई है।  तेज धूप की वजह से पानी सूखने वाली जगह की मिट्टी टाइट हो गई है, जिससे दीवार बनाने में आसानी हो रही है। यह दीवार पूरी होने के बाद स्रोत की तरफ से बनाई जा रही दूसरी 40 मीटर लंबी दीवार से इसे जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद नदी के पानी को उत्तर दिशा में बाईं भाखड़ा नहर और भाखड़ा की मुख्य नदी में मोड़ दिया जाएगा। इससे स्रोत में पानी जाना पूरी तरह बंद हो जाएगा और उसके बाद स्रोत को हमेशा के लिए बंद करने का काम शुरू किया जाएगा।

रिसाव से पानी की बर्बादी, सिंचाई पर कितना असर?

रामपुर के बिलासपुर स्थित ऐतिहासिक भाखड़ा बांध में लगातार हो रहा रिसाव जल संरक्षण के लिहाज से भी चिंता का विषय है। बांध में दरार आने के बाद से बीते कई दिनों से जलाशय से लगातार भारी मात्रा में पानी के रिसाव की बातें सामने आई हैं। हालांकि, अभी तक किसी सरकारी या मीडिया रिपोर्ट में रिसाव से प्रतिदिन या कुल कितने लीटर पानी बाहर निकल रहा है, इसका कोई सटीक आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए पानी की बर्बादी की मात्रा ठीक-ठीक नहीं बताई जा सकती। इसके लिए रिसाव की दर, उसकी अवधि और जलाशय के जलस्तर में हुए बदलाव का तकनीकी आकलन जरूरी है। यह भी देखना होगा कि रिसकर निकलने वाला पानी पूरी तरह अनुपयोगी हो रहा है या उसका कुछ हिस्सा नदी अथवा आसपास के जल निकायों में वापस पहुंच रहा है। क्‍योंकि, सिंचाई विभाग रिस रहे पानी को मिट्टी की रिटेनिंग वाल के जरिये वापस नदी में डायवर्ट करने का प्रयास कर रहा है। 

15 हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई पर भी असर

भाखड़ा बांध की मौजूदा समस्या का सीधा संबंध क्षेत्र की कृषि और सिंचाई व्यवस्था से भी है।  21 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस बांध से करीब 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है और 88 से 90 गांवों के लगभग 20 हजार किसान इससे लाभान्वित होते हैं। बांध की मरम्मत या सुरक्षा के लिए पानी का बहाव नियंत्रित करना पड़ा, अथवा नहरों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई, तो किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, फिलहाल कितने खेतों तक पानी पहुंचना बंद हुआ है या सिंचाई की आपूर्ति में कितनी कमी आई है, इसका पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। किसानों की चिंता मुख्य रूप से इस आशंका से जुड़ी है कि समय पर पानी नहीं मिलने से खड़ी फसलों और आगामी फसली सीजन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में बांध की सुरक्षा के साथ सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी होगा।

<div class="paragraphs"><p>बांध से बह रहे पानी को रोकने के लिए चार बार&nbsp;चार जियो ट्यूब से बांध बानाने की कोशिशों में जियो ट्यूब पानी में बह गईं।&nbsp;</p></div>

बांध से बह रहे पानी को रोकने के लिए चार बार चार जियो ट्यूब से बांध बानाने की कोशिशों में जियो ट्यूब पानी में बह गईं। 

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जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है बांध की सुरक्षा

बांध और जलाशय बारिश तथा नदी के पानी को नियंत्रित करने, जरूरत के समय जल उपलब्ध कराने और सिंचाई जैसी पानी की ज़रूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी बांध में रिसाव या संरचनात्मक क्षति होने पर केवल उसके ढांचे की मरम्मत ही नहीं, बल्कि पानी के भंडारण और वितरण पर पड़ने वाले असर का भी आकलन जरूरी है। रामपुर के भाखड़ा बांध के मामले में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि जलाशय की उपयोगी भंडारण क्षमता कितनी प्रभावित हुई है, नहरों में पानी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है या नहीं और मरम्मत के दौरान पानी के नुकसान को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए नियमित निरीक्षण, रिसाव की निगरानी और समयबद्ध रखरखाव की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है। खासकर भाखड़ा जैसे करीब सौ साल पुराने बांध के मामले में तो यह और भी जरूरी हो जाता है। 

नए पुल में भी आईं दरारें

भाखड़ा डैम पर करीब 16 साल पहले बना नया पुल भी अब खतरे की जद में आ गया है। नैनीताल हाईवे पर स्थि‍त इस पुल के एक छोर के पिलर के जोड़ पर ऊपर से नीचे तक लंबी दरार आ गई है और दीवार पर सीलन व रिसाव के निशान भी बन गए हैं। इससे पुल पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। रामपुर से रुद्रपुर आने-जाने के लिए यह पुल प्रमुख मार्ग है। पुल से होकर रोजाना हजारों गाड़ियां रामपुर से रुद्रपुर और रुद्रपुर से रामपुर आती-जाती हैं। ऐसे में अगर यह पुल अचानक टूटता या धंसता है, तो बड़े हादसे की आशंका से इन्‍कार नहीं किया जा सकता। 

अंग्रेजों ने बनवाया था रामपुर में यह बांध

अंग्रेजों के जमाने में बना रामपुर का ऐतिहासिक भाखड़ा बांध आज अपने अस्तित्व को लेकर संकट का सामना कर रहा है। इस बांध से केवल पानी का प्रबंधन ही नहीं जुड़ा था, बल्कि यह क्षेत्र के लोगों की आस्था, आजीविका और समृद्धि का भी प्रतीक रहा है। बांध से उठने वाली पानी की लहरें स्थानीय लोगों के लिए खुशहाली और उम्मीद का अहसास लेकर आती थीं। यही वजह है कि इसकी जर्जर होती हालत और दरारों की खबर से क्षेत्र के लोग मायूस हैं। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, इसका निर्माण वर्ष 1926 में आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर हारकोर्ट बटलर ने कराया था। बांध परिसर में उनके नाम का शिलालेख भी लगा हुआ है, जो इसके ऐतिहासिक महत्व की याद दिलाता है। हालांकि, लगातार रिसाव और संरचना में बड़ी-बड़ी दरारें आने के बाद अब इसकी मरम्मत के साथ-साथ इसकी जगह नया बांध बनाने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसे में सवाल सिर्फ एक पुरानी संरचना को बचाने का नहीं, बल्कि उससे जुड़े ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय जरूरतों और भविष्य की जल सुरक्षा का भी है।

हिमाचल के भाखड़ा-नांगल डैम से अलग है यह बांध

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की बिलासपुर तहसील में भाखड़ा नदी पर बना यह स्थानीय ऐतिहासिक बांध हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध भाखड़ा-नांगल बांध से बिल्कुल अलग है। दोनों के नाम में समानता होने के कारण इनके बीच भ्रम हो सकता है, लेकिन इनका स्थान, निर्माण का इतिहास, आकार और उद्देश्य अलग-अलग हैं। रामपुर का भाखड़ा बांध एक स्थानीय जल संरचना है, जिसका क्षेत्र की सिंचाई और आसपास के जनजीवन से गहरा संबंध रहा है। रामपुर का भाखड़ा बांध 1926 में ब्रिटिश शासनकाल में बनाया गया था। जबकि हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी पर बने भाखड़ा बांध का निर्माण कार्य इसके काफी बाद में देश के आज़ाद होने पर 1951–52 के दौरान शुरू हुआ था। भाखड़ा-नांगल बांध का निर्माण 1962 में पूरा हुआ और 22 अक्टूबर 1963 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह देश की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शामिल है, जो बिजली उत्पादन, सिंचाई और जल प्रबंधन जैसी जरूरतों को पूरा करता है। इसलिए रामपुर के बांध में आई दरारों और रिसाव की खबर को भाखड़ा-नांगल परियोजना से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। रामपुर के इस बांध की मौजूदा स्थिति, मरम्मत और भविष्य की योजनाओं का आकलन स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

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