हाल के वर्षों में दुनिया भर में धरती में बड़े-बड़े सिंक होल बनने की घटनाओं में तेजी आई है, जससे भूगर्भशास्त्री चिंतित हैं।
स्रोत : विकी कॉमंस
धंसती धरती : ज़मीन में जगह-जगह क्यों हो रहे सिंक होल ?
चीन के शंघाई प्रांत के मिनहांग जिले में 12 फरवरी धरती में अचानक बने एक सिंक होल में सड़क और इमारत के धंसने से मची अफरा-तफरी का वीडियो भारत सहित दुनिया भर के सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को ब्रिटेन के काउंटी श्रॉपशायर में एक नहर में एक विशाल सिंक होल बनने की वजह से नहर से गुजर रही कई नावों के कीचड़ में धंसने का वीडियो सामने आया था। बीते कुछ महीनों में दुनिया के विभिन्न इलाकों में बड़े-बड़े सिंक होल बनने की घटनाएं जहां लोगों को डरा रही हैं, वहीं यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर धरती के धंसने की इन घटनाओं की वजह क्या है? हमारी पृथ्वी के गर्भ में ऐसा क्या हो रहा है, जिसके कारण एक के बाद एक ये बड़े-बड़े सिंक होल बनते जा रहे हैं? यह निकट भविष्य में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का संकेत तो नहीं?
हाल के वर्षों में दुनिया भर में सिंक होल की बड़ी घटनाएं
सिंक होल की घटनाएं अब किसी एक देश या महाद्वीप तक सीमित नहीं रहीं। देश-विदेश में ऐसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हाल के वर्षों में इसमें खासतौर पर तेजी देखने को मिली है। धरती में सिंक होल बनने की कुछ हालिया प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं-
27 अगस्त 2025 को हरियाणा के गुरुग्राम में सेक्टर 74A स्थित एसपीआर रोड पर अचानक सड़क धंस गई और एक ट्रक उसमें आधा समा गया। यह इलाका तेजी से हो रहे शहरी विकास और भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों ने प्रारंभिक जांच में भूमिगत जल निकासी और सीवेज लाइन में रिसाव को संभावित कारण बताया।
13 जून 2021 को मुंबई के घाटकोपर इलाके में एक रिहायशी परिसर की पार्किंग में अचानक बना सिंक होल एक कार को निगल गया। कुछ ही मिनटों में कार पूरी तरह जमीन में समा गई। यह इलाका पुराने खनन क्षेत्र के पास स्थित है, जहां भूमिगत खाली स्थान पहले से मौजूद थे।
26 अप्रैल 2024 को राजस्थान के बीकानेर जिले में कृषि क्षेत्र के बीच गहरा और चौड़ा सिंक होल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि जमीन पहले हल्की धंसान दिखा रही थी, लेकिन कुछ ही घंटों में वह कई मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया। क्षेत्र में भूमिगत जल दोहन और ढीली रेतीली संरचना को इसके पीछे का कारण माना गया।
फरवरी 2024 में जापान के फुकुओका शहर में सड़क धंसने की घटना ने एक बार फिर 2016 जैसी घटना की याद दिला दी, जब वहां का एक बड़ा चौराहा अचानक बैठ गया था।
2023 में तुर्किये में करस्ट इलाके में बने कई सिंक होल ने किसानों की चिंता बढ़ाई। लगातार सूखे और भूजल के अत्यधिक दोहन को इसका प्रमुख कारण माना गया।
2023 में अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में एक रिहायशी इलाके में रातों-रात बने सिंक होल ने कई घरों को असुरक्षित घोषित करवा दिया। फ्लोरिडा की चूना-पत्थर आधारित भू-संरचना पहले से ही सिंक होल के लिए संवेदनशील मानी जाती है।
2022 में मेक्सिको के प्यूब्ला राज्य में खेत के बीच अचानक बना विशाल सिंक होल कुछ ही हफ्तों में कई मीटर चौड़ा हो गया और पास का मकान उसमें समा गया।
2022 में पाकिस्तान के कराची में एक व्यस्त सड़क पर अचानक गड्ढा बन गया, जिससे कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए।
2024 में दक्षिण कोरिया के सियोल में मेट्रो निर्माण स्थल के पास जमीन धंसने की घटना ने शहरी बुनियादी ढांचे पर सवाल खड़े किए।
2021 में मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप के पास सांता मारिया ज़ाकाटेपेक क्षेत्र में अचानक एक विशाल सिंक होल बना। आसपास के घरों को खाली कराना पड़ा और बाद में एक मकान पूरी तरह उसमें समा गया। यह सिंक होल कुछ ही दिनों में 100 मीटर से अधिक चौड़ा हो गया। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार भूजल प्रवाह और ढीली चूना-पत्थर संरचना के कारण यह तेजी से फैलता गया। भारी वर्षा के बाद भूमिगत जल द्वारा चूना-पत्थर के घुलने की प्रक्रिया तेज होने के कारण यह धंसाव हुआ।
धरती में सिंक होल बनने की इन घटनाओं का पैटर्न बताता है कि सिंक होल अब केवल प्राकृतिक करस्ट क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि शहरी इलाकों में भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
12 फरवरी 2025 को चीन के शंघाई प्रांत में बने सिंक होल में सड़क का एक बड़ा हिस्सा और आसपास की कुछ इमारतें धंसने से अफरा-तफरी मच गई।
स्रोत : सीएनए
क्यों धंस रही धरती, क्या कहते हैं वैज्ञानिक ?
सिंक होल मुख्यतः तब बनते हैं जब जमीन के नीचे मौजूद घुलनशील चट्टानें, जैसे चूना पत्थर, डोलोमाइट या जिप्सम, पानी के संपर्क में आकर धीरे-धीरे घुल जाती हैं। इससे भूमिगत खाली जगह बनती है और ऊपर की सतह अचानक धंस जाती है। इस प्रक्रिया को करस्ट टोपोग्राफी कहा जाता है।
United States Geological Survey के अनुसार, प्राकृतिक करस्ट संरचनाएं तो सदियों से बनती रही हैं, लेकिन हाल के दशकों में मानव गतिविधियों ने इस प्रक्रिया को तेज किया है। भूजल का अत्यधिक दोहन, भूमिगत पाइपलाइन रिसाव, खनन, मेट्रो और सुरंग निर्माण जैसी गतिविधियां जमीन के नीचे के संतुलन को बिगाड़ देती हैं।
Reviews of Geophysics में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में सिंक होल की बढ़ती घटनाओं के पीछे भूमिगत जल स्तर में तेजी से बदलाव एक अहम कारक है। जब पानी तेजी से निकाला जाता है तो खाली गुहाएं बनती हैं और सतह बैठ जाती है।
सैटेलाइट इंटरफेरोमेट्री तकनीक से किया गया NASA का अध्ययन बताता है कि कई शहरों में जमीन हर साल कुछ मिलीमीटर से लेकर कई सेंटीमीटर तक धंस रही है। यह धीमी प्रक्रिया अचानक बड़े सिंक होल में बदल सकती है।
भारत में जियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया और अन्य कुछ अन्य भूगर्भीय के शोध अध्ययनों में चेताया गया कि तेजी से शहरीकरण और अनियोजित भूजल दोहन आने वाले वर्षों में सिंक होल के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन भी अप्रत्यक्ष भूमिका निभा रहा है। लंबे सूखे के बाद अचानक भारी बारिश होने से भूमिगत खाली स्थान तेजी से धंस सकते हैं।
East African Rift : क्या सचमुच दो हिस्सों में बंट रहा है अफ्रीका?
पिछले कुछ वर्षों में केन्या, इथियोपिया और तंज़ानिया के इलाकों में धरती में आई लंबी दरारों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। 2018 में केन्या के नारोक क्षेत्र में आई कई किलोमीटर लंबी दरार ने यह चर्चा तेज कर दी कि क्या अफ्रीका महाद्वीप सचमुच दो हिस्सों में टूट रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना किसी अचानक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि लाखों वर्षों से चल रही टेक्टोनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। पूर्वी अफ्रीका में अफ्रीकी प्लेट दो हिस्सों न्यूबियन और सोमाली प्लेट के रूप में धीरे-धीरे अलग हो रही है। यह अलगाव औसतन कुछ मिलीमीटर से लेकर कुछ सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से हो रहा है। इसी प्रक्रिया को ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट सिस्टम कहा जाता है, जो लाल सागर से लेकर मोज़ाम्बिक तक फैला है। भूगर्भीय अध्ययनों में पाया गया है कि भविष्य में, संभवतः लाखों वर्षों बाद, यह क्षेत्र एक नए द्वीप और महासागर में बदल सकता है।
धरती की सतह पर अचानक बनने वाले सिंकहोलों को भूगर्भ में हो रही किसी तेज हलचल का संकेत माना जा रहा है।
स्रोत : विकी कॉमंस
Pangaea से आज तक: महाद्वीपों के बंटने की भूगर्भीय कहानी
अफ्रीका में दिख रही दरार को पृथ्वी के प्रागैतिहासिक इतिहास से जोड़कर भी देखा जा रहा है। लगभग 20 से 25 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर सभी महाद्वीप एक ही विशाल भूखंड 'पेंजिया' (Pangaea) का हिस्सा थे। प्लेट टेक्टोनिक्स की प्रक्रिया के कारण यह सुपरमहाद्वीप धीरे-धीरे टूटकर अलग-अलग महाद्वीपों में बंट गया। पहले लॉरेशिया और गोंडवाना बने, और बाद में वर्तमान अफ्रीका, एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका जैसे महाद्वीप अस्तित्व में आए।
आज पूर्वी अफ्रीका में जो दरार दिखाई दे रही है, उसे कई भूगर्भशास्त्री उसी भूगर्भीय चक्र की निरंतरता से जोड़ कर देख रहे हैं। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें स्थिर नहीं हैं; वे निरंतर गतिशील हैं। जिस तरह अटलांटिक महासागर का निर्माण उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के अलग होने से हुआ, उसी तरह पूर्वी अफ्रीका का यह रिफ्ट भविष्य में एक नए समुद्री बेसिन का रूप ले सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया मानवीय समय-सीमा में नहीं, बल्कि लाखों वर्षों में पूरी होगी। इसलिए “अफ्रीका टूट रहा है” जैसी सुर्खियां भले ही सनसनीखेज लगें, लेकिन वास्तविकता यह है कि हम पृथ्वी के भूगर्भीय विकास की एक धीमी, लेकिन ऐतिहासिक प्रक्रिया को अपनी आंखों के सामने घटित होते देख रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: जब पहली बार दर्ज हुई धरती की यह भयावह घटना
धरमी में सिंक होल बनना कोई नई घटना नहीं है। ऐसी घटनाएं सदियों से होती आ रही हैं। इतिहास में ऐसी कई घटनाओं का उल्लेख मिलता है। सिंक होल की कुछ प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं इस प्रकार हैं-
1341 में इटली के नेपल्स क्षेत्र में एक बड़े भूमिगत धंसाव का वर्णन स्थानीय अभिलेखों में मिलता है, जहां चूना-पत्थर क्षेत्र में अचानक जमीन बैठ गई थी।
1456 में बाल्कन क्षेत्र में आए भूकंप के बाद कई जगह जमीन धंसने की घटनाएं दर्ज की गईं।
1980 में अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के विंटर पार्क शहर में एक विशाल सिंक होल बना, जिसने कारें, स्विमिंग पूल और एक घर को निगल लिया। यह घटना आधुनिक इतिहास की चर्चित घटनाओं में गिनी जाती है।
2010 में ग्वाटेमाला सिटी में उष्णकटिबंधीय तूफान के बाद बना गहरा सिंक होल कई मंजिला इमारत को निगल गया था।
2013 में फ्लोरिडा में ही एक व्यक्ति अपने बेडरूम सहित जमीन में समा गया। यह घटना बताती है कि सिंक होल कितने अचानक और घातक हो सकते हैं।
इतिहास बताता है कि करस्ट क्षेत्र हमेशा से संवेदनशील रहे हैं, लेकिन मानव हस्तक्षेप ने इन घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ा दी है।
क्या प्राचीन माया सभ्यता को निगल गया ब्लू सिंक होल?
हाल के वर्षों में टेक्सास विश्वविद्यालय सहित कई शोध संस्थानों ने ग्रेट ब्लू होल की तलछट और खनिज संरचना का अध्ययन किया है। समुद्र तल से निकाले गए कोर सैंपल्स में टाइटेनियम और एल्यूमिनियम जैसे तत्वों के अनुपात में बदलाव दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, टाइटेनियम की मात्रा में वृद्धि प्रायः भारी वर्षा और अधिक अपक्षय का संकेत देती है, जबकि एल्यूमिनियम का अनुपात अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियों से जुड़ा होता है। इन खनिज परतों की तुलना जब प्राचीन माया सभ्यता के पतन काल, यानी लगभग 800 से 1000 ईस्वी के बीच के कालखंड से की गई, तो पाया गया कि उस दौरान क्षेत्र में लंबे सूखे और अनियमित वर्षा चक्र मौजूद थे। शोधकर्ताओं का मानना है कि जल संकट, कृषि विफलता और सामाजिक अस्थिरता ने माया सभ्यता के पतन में अहम भूमिका निभाई। हालांकि ब्लू होल ने सीधे किसी नगर को “निगला” नहीं, लेकिन इसकी तलछटी परतें उस जलवायु अस्थिरता का वैज्ञानिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करती हैं, जिसने माया समाज की नींव को कमजोर कर दिया।
कुछ जगहां पर बने सिंक होलों में भूजल भर जाने से गहरी झील जैसी संरचनाएं बन गई हैं।
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Great Blue Hole : समुद्र में छिपा एक प्राचीन भूगर्भीय रहस्य
द ग्रेट ब्लू होल अमेरिका के कैरेबियन इलाके के Belize शहर से लगभग 70 किलोमीटर दूर है । यह लाइट ऑफ रीफ के पास स्थित हैं । लगभग 300 मीटर यानी करीब 984 फीट चौड़ा यह गोलाकार ब्लू होल समुद्र की सतह पर गहरे नीले रंग के विशाल वृत्त की तरह दिखाई देता है। इसकी गहराई लगभग 124 मीटर, यानी 400 फीट है। यह संरचना मूल रूप से हिमयुग के दौरान बनी चूना-पत्थर की गुफा प्रणाली का हिस्सा थी। उस समय समुद्र स्तर आज की तुलना में काफी नीचे था। बाद में समुद्र स्तर बढ़ने पर यह गुफा जलमग्न हो गई और छत धंसने से वर्तमान ब्लू होल का निर्माण हुआ। यह क्षेत्र UNESCO द्वारा विश्व धरोहर घोषित Belize Barrier Reef Reserve System का हिस्सा है। प्रसिद्ध समुद्र विज्ञानी Jacques Cousteau ने 1971 में यहां अभियान चलाकर इसे दुनिया के प्रमुख स्कूबा डाइविंग स्थलों में शामिल किया था। तलहटी में विशाल स्टैलेक्टाइट संरचनाएं आज भी इसके प्राचीन भूगर्भीय इतिहास की गवाही देती हैं। ग्रेट ब्लू होल उस केव सिस्टम का हिस्सा है जो हजारों साल पहले निचले समुद्र तल की वजह से बना था । यहाँ मौजूद खनिजों का अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि यह 15000 साल पुराना है ब्रिटिश स्कूबा डाइवर ओर लेखक नेड मिडल ने इसे "द ग्रेट ब्लु होल" नाम दिया । डिस्कवरी चैनल ने इसे दुनियाभर की सबसे खूबसूरत जगह बताया ।
अपने आसपास सिंक होल बनने पर क्या करें, क्या न करें
अगर किसी इलाके में जमीन पर अचानक दरारें दिखें, सड़क बैठती नजर आए, पेड़ या खंभे झुक जाएं या पानी का बहाव अचानक बदल जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
ऐसी स्थिति में सबसे पहले उस स्थान से दूरी बनाएं और स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। भीड़ इकट्ठा न होने दें। भारी वाहन या मशीनरी को उस स्थान के पास न ले जाएं।
यदि घर के भीतर फर्श में दरार दिखे या जमीन धंसती लगे, तो तुरंत भवन खाली कर दें। गैस और बिजली कनेक्शन बंद कर दें।
किसी भी हालत में खुद गड्ढे के किनारे जाकर देखने या फोटो लेने की कोशिश न करें। कई बार किनारे भी कमजोर होते हैं और अचानक धंस सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और विशेषज्ञ जांच से पहले निर्माण कार्य न शुरू करें।
कई जगह सिंक होल किसी बड़े गड्ढे के बजाय लंबी, संकरी दरारों के रूप में भी बनते देखे जा रहे हैं।
स्रोत : विकी कॉमंस
क्या सिंक होल आने वाली आपदा का संकेत है?
सिंक होल सीधे तौर पर भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी आपदाओं की पूर्व चेतावनी नहीं माने जाते, क्योंकि उनका निर्माण अलग भू-प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है। फिर भी वे एक गहरी भूगर्भीय असंतुलन की ओर संकेत जरूर करते हैं। दरअसल, जमीन के नीचे चट्टानों, मिट्टी, पानी और हवा के बीच एक सूक्ष्म संतुलन बना रहता है। जब यह संतुलन लंबे समय तक धीरे-धीरे बदलता है, तो सतह पर उसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता। लेकिन जैसे ही भूमिगत खाली स्थान एक सीमा पार कर जाते हैं, सतह अचानक धंस सकती है। इस अर्थ में सिंक होल किसी “आने वाली महाविनाशक आपदा” का नहीं, बल्कि हमारे विकास मॉडल में छिपी कमजोरियों का संकेत हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनियोजित शहरीकरण इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। बहुमंजिला इमारतों का भार, भूमिगत मेट्रो और सुरंग निर्माण, सीवेज और पानी की पाइपलाइनों से रिसाव, और भूजल का अनियंत्रित दोहन जैसी चीजें जमीन के नीचे (भूगर्भ) की संरचना को खोखला कर सकते हैं। कई शहरों में वर्षा जल के प्राकृतिक रिसाव मार्गों को कंक्रीट से ढक दिया गया है, जिससे पानी का दबाव अप्रत्याशित दिशाओं में बढ़ता है। लंबे सूखे के बाद अचानक भारी बारिश भी मिट्टी की पकड़ को कमजोर कर देती है। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के पैटर्न में हो रहे उतार-चढ़ाव इस जोखिम को और बढ़ा रहे हैं। इसलिए सिंक होल को केवल एक स्थानीय घटना मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है; वे हमें यह चेतावनी दे रहे हैं कि सतह के नीचे हो रहे बदलावों को समझे बिना टिकाऊ विकास संभव नहीं है।
निष्कर्ष : प्रकृति की चेतावनी को समझने का समय
धरती का धंसना सिर्फ एक भौगोलिक घटना नहीं, बल्कि विकास के मॉडल पर सवाल है। सिंक होल हमें यह याद दिलाते हैं कि जमीन सिर्फ निर्माण का प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रणाली है। अगर हम भूजल को अनियंत्रित निकालेंगे, प्राकृतिक संरचनाओं को नजरअंदाज करेंगे और बिना अध्ययन के कंक्रीट बिछाते जाएंगे, तो धरती का धंसना रुकने वाला नहीं है।
यह समय है कि शहरी नियोजन में भूगर्भीय सर्वे अनिवार्य किए जाएं, भूजल प्रबंधन को सख्ती से लागू किया जाए और निर्माण से पहले करस्ट संवेदनशीलता का आकलन किया जाए। प्रकृति बार-बार संकेत दे रही है। सवाल यह नहीं कि अगला सिंक होल कहां बनेगा, बल्कि यह है कि क्या हम उसके पहले चेतावनी को सुनने और उसके मुताबिक रोकथाम या बचाव के कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
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