उत्‍तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर के पास स्थित पटना पक्षी विहार को हाल ही में  रामसर साइट घोषित कर दिया गया है।

उत्‍तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर के पास स्थित पटना पक्षी विहार को हाल ही में रामसर साइट घोषित कर दिया गया है।

स्रोत : विकी कॉमंस

रामसर स्थल 'पटना पक्षी विहार' : उत्तर प्रदेश में प्रकृति का छोटा सा स्वर्ग

संकटग्रस्त प्रजातियों और प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थल के रूप में राज्य की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती दे रहा है एटा में स्थित 108.86 हेक्टेयर में फैला पटना पक्षी विहार
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शहरों की शोर-शराबे भरी जिंदगी के बीच चिडि़यों की चहचहाहट मन को एक सुकून भरा एहसास देती है। प्राकृतिक परिवेश में पंछियों की अटखेलियों को देख मन जीवनी की उलझनों और तनावों को कुछ पलों के लिए भूल सा जाता है। उत्‍तर प्रदेश के लोगों को अब ऐसे ही सुकून भरे पल बिताने का एक और ठिकाना मिल गया है। यह है पटना पक्षी विहार। नाम सुनकर चौंक गए ना? पर, यह बिहार वाला पटना नहीं, बल्कि यूपी के ऐटा जिले में स्थित पटना पक्षी विहार है।

उत्‍तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर के पास स्थित पटना पक्षी विहार को हाल ही में हुई एशियन वाटरबर्ड सेंसस–26 की पहली गणना में प्रवासी पक्षियों की रिकार्ड मौजूदगी दर्ज किए जाने के बाद रामसर साइट घोषित कर दिया गया है। यह उत्तर प्रदेश का 11वां रामसर स्थल बन गया है। इसके साथ ही उत्‍तर प्रदेश का यह छोटा सा जिला पर्यावरण और पर्यटन के वर्ल्ड मैप पर आ गया है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी। 

एशियन वाटरबर्ड सेंसस–2026 में मिलीं नौ संकटग्रस्त प्रजातियां

हाल ही में हुई एशियन वाटरबर्ड सेंसस–26 की पहली गणना में प्रवासी पक्षियों की रिकार्ड मौजूदगी दर्ज करने वाला पटना पक्षी विहार शनिवार को रामसर साइट घोषित कर दिया गया। पक्षी विशेषज्ञ केपी सिंह के नेतृत्व में हाल ही में पटना पक्षी विहार में पक्षियों की गणना हो चुकी है, जिसमें नार्दन पिनटेल 1270, कामन टील 458, नार्टन शोवलर 432, गेडवाल 369 और कामन कूट 295 पक्षी रहे। क्रेन पेंटेड स्टार्क, कामन पोचार्ड, ग्रेटर स्पाटेड ईगल सहित नौ संकटग्रस्त प्रजातियों को चिंहित किया गया। इसी गणना के आधार पर पटना पक्षी विहार को हाल ही में रामसर साइट घोषित किया गया, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व बढ़ा है। इस गणना की रिपोर्ट 21 जनवरी को पक्षी विशेषज्ञ ने सौंपी थी।

<div class="paragraphs"><p>सर्दियों के मौसम में विदेशी प्रवासी पक्षियों के झुंड&nbsp;बड़ी संख्‍या में इस पक्षी विहार में रहने के‍ लिए आते हैं।&nbsp;</p></div>

सर्दियों के मौसम में विदेशी प्रवासी पक्षियों के झुंड बड़ी संख्‍या में इस पक्षी विहार में रहने के‍ लिए आते हैं। 

स्रोत : विकी कॉमंस

सर्दियों के रहती है ज्‍़यादा चहल-पहल 

एएटा के पटना पक्षी विहार में सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों की विशेष चहल-पहल रहती है। अक्टूबर के अंत से ही पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। पर, मोटेतौर पर नवंबर से मार्च के बीच यहां मध्य एशिया, साइबेरिया और यूरोप के ठंडे इलाकों से हजारों प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इनमें प्रमुख रूप से बार-हेडेड गूज (हिमालय के ऊपर से उड़ान भरने के लिए प्रसिद्ध), नॉर्दर्न पिंटेल, कॉमन टील, ग्रेलेग गूज और रड्डी शेलडक शामिल हैं। इसके अलावा राजहंस, बार-हेडेड गूज, नीलसर, पिनटेल, किंगफिशर, सोवलर, डबचिक, स्नेक बर्ड, कामन टील, ब्रह्मनी डक और कूट जैसे पक्षी यहां की शोभा बढ़ाते हैं। पक्षी प्रजातियों की इतनी बड़ी संख्‍या को देखते हुए ही अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ड लाइफ इंटरनेशनल ने भी इसे महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र घोषित किया है, जो इसकी वैश्विक महत्ता को दर्शाता है।

इस बर्ड सेंचुरी में पहुंचने वाले पक्षी प्रायः सेंट्रल एशियन फ्लाईवे मार्ग का अनुसरण करते हुए हिमालय पार कर गंगा के मैदानी वेटलैंड्स तक पहुंचते हैं। यह पक्षी यहां करीब चार माह तक प्रवास करते हैं। जनवरी माह में हुई एशियन वाटर वर्ड सेंसस-26 के तहत यहां 56 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गए, जिनमें 27 प्रवासी और 29 आवासीय प्रजातियां शामिल हैं। नौ प्रजातियां संकटग्रस्त श्रेणी में पाई गईं। यह स्थल सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे का महत्वपूर्ण पड़ाव है, इसलिए यहां प्रवासी पक्षियों की संख्या अधिक रहती है। हालांकि स्‍थानीय पक्षियों की कई प्रजातियां यहां वर्ष भर डेरा डाले रहती हैं। यहां सबसे मनोहारी दृश्य सुबह और सांझ के समय दिखाई देता है, जब वेटलैंड के जलाशयों में जलचर पक्षी पानी में तैरते और गोते लगाते नजर आते हैं।  यहां के उथले जलाशय, प्रचुर जलीय वनस्पतियां, कीट, घोंघे और सुरक्षित आर्द्रभूमि इन्हें आकर्षित करती हैं। सुबह और सांझ के समय ये जल में भोजन तलाशते, गोते लगाते और समूहों में उड़ान भरते दिखाई देते हैं। बार-हेडेड गूज की खासियत है कि यह लगभग 8 से 9 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है, जबकि नॉर्दर्न पिंटेल लंबी दूरी तय करने वाला उत्कृष्ट प्रवासी माना जाता है। फरवरी के अंत से तापमान बढ़ने पर ये पक्षी पुनः उसी फ्लाईवे मार्ग से अपने प्रजनन स्थलों की ओर लौटने लगते हैं। इस चार माह के प्रवास के दौरान पटना पक्षी विहार शोध और पक्षी अवलोकन के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला बन जाता है। इस नज़ारे को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए वाइल्‍ड लाइफ फोटोग्राफर्स और बर्ड लवर्स यहां मौजूद रहते हैं। साथ ही यह स्थान शोधार्थियों के लिए पक्षियों के व्‍यवहार और गतिविधियों को देखने और समझने का एक उपयुक्‍त ठिकाना बना हुआ है।

आनंद और सुकून देता प्राकृतिक माहौल

एटा के जलेसर कस्‍बे से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित यह पक्षी विहार देश-विदेश के हजारों पक्षियों का मौसमी आशियाना बन चुका है। वर्ष 1991 में स्थापित यह अभयारण्य 108.86 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और देश की चुनिंदा आर्द्र भूमियों में शामिल है। रामसर साइट का दर्जा मिलने से अब इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी। करीब 108.86 हेक्टेयर में फैला यह अभयारण्य संकटग्रस्त प्रजातियों और प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है, जो राज्य की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देता है। यहां का प्राकृतिक वातावरण विदेशी पक्षियों को भी प्रवास के लिए आकर्षित करता है। इसके चलते ही यह पक्षी विहार देश और उत्‍तर प्रदेश के नेचर टूरिज्‍़म के नक्‍शे पर एक नए पर्यटन स्‍थल के रूप में उभर रहा है। हाल के वर्षों में यहां आने वाले सैलानियों की संख्‍या में तेज बढ़ोतरी देखी गई है, क्‍योंकि  यहां पक्षियों का कलरव और उथले पानी में जलक्रीड़ा के नज़ारे लोगों को कुदरत के करीब होने का अहसास कराते हैं और हरियाली से भरा शांत माहौल दौड़भाग भरी जि़ंदगी से हटकर मन को सुकून देता है। यहां खजूर के वृक्षों के बीच पक्षियों का कलरव और झील में इठलाते जलचर परिंदों का नजारा अद्भुत आनंद देता है।  वृक्षों पर उनके छोटे-छोटे घोंसले और झील में अठखेलियां करते परिंदे प्रकृति की जीवंत तस्वीर पेश करते हैं। पक्षियों के बड़े-बड़े झुंड़ों के एक साथ उड़ान भरने का नज़ारा अपने आप में अद्भुत होता है। यही कारण है कि यह स्थल केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार संग पिकनिक मनाने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। यदि आप भी प्रकृति की शांति के साथ ही पक्षियों की अतरंगी दुनिया के रोमांच को देखना-महसूस करना चाहते हैं, तो यह ठिकाना आपकी अगली यात्रा सूची के लिए लिए एक उपयुक्‍त पड़ाव हो सकता है।

<div class="paragraphs"><p>यहां मौजूद उथले पानी की झील और उनमें पनपने वाली छोटी मछलियां व जलीय कीड़े-मकौड़े और वनस्‍पतियां इसे पक्षियों के लिए एक उपुक्‍त आश्रय स्‍थल बनाती हैं।&nbsp;</p></div>

यहां मौजूद उथले पानी की झील और उनमें पनपने वाली छोटी मछलियां व जलीय कीड़े-मकौड़े और वनस्‍पतियां इसे पक्षियों के लिए एक उपुक्‍त आश्रय स्‍थल बनाती हैं। 

स्रोत : विकी कॉमंस

झील में हर साल भरता है नया पानी

पटना पक्षी विहार की झील की सबसे अनोखी विशेषता इसका मौसमी स्वरूप है। यह कोई स्थायी, बारहमासी जलाशय नहीं, बल्कि वर्षा पर निर्भर आर्द्रभूमि है। गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ झील का जलस्तर धीरे-धीरे घटता जाता है और कई हिस्से पूरी तरह सूख जाते हैं। इससे झील की तलहटी सूर्य के संपर्क में आती है, जहां पुरानी जलीय वनस्पतियां विघटित होकर मिट्टी को पोषक तत्वों से समृद्ध करती हैं। मानसून के आगमन पर आसपास के क्षेत्र से वर्षाजल और सतही बहाव झील में भरता है, जिससे यह फिर से लबालब हो उठती है।  पटना पक्षी विहार की रेंजर मनीषा कुकरैती के मुताबिक यहां प्राकृतिक झील है, कृत्रिम झील नहीं है, जो वर्षा के जल पर आधारित है। हर साल नए सिरे से भरने वाला बारिश का पानी अपने साथ ताजा पोषक तत्व, बीज और सूक्ष्म जीव लाता है, जो जलीय पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करते हैं। आमतौर पर वर्षा ऋतु से लेकर अगले वर्ष अप्रैल तक यहां पानी बना रहता है। हर साल इस प्राकृतिक ‘रीसेट’ प्रक्रिया के कारण जल की गुणवत्ता अपेक्षाकृत संतुलित रहती है और मछलियों, कीटों व जलीय पौधों की भरपूर उपलब्धता प्रवासी जलचर पक्षियों को यहां रुकने के लिए आकर्षित करती है।हर साल नया पानी आने से झील का संतुलन बेहतर बना रहता है, जो जलचर पक्षियों को आकर्षित करता है।

इस तरह पहुंचें पटना पक्षी विहार

पटना पक्षी विहार सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है। आगरा से जलेसर होते हुए सीधा मार्ग उपलब्ध है, जो लगभग 90–100 किलोमीटर के दायरे में पड़ता है और निजी वाहन से 2 से 3 घंटे में तय किया जा सकता है। आगरा का पंडित दीनदयाल उपाध्याय हवाई अड्डा निकटतम एयरपोर्ट है। वहां से टैक्सी या बस के जरिए जलेसर और फिर सड़क मार्ग से पक्षी विहार पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग की बात करें तो जलेसर सिटी रेलवे स्टेशन और सिकंदराराऊ स्टेशन नजदीकी विकल्प हैं, जहां आगरा, अलीगढ़ और कासगंज की ओर से यात्री ट्रेनें उपलब्ध रहती हैं। स्टेशन से स्थानीय टैक्सी, ऑटो या साझा जीप मिल जाती हैं। अलीगढ़ और बरेली की दिशा से आने वाले पर्यटक सिकंदराराऊ–पुरदिल नगर मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। जिला मुख्यालय एटा से इसकी दूरी लगभग 50 किलोमीटर है और वहां से भी नियमित बस व निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

सुविधाओं की कमी बनी पर्यटन में बाधा

पटना पक्षी विहार बेशक पक्षियों की गणना में भी अव्वल है और अब रामसर साइट घोषित हो गया है। पर, सुविधाओं के अभाव के चलते यह अबतक राष्‍ट्रीय स्‍तर का पर्यटक स्‍थल नहीं बन पाया है। अच्‍छी सुविधाएं मुहैया न होने के कारण बाहर से आने वाले पर्यटकों की तादात न के बराबर रहती है। यही वजह है कि पटना पक्षी विहार जाने वाले लोगों में स्थानीय लोग ही अधिक होते हैं, क्‍योंकि एटा जनपद के लोग इसे पिकनिक स्पाट के रूप में देखते हैं। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि बैठने के लिए अच्छा सिटिंग प्लान नहीं। पूर्व में सड़क भी ऊबड़-खाबड़ थी, हालांकि अब उसे कुछ हद तक ठीक करा दिया गया है। झील किनारे एक अच्‍छा माहौल बनाया जाना चाहिए, ताकि पर्यटक आकर्षित हों, मगर झील के किनारे पर अकसर झाड़-झंखाड़ और खपतवार वाली वनस्पति उग आती है, जिससे कई बार तो झील को देख पाना तक मुश्किल हो जाता है। गर्मी बढ़ने पर झील में जब पानी कम होता है, तो उसे बढ़ाया भी नहीं जाता। बड़ी झील होने के बावजूद यहां पर्यटकों के लिए वोटिंग की सुविधा उपलब्‍ध नहीं है। अगर वोटिंग की सुविधा हो जाए, तो यहां पर्यटकों को एक बेहतर अनुभव दिया जा सकता है। अन्‍य सुविधाओं की बात छोड़ भी दें तो यहां झील और पर्यावरण के रख-रखाव पर भी पर्याप्‍त ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है। झील का पानी निर्मल नहीं रहता, क्योंकि पानी में जब सड़न उठती है तो दुर्गंध फैलती है। अब पटना पक्षी विहार को 11वें वेटलेंड का दर्जा मिला है तो उम्‍मीद है कि यहां सुविधाओं का भी विस्‍तार किया जाएगा। इसका नाम अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर चर्चा में आने से यहां पर्यटक भी अधिक संख्या में आएंगे।

<div class="paragraphs"><p>एक प्राकृतिक पर्यटन स्‍थल के रूप में पटना पक्षी विहार की लोकप्रियता हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है।&nbsp;</p></div>

एक प्राकृतिक पर्यटन स्‍थल के रूप में पटना पक्षी विहार की लोकप्रियता हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है। 

स्रोत : विकी कॉमंस

पटना पक्षी विहार की 10 खास बातें

  1. यह झील पूरी तरह “डायनेमिक वेटलैंड” है। यानी हर साल इसका आकार, गहराई और जल का फैलाव बदल जाता है, जिससे हर सीजन का दृश्य अलग होता है।

  2. गर्मियों में सूखी तलहटी स्थानीय चरवाहों और किसानों के लिए अस्थायी चरागाह बन जाती है, जिससे मानव और प्रकृति का रोचक सह-अस्तित्व दिखता है।

  3. यहां अक्सर मिक्स्ड-फ्लॉक व्यवहार देखा जाता है, जहां अलग-अलग प्रजातियों के बत्तख और गीज एक साथ भोजन करते और उड़ान भरते हैं।

  4. कोहरे वाली सुबह में पक्षियों की सामूहिक उड़ान झील के ऊपर धुंध में घुलती दिखाई देती है, जो फोटोग्राफरों के लिए दुर्लभ फ्रेम तैयार करती है।

  5. झील में पानी का स्तर घटने पर कीचड़ वाले हिस्सों में वेडर प्रजातियां जैसे स्टिल्ट और सैंडपाइपर अधिक सक्रिय हो जाती हैं।

  6. यहां रात के समय भी पक्षियों की गतिविधियां देखने को मिलती हैं। कुछ जलचर पक्षी चांदनी में भोजन तलाशते व अन्‍य क्रिया-कलाप करते देखे जाते हैं।

  7. यह स्थल बड़े संरक्षित राष्ट्रीय उद्यानों की तुलना में अपेक्षाकृत शांत है, जिससे पक्षियों का व्यवहार कम बाधित होता है।

  8. स्थानीय ग्रामीण प्रवासी यहां आने वाले पक्षियों की प्र‍जातियों और संख्‍या के आधार पर आगामी दिनों में मौसम में होने वाले बदलावों का भी अनुमान लगा लेते हैं। ज्‍यादा संख्‍या में आगमन को अच्छी सर्दी और पर्याप्त जल का सूचक समझा जाता है।

  9. कभी-कभी यहां दुर्लभ या “वाग्रेंट” प्रजातियों की उपस्थिति बर्डर्स के लिए एक सुखद सरप्राइज बन जाती है।

  10. यह स्थान बड़े पर्यटन दबाव से दूर होने के कारण अभी भी अपेक्षाकृत कम प्रचारित लेकिन जैव-विविधता के लिहाज से समृद्ध बर्डिंग स्पॉट माना जाता है।

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