वुलर झील

वुलर झील

फोटो - इमरान रसूल डार 

भारत में रामसर स्थलों की पूरी सूची (2026) - 100 आर्द्रभूमियों की पूरी जानकारी

प्रस्तुत है भारत के 100 रामसर स्थलों की पूरी सूची। इस लेख में प्रत्येक स्थल का नाम, संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और अधिसूचना की तिथि शामिल है। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के संदर्भ में प्रकाशित यह संकलन भारत की आर्द्रभूमियों की भौगोलिक विविधता और उनके जल-सुरक्षा, जैव विविधता तथा आजीविका से जुड़े महत्व को बताता करता है।
Published on
4 min read

रामसर स्थल (Ramsar Site) ऐसे आर्द्रभूमि या दलदली भूमि को कहा जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता दी गई हो। ऐसी आर्द्रभूमि जहां पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों या कीटों आदि की दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हों, जो जैव विविधता बनाए रखने के लिए पौधों और जानवरों की प्रजातियों को आश्रय देता हो और नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षी आते होंं,आम तौर पर उन जगहों को रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया जाता है। ऐसे स्थल स्थानीय मछलियों के जीवन चक्र, भोजन और प्रजनन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।

एशिया में नंबर 1 पर भारत

भारत में कुल 100 रामसर स्थल हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को 5 जून 2026 को रामसर साइट का दर्जा प्राप्‍त हुआ और इसी के साथ भारत रामसर स्‍थलों की संख्‍या के मामले में एशिया में नंबर 1 पर पहुंच गया। विश्‍व की बात करें तो भारत तीसरे स्थान पर आता है। पहले स्थान पर यूके जहां 176 रामसर स्थल हैं और दूसरे पर मैक्सिको (144) आता है।

वर्ष 2026 में चार नाम जुड़े
जनवरी 2026 में भारत की रामसर सूची में तीन नए महत्वपूर्ण आर्द्रस्थल शामिल किए गए। उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले में स्थित पटना पक्षी विहार को रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिली। लगभग 109 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह छोटा लेकिन जैव विविधता से समृद्ध आर्द्रस्थल प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास है। वहीं, गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित छारी-ढांड आर्द्रभूमि को भी रामसर सूची में शामिल किया गया, जिसका क्षेत्रफल लगभग 227 वर्ग किलोमीटर है। दोनों स्थलों को भारत सरकार द्वारा 30 जनवरी 2026 को रामसर कन्वेंशन के तहत नामित किया गया। इनके बाद तीसरा नाम 22 अप्रैल 2026 को अलीगढ़ के शेखा पक्षी विहार का जुड़ा। चौथा नाम जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार सुराह ताल का है, जिसके 5 जून 2026 को रामसर साइट का दर्जा दिया गया।

इसी वैश्विक महत्व को रेखांकित करने के लिए रामसर कन्वेंशन के तहत दुनिया भर की प्रमुख आर्द्रभूमियों को “अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि” के रूप में मान्यता दी जाती है। जिन्हें रामसर स्थल कहा जाता है। जैवविविधता को संरक्षित रखने की दिशा में भारत ने भी बीते एक दशक में बहुत तेजी से कदम बढ़ाए हैं। सरकार, स्थानीय लोगों और तमाम पर्यावरणीय संस्थाओं व संगठनों के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज देश में 999 रामसर स्थल अधिसूचित हैं। भारत की रामसर सूची में अंतिम अपडेट दिसंबर 2025 में हुआ जब छत्तीसगढ़ के कोपरा जलाशय को सूची में शामिल किया गया।

<div class="paragraphs"><p>पिचावरम मैंग्रोव, तमिल नाडु&nbsp;</p></div>

पिचावरम मैंग्रोव, तमिल नाडु 

फोटो - एलेग्‍जेंडर ज़ाइकोव 

आर्द्रभूमियों में दिखाई देती है भारत की जैव विविधता

भारत की भौगोलिक और जलवायु विविधता देश की आर्द्रभूमियों में भी साफ दिखाई देती है। हिमालय के ऊंचे पर्वतों के बीच झीलें हों या तटीय मैंग्रोव। देश की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील हो या खारे–मीठे पानी की (Brackish Water Lagoon) चिलिका झील हो। या फिर सुंदरबन जैसा विशाल डेल्टा क्षेत्र हो। शहरी झीलों से लेकर विशाल नदी डेल्टा तक रामसर स्थलों की सूची भारत की जल-परिस्थितिकी का एक व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है। ये स्थल न केवल जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, मत्स्य पालन, कृषि और पर्यटन से भी सीधे जुड़े हुए हैं।

हालाँकि, आर्द्रभूमियों पर बढ़ता शहरीकरण, प्रदूषण, जल प्रवाह में बदलाव और भूमि उपयोग परिवर्तन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में रामसर मान्यता केवल अंतरराष्ट्रीय दर्जा भर नहीं है, बल्कि बेहतर प्रबंधन, निगरानी और नीति-समन्वय की आवश्यकता की भी याद दिलाती है। और तो और ये वो स्थल हैं जो न केवल प्रकृति के साथ हमारे रिश्‍ते को मजबूत करते हैं, बल्कि विदेशी पक्षियों की भी पहली पसंद हैं।

भारत में राज्यवार रामसर स्थलों की सूची (List of Ramsar Sites in India)

अप्रैल 2026 तक भारत में कुल 99 रामसर स्थल हैं। इनमें सबसे ज्यादा 20 रामसर स्थल तमिलनाडु में हैं। दूसरे स्थान पर 12 रामसर आर्द्रभूमियों के साथ उत्तर प्रदेश है और तीसरे नंबर छह-छह रामसर सथलों के साथ बिहार, ओडिशा और पंजाब हैं। नीचे पूरी सूची प्रस्तुत की गई है, जिसमें प्रत्येक स्थल का नाम, संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और अधिसूचना की तिथि शामिल है।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर यह संकलन यह समझने का अवसर भी देता है कि भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण किस दिशा में बढ़ रहा है और किन क्षेत्रों में अभी भी मजबूत नीतिगत और संस्थागत प्रयासों की जरूरत है।

भारत का 99वा रामसर स्थल 

पृथ्‍वी दिवस के अवसर पर 22 अप्रैल 2022 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य (Shekha Jheel Bird Sanctuary) को आधिकारिक तौर पर भारत का 99वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। 

यह एक ताजे पानी की झील है, जो लगभग 40 हेक्टेयर में फैली हुई है और ऊपरी गंगा नहर से जुड़ी है। यह एक महत्वपूर्ण बर्ड साइट है जो 'सेंट्रल एशियन फ्लाईवे' पर बार-हेडेड गूज़ जैसे प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती है।

भारत के रामसर स्थल देश की जल-सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन की रीढ़ हैं। इन स्थलों की सूची केवल नामों का संकलन नहीं, बल्कि यह उस प्राकृतिक पूंजी का संकेत है, जिस पर भविष्य की जल-योजनाएं और जलवायु अनुकूलन रणनीतियाँ निर्भर करती हैं। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के संदर्भ में यह ज़रूरी है कि रामसर मान्यता को ज़मीनी संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और दीर्घकालिक जल प्रबंधन से जोड़ा जाए।

किसी स्थल को 'रामसर स्थल' कब घोषित किया जाता है?

किसी भी आर्द्रभूमि को रामसर स्थल का दर्जा तब मिलता है, जब वह रामसर कन्वेंशन द्वारा तय किए गए 9 अंतरराष्ट्रीय मानदंडों में से कम से कम एक को पूरा करती हो। मुख्य मानदंड इस प्रकार हैं:

  • वह क्षेत्र अपने आप में अनोखा हो या वहाँ कोई दुर्लभ या संकटग्रस्त प्रजाति पाई जाती हो।

  • वह जैव विविधता को बनाए रखने के लिए पौधों और जानवरों की प्रजातियों को आश्रय देता हो।

  • वहाँ नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षी आते हों।

  • वह स्थानीय मछलियों के जीवन चक्र, भोजन और प्रजनन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत हो।

रामसर स्थल घोषित होने से उस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है, संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता मिलती है और पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

India Water Portal - Hindi
hindi.indiawaterportal.org