नलकूप के लिए बिजली कनेक्शन देने से जुड़ा सुरक्षा किट का नया नियम उत्तर प्रदेश में ट्यूबवेल में करंट उतरने से होने वाली मौतों को कम कर सकता है।
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नलकूप में करंट उतरने से किसानों की मौत पर लगेगी लगाम : यूपी में नया नियम लागू
निजी नलकूपों के बिजली कनेक्शन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव, सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में खेती का सबसे बड़ा आधार सिंचाई है और सिंचाई का सबसे भरोसेमंद साधन निजी नलकूप। राज्य के लाखों किसान अपनी फसलों को समय पर पानी देने के लिए इन्हीं नलकूपों पर निर्भर हैं। लेकिन हर वर्ष नलकूपों के बिजली कनेक्शन, खुले तारों, अस्थायी वायरिंग और अधूरे विद्युत ढांचे के कारण करंट लगने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
कई मामलों में किसानों या बिजली कर्मियों की जान चली जाती है, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से झुलस जाते हैं। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि निजी नलकूपों के बिजली कनेक्शन के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री की किट किसानों को एकमुश्त उपलब्ध कराई जाएगी। ऊर्जा विभाग ने इसके लिए सभी विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को निर्देश जारी कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो न केवल नलकूप कनेक्शन देने की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि अस्थायी और असुरक्षित विद्युत व्यवस्थाओं पर निर्भरता भी कम होगी। इससे करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
करंट के झटके छीन रहे किसानों की जिंदगी
उत्तर प्रदेश में हर वर्ष खेतों में लगे निजी नलकूपों, सिंचाई पंपों और बिजली के तारों से करंट लगने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। अधिकांश हादसे बारिश के मौसम या सिंचाई के दौरान नलकूप में करंट उतरने के कारण होते हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दो-ढाई वर्षों में हुई कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं -
1. अयोध्या (जुलाई 2026) : अयोध्या के तारुन थाना क्षेत्र के माहनमऊ गांव में यह दर्दनाक हादसा हुआ। इस घटना में 42 वर्षीय किसान प्रेम शंकर गौड़ शाम के समय अपने खेत में धान की फसल की सिंचाई की व्यवस्था देखने गए थे। इसी दौरान नलकूप में अचानक उतरे करंट की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
2. कौशाम्बी (जुलाई 2026) : कौशाम्बी जिले के कोखराज थाना क्षेत्र के बिसारा गांव में हुई घटना में 75 वर्षीय बुजुर्ग किसान लल्लू यादव सुबह अपने खेत की ओर जा रहे थे। रास्ते में एक निजी नलकूप में बारिश के कारण सीलन आई हुई थी, जिससे पूरे नलकूप में हाईटेंशन लाइन का करंट उतर गया। इससे अनजान किसान जैसे ही उसके पास से गुजरा, करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
3. मऊ (जुलाई 2026) : मऊ जिले के हलधरपुर थाना क्षेत्र के सहरूल्लाह गांव में नलकूप चालू करते समय हादसा हुआ । 61 वर्षीय किसान हरिनाथ रात के समय अपने खेत में पानी लगाने (सिंचाई करने) गए थे। नलकूप को चालू करते समय वह अचानक उसमें उतरे करंट की चपेट में आ गए और मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़े, अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित किया गया।
4-5. बदायूं (जुलाई 2026 और अगस्त 2025) : 1 जुलाई 2026 को हुई घटना में उघैती थाना क्षेत्र के खिरकवारी भूड़ गांव में नलकूप की झोपड़ी में सो रहे 45 वर्षीय किसान राजपाल की करंट से मौत हो गई। दरअसल, बिजली का एक जर्जर तार टूटकर झोपड़ीमें लगे नलकूप पर गिर गया था, जिससे करंट फैल गया।
बदायूं जिले में ही एक अन्य घटना 2 अगस्त 2025 को भानपुर गांव में हुई। इसमें 42 वर्षीय किसान प्रेमवीर जाटव अपने निजी नलकूप पर काम कर रहे थे। अचानक पैर बिजली के नंगे तारों में उलझने के कारण वह करंट की चपेट में आ गए और मौके पर ही दम तोड़ दिया।
6. गाजीपुर (जून 2026) : बरेसर क्षेत्र के बठना गांव में सुबह के वक्त यह हादसा हुआ ।
60 वर्षीय किसान कुबेर पाल धान की फसल में पानी चलाने के लिए खेत पर गए थे। जैसे ही उन्होंने ट्यूबवेल का स्टार्टर छुआ, नलकूप में उतरे करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और उनकी मौत हो गई।
7. अमरोहा (मई 2026) : अमरोहा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के भैंसरौली गांव की घटना में 40 वर्षीय किसान हरिराज सिंह देर रात अपने नलकूप पर फसलों की सिंचाई करने गए थे। नलकूप चलाने के लिए उन्होंने जैसे ही स्टार्टर को हाथ लगाया, भीषण करंट की वजह से वह बुरी तरह झुलस गए और उनकी मृत्यु हो गई।
8. झांसी (जुलाई 2026) : बरुआसागर थाना क्षेत्र के सरोल गांव में हुई घटना। 35 वर्षीय किसान अजय पाल अपने खेत में मूंगफली की फसल पर दवा का छिड़काव कर रहे थे। पड़ोसियों द्वारा ट्रांसफार्मर से अपने खेत के नलकूप तक ले जाए गए बिजली के तार बेहद नीचे झूल रहे थे। छिड़काव के दौरान अजय का शरीर इन तारों से छू गया, जिससे करंट लगने से उनकी मौत हो गई।
9. संभल (जुलाई 2024) : धान की सिंचाई के लिए दौरान बदरुल्ला गांव में एक किसान ट्यूबवेल का तार लगा रहा था। इसी दौरान बिजली का जर्जर तार टूटकर पानी से भरे खेत में गिर गया, जिससे पूरे खेत में करंट फैल गया और अकेले काम कर रहे किसान की जान चली गई।
10. प्रयागराज (28 जून 2026) : हरदी गांव में ट्यूबवेल से सिंचाई करते समय टूटी बिजली की लाइन की चपेट में आने से पिता और पुत्र की मौत।
कुछ पुराने दर्दनाक हादसे
शामली (1 जुलाई 2015) – खेत के ट्यूबवेल की मरम्मत करते समय किसान की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मौत।
मुजफ्फरनगर (22 सितंबर 2016) – सिंचाई के लिए खेत पर गए किसान के बेटे की ट्यूबवेल के बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत।
शामली (9 जून 2019) – ट्यूबवेल पर पानी पीने गए किसान की लाइव वायर की चपेट में आने से मौत।
बदायूं (20 जनवरी 2024) – सिंचाई के लिए खेत गए दो किसानों की हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मौत; परिजनों ने बिजली निगम की लापरवाही का आरोप लगाया।
ग्रेटर नोएडा (8 जून 2024) – सड़क किनारे ट्यूबवेल से पानी भरते समय खुले लाइव वायर से दादा-पोते की मौत। जांच में ट्यूबवेल के खराब विद्युत सर्किट की बात सामने आई।
ट्यूबवेल को सुरक्षित ढंग से चलाने के लिए स्थापना और कनेक्शन के वक्त सही ढांचा स्थापित करना भी जरूरी है, ताकि करंट आने के हादसों से बचा जा सके।
फोटो : इंडिया वाटर पोर्टल
क्यों होती हैं नलकूपों पर करंट लगने की घटनाएं?
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश निजी नलकूप खेतों के बीच स्थित होते हैं। यहां अकसर बिजली के खंभों से लेकर मोटर तक की पूरी व्यवस्था खुले वातावरण में रहती है। बारिश, नमी, कीचड़ और लगातार उपयोग के कारण विद्युत उपकरण जल्दी खराब हो जाते हैं। यदि कनेक्शन के दौरान मानक सामग्री उपलब्ध न होते या किसान अस्थायी तारों और स्थानीय स्तर पर जुटाए गए उपकरणों से काम चला लेते हैं, तो नलकूप में करंट उतरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
कई बार बिजली कनेक्शन स्वीकृत होने के बाद आवश्यक निर्माण सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती या कर्मचारी इसके लिए किसानों से रिश्वत मांगते हैं। ऐसे में कुछ किसान निजी स्तर पर वायरिंग करवा लेते हैं। कहीं बिना अर्थिंग के मोटर चला दी जाती है, कहीं खुले जोड़ छोड़ दिए जाते हैं और कहीं घटिया क्वालिटी के तार उपयोग में आ जाते हैं, जिनमें शॉर्ट सर्किट हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में मोटर, स्टार्टर या पाइप लाइन तक में करंट उतरने का खतरा पैदा हो जाता है।
बरसात के मौसम में यह जोखिम और बढ़ जाता है, क्योंकि गीली मिट्टी बिजली का संवाहक बन जाती है। इससे खेत में काम कर रहा किसान, पशु या सिंचाई करने वाले किसाना या मजदूर अचानक करंट की चपेट में आ सकते हैं।
अधिकांश दुर्घटनाएं तकनीकी खराबी से अधिक सुरक्षा प्रबंधन की कमी से जुड़ी होती हैं। यदि मानक सामग्री, उचित अर्थिंग, सुरक्षित वायरिंग और समय पर निरीक्षण सुनिश्चित हो जाए तो बड़ी संख्या में हादसों को रोका जा सकता है।
ट्यूबवेल की मोटर काफी हैवीलोड वाली होती है। इसके बावजूद लोग अकसर पैसे बचाने के चक्कर में इसे कनेक्शन देते वक्त घटिया क्वालिटी का सामान लगवा लेते हैं और जुगाड़ वाले काम करवाते हैं। ज्यादा ज्वाइंट्स देना और जोड़ों पर सही इंसुलेशन न देना भी कई बार करंट लगने का कारण बनता है। ऐसे में अगर सरकार कनेक्शन के साथ ही अच्छी क्वालिटी की कनेक्शन किट देती है, तो इससे हादसों में कमी आ सकती है।
मो. दाऊद (इलेक्ट्रिशियन)
नई व्यवस्था में क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के तहत निजी नलकूप के बिजली कनेक्शन के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री की पूरी किट किसानों को कनेक्शन की स्वीकृति के साथ ही एकमुश्त उपलब्ध कराई जाएगी। पहले कई स्थानों पर सामग्री अलग-अलग चरणों में उपलब्ध होने या आपूर्ति में देरी की शिकायतें आती थीं। इससे कनेक्शन प्रक्रिया लंबी हो जाती थी।
इसलिए नए नियम के लागू होने पर अब अपेक्षा की जा रही है कि किट एक साथ मिलने से पूरा निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार तेजी से पूरा होगा। इससे किसान को अलग-अलग सामग्री जुटाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और डिस्कॉम भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार कनेक्शन दे सकेंगी। यह व्यवस्था प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सामग्री की उपलब्धता, वितरण और उपयोग की निगरानी अपेक्षाकृत आसान होगी।
निर्माण किट क्यों है महत्वपूर्ण?
किसी भी बिजली कनेक्शन की सुरक्षा केवल बिजली आने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि कनेक्शन को जोड़ने वाला पूरा ढांचा किस गुणवत्ता का है।
निर्माण किट में सामान्यतः विद्युत लाइन स्थापित करने के लिए आवश्यक मानक सामग्री शामिल होती है। इनमें विभिन्न प्रकार के इंसुलेटेड तार, इंसुलेटर, फिटिंग सामग्री, सपोर्ट उपकरण, सुरक्षा उपकरण और अन्य आवश्यक निर्माण सामग्री शामिल होती है। यदि यह सारी सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप अच्छी गुणवत्ता वाली हों और इसी का उपयोग किया जाए तो ओवरहीटिंग, स्पार्किंग और करंट लीकेज और शॉर्ट सर्किट जैसे हादसों की संभावना कम हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार विद्युत दुर्घटनाओं का बड़ा कारण घटिया या गैर-मानक सामग्री का उपयोग भी होता है। इसलिए मानकीकृत निर्माण किट सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कनेक्शन मिलने में भी आ सकती है तेजी
किसानों की लंबे समय से शिकायत रही है कि नलकूप कनेक्शन की स्वीकृति के बाद भी निर्माण कार्य पूरा होने में काफी समय लग जाता है। कभी सामग्री उपलब्ध नहीं होती, कभी अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय में समय लगता है। एक मुश्त निर्माण किट उपलब्ध होने से यह प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकती है। यदि सामग्री पहले से तैयार रहे और डिस्कॉम समयबद्ध तरीके से निर्माण पूरा करें तो किसान को सिंचाई के मौसम में किट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। समय पर बिजली मिलने का सीधा लाभ खेती की उत्पादकता पर भी पड़ता है क्योंकि धान, गन्ना, सब्जियां और कई अन्य फसलें सिंचाई में देरी सहन नहीं कर पातीं।
बारिश और बाढ़ के दिनों में नलकूप या हैंडपम्प में करंट उतरने की घटनाएं ज्यादा होती है, जिनमें कई बार लोगों को जान भी गंवानी पड़ती है।
फोटो: उमेश कुमार राय
सुरक्षा केवल सामग्री नहीं, सही कनेक्शन भी जरूरी
इस बारे में एक बात और महत्वपूर्ण है कि केवल निर्माण किट उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा। सबसे महत्वपूर्ण है कि पूरी स्थापना यानी कनेक्शन की प्रक्रिया बिजली सुरक्षा मानकों के अनुसार की जाए।
कनेक्शन में यदि अर्थिंग सही नहीं होगी, तारों का जोड़ सुरक्षित नहीं होगा या मोटर पैनल खुले में बिना सुरक्षा के लगाया जाएगा तो दुर्घटना की संभावना बनी रहेगी। इसलिए कनेक्शन जोड़ने का काम कुशल और प्रशिक्षित तकनीशियनों द्वारा ही किया जाना चाहिए और कनेक्शन चालू करने से पहले सुरक्षा निरीक्षण या ट्रायल भी अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
यह भी आवश्यक है कि किसान स्वयं किसी प्रकार का बदलाव विद्युत लाइन में न करें। अतिरिक्त तार जोड़ना, अस्थायी जोड़ बनाना या स्थानीय स्तर पर मरम्मत कराना करंट उतरने के जोखिम को बढ़ा सकता है।
किसानों में सुरक्षा जागरूकता भी उतनी ही जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक किसान वर्षों पुराने तरीके से मोटर संचालित करते हैं। कई स्थानों पर बिना चप्पल के मोटर चालू करना, गीले हाथों से स्टार्टर छूना या बिजली बंद किए बिना मरम्मत करने जैसी लापरवाहियां आज भी आमतौर पर देखा जाती हैं।
यदि नई निर्माण किट के साथ सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण या जागरूकता अभियान भी चलाया जाए, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है। किसानों को यह जानकारी दी जानी चाहिए कि बारिश के दौरान मोटर कैसे चलानी है, खराबी आने पर क्या करना है, अर्थिंग की जांच कैसे करानी है और करंट लगने की स्थिति में प्राथमिक प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए।
बिजली कर्मियों के लिए भी सुरक्षित
करंट की घटनाओं का खतरा केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। बिजली विभाग के लाइनमैन और तकनीकी कर्मचारी भी ग्रामीण क्षेत्रों में मरम्मत और कनेक्शन के दौरान जोखिम उठाते हैं।
यदि निर्माण सामग्री मानकीकृत होगी और पूरी स्थापना एक समान तकनीकी मानकों के अनुसार होगी तो रखरखाव का कार्य भी अधिक सुरक्षित हो सकता है।
इससे बार-बार अस्थायी मरम्मत की आवश्यकता कम होगी और लाइनमैन को भी अनियोजित जोखिमों का सामना कम करना पड़ेगा।
केवल नियम बनाने से नहीं चलेगा काम, लागू भी कराएं
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय पहली नजर में केवल निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने का प्रशासनिक बदलाव लगता है, लेकिन इस निर्णय की सफलता केवल आदेश जारी होने से तय नहीं होगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देना होगा।
अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कागज पर लिया गया यह निर्णय गांव-गांव तक उसी गंभीरता से लागू हो। इसके लिए सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में निर्माण किट उपलब्ध रहें। दूसरे, सामग्री की गुणवत्ता हर जगह समान हो। तीसरे, निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक नए नलकूप कनेक्शन का सुरक्षा ऑडिट भी किया जा सकता है। समय-समय पर अर्थिंग परीक्षण, लीकेज करंट की जांच और सुरक्षा निरीक्षण से भविष्य की दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसके अलावा जिन पुराने नलकूपों में वर्षों पहले कनेक्शन दिए गए थे, उनके लिए भी चरणबद्ध सुरक्षा जांच अभियान चलाया जाना चाहिए क्योंकि दुर्घटनाओं का बड़ा हिस्सा पुराने विद्युत ढांचे में सामने आता है।
सरकार को यह भी समझना होगा कि करंट लगने की घटनाएं केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं होतीं, बल्कि वे खेती, आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डालती हैं। ऐसे में यदि एक नीतिगत बदलाव इन दुर्घटनाओं की संख्या कम करने में सफल होता है तो इसका लाभ लाखों किसानों तक पहुंचेगा।
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