अलनीनो के असर से निपटने के लिए गुजरात को नर्मदा का अतिरिक्त पानी देगा एमपी, बदले में मिलेगी बिजली

इस सप्‍ताह दिल्‍ली में होने वाली मुख्‍यमंत्रियों की बैठक में समझौते पर हस्‍ताक्षर होने की उम्‍मीद, रबी सीजन की बुवाई के लिए हो सकता है जल संकट का समाधान
मध्‍य प्रदेश से निकल कर गुजरात तक बहने वाली नर्मदा नदी पर बना सरदार सरोवर बांध।

मध्‍य प्रदेश से निकल कर गुजरात तक बहने वाली नर्मदा नदी पर बना सरदार सरोवर बांध।

फोटो : विकी कॉमंस

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देश में अलनीनो के साइड इफेक्‍ट सामने आने शुरू हो गए हैं। इस साल देश के कई इलाकों में कम बारिश होने के कारण सिचाई, बिजली बनाने और जलापूर्ति के लिए नदियों में पानी कम पड़ना शुरू हो गया है। इसे देखते हुए गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा नदी के पानी को लेकर बातचीत चल रही है। रबी सीजन में सिंचाई के लिए मध्य प्रदेश अपने बांधों से गुजरात को पानी दे सकता है। इसके बदले में गुजरात एमपी को बिजली देगा। दोनों राज्‍यों के बीच इसे लेकर लगभग सहमति बन गई है। दोनों राज्य के बीच इसी सप्‍ताह समझौता हो जाने की उम्मीद है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ हिस्सों में पानी की कमी को देखते हुए गुजरात सरकार ने नर्मदा परियोजना के लिए अतिरिक्त पानी की मांग करते हुए परियोजना में भागीदार राज्यों को अतिरिक्‍त बिजली देने का प्रस्ताव रखा है। बीते मंगलवार को यह प्रस्ताव गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दिल्ली में नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (आरसीएनसीए) की समीक्षा समिति की बैठक में रखा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की और जिसमें गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्री शामिल हुए । इस बैठक के बाद डॉ. यादव से पटेल ने शनिवार को बात की है। गुजरात और अन्‍य राज्‍यों के मुख्यमंत्रियों के बीच समझौते की शर्तों को लेकर मंगलवार को विस्‍तृत बातचीत होनी है। इसके बाद इसी सप्ताह समझौते पर औपचारिक मुहर लग सकती है। 

करीब दस दिन पहले जब मध्‍य प्रदेश में बिजली की कमी पड़ने पर गुजरात ने सरदार सरोवर बांध से बिजली पैदा करके एमपी को प्रतिदिन 57 मेगॉवाट से लेकर 114 मेगॉवाट अतिरिक्‍त बिजली दी। इससे एमपी में बिजली का संकट टल गया।  इसे देखते हुए मध्‍य प्रदेश ने गुजरात को नर्मदा का ज्‍यादा पानी देने का अनुकूल रुख अपनाया है। किसी भी साल यदि मानसून औसत से कम होता है तो उसे ‘ड्राई ईयर’ माना जाता है। ऐसे में एमपी और गुजरात के बीच अनुबंध है कि पहले नंबर पर पेयजल और दूसरे नंबर पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाए।

एमपी के मालवा में भी पानी की कमी

शासन के सूत्रों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात ने पॉवर जनरेशन शुरू कर दिया है और लगाता एमपी को वह अनुबंध के मुताबिक कुछ बिजली दे रहा है, लिहाजा एमपी भी जल्द ही बांध से सिंचाई के लिए पानी रिलीज करेगा। बाद में उद्योगों को दिया जाए और बिजली उत्पादन किया जाए। एमपी की ओर से दिया जाने वाला नर्मदा का अतिरिक्‍त पानी पानी ओंकारेश्वर से आगे गुजरात के सरदार सरोवर में जाएगा है। हालांकि बातचीत में एमपी यह तर्क रख सकता है कि अलनीनो के कारण गुजरात के साथ-साथ एमपी में भी कई जिलों में कम वर्षा दर्ज की गई है। खासतौर पर मालवा क्षेत्र के 12 जिलों में तो अति कम वर्षा के हालात हैं। लिहाजा एमपी कंजूसी बरतते हुए गुजरात को कुछ अतिरिक्‍त पानी दे सकता है।

गुजरात को रबी फसल के लिए पानी की जरूरत

आगामी रबी फसल सीजन के लिए पानी की कमी दूर करने के लिए गुजरात ने अपने एमपी, राजस्‍थान और महाराष्‍ट्र जैसे अपने पड़ोसी राज्यों से अतिरिक्‍त पानी देने का आग्रह किया है।  यह प्रस्ताव मंगलवार को दिल्ली में नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (आरसीएनसीए) की समीक्षा समिति की बैठक में रखा गया था। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्री शामिल हुए थे। इसी बैठक में गुजरात ने आरसीएनसीए के तीन अन्य भागीदार राज्यों को औपचारिक प्रस्ताव दिया है। इस पर सकारात्‍मक रवैया अपनाते हुए इन राज्यों ने सैद्धांतिक रूप से प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। इससे गुजरात को नर्मदा का कितना अतिरिक्त पानी आवंटित करने का रास्‍ता साफ हो गया है। इसके बदले में गुजरात इन राज्यों को कितनी अतिरिक्‍त बिजली देगा, इसका फैसला इसी सप्‍ताह होने वाली बैठक में कर लिया जाएगा। 

गुजरात को कितना पानी मिलता है? 

गुजरात देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां जल उपलब्धता का बड़ा हिस्सा नदियों और बांधों के जरिए दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाए जाने वाले पानी पर निर्भर है। नर्मदा नदी राज्य के लिए जलापूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है। वर्तमान जल बंटवारा समझौते के तहत गुजरात को नर्मदा नदी के कुल 28 मिलियन एकड़ फीट पानी में से 9 मिलियन एकड़ फीट पानी आवंटित किया गया है। यह मात्रा करीब 11.1 अरब घन मीटर के बराबर है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने 1979 में अपने फैसले में चार राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच नदी के पानी का बंटवारा निर्धारित किया था।

गुजरात को आवंटित पानी का उपयोग सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर परियोजना ( Sardar Sarovar Dam) के जरिए ही गुजरात अपने सूखाग्रस्त इलाकों जैसे सौराष्ट्र और कच्छ तक पानी पहुंचाता है। खासतौर पर सौराष्ट्र और कच्छ जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता सीमित होने और वर्षा की अनिश्चितता के कारण नर्मदा का पानी स्थानीय जल संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा, परियोजना से राज्य के कई शहरों और गांवों को पेयजल भी उपलब्ध कराया जाता है।

अलनीनो से गुजरात में बढ़ा जल संकट

इस साल अलनीनो की स्थिति बनने के कारण प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक हो गया। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ा है और भारत में मानसूनी बारिश प्रभावित हुई है। गुजरात में अलनीनो के कारण वर्षा में कमी आने पर जल संकट गहरा गया है। राज्य के सौराष्ट्र और कच्छ जैसे अर्धशुष्क क्षेत्रों में पहले से ही बारिश की अनिश्चितता और भूजल की सीमित उपलब्धता जल प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है। मानसून कमजोर रहने से बांधों और जलाशयों में पानी का भंडारण कम हुआ है। इसका असर सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक जरूरतों पर पड़ रहा है।

गुजरात की जलापूर्ति में नर्मदा नदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरदार सरोवर परियोजना के जरिए नर्मदा का पानी सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि, कम वर्षा के कारण नदी के जलग्रहण क्षेत्र में पानी की उपलब्धता घटने से बांध में जल भंडारण और जलापूर्ति प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में अलनीनो के दौरान जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जलाशयों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत बढ़ जाती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलनीनो का मतलब गुजरात में हर बार सूखा पड़ना नहीं है। इसका असर मानसून की स्थिति और स्थानीय वर्षा पर निर्भर करता है।

गुजरात में बारिश की कमी और जलाशयों की स्थिति

नोट : वर्षा के आंकड़े 1 जून से 3 और 7 सितंबर 2026 तक की स्थिति के हैं। जलाशयों के आंकड़े 7 सितंबर 2026 के हैं। स्रोत: डाउन टू अर्थ की 7 सितंबर 2026 की रिपोर्ट, जिसमें गुजरात के मौसम विभाग और जल संसाधन विभाग के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।

जलाशयों और सिंचाई व्यवस्था पर बढ़ा दबाव 

गुजरात में अलनीनो के प्रभाव के बीच वर्ष 2026 का मानसून बारिश में कमी और जल संकट की चुनौती लेकर आया। एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के कुछ हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण स्थानीय जलाशयों और सिंचाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। गुजरात सरकार के अनुसार, 3 सितंबर 2026 तक राज्य में औसत मानसूनी बारिश का 94.83 प्रतिशत पानी बरसा था, लेकिन सौराष्ट्र और कच्छ के कई जिलों में स्थिति गंभीर थी। देवभूमि द्वारका में औसत बारिश का केवल 5.47 प्रतिशत, पोरबंदर में 18.12 प्रतिशत और जामनगर में 28.88 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर की शुरुआत में मानसून की विदाई के बाद भी स्थिति में बड़ा सुधार नहीं हुआ। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर तक गुजरात में कुल 810.32 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से लगभग 11 प्रतिशत कम थी। देवभूमि द्वारका में दशक के औसत की तुलना में केवल 16.45 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। कम बारिश का असर स्थानीय जलाशयों पर भी दिखाई दिया। जून 2026 के अंत में सौराष्ट्र के 141 जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का केवल 26.20 प्रतिशत पानी था, जबकि कच्छ के 20 जलाशयों में यह मात्रा 26.30 प्रतिशत थी। इसके मुकाबले सरदार सरोवर बांध में लगभग 64.91 प्रतिशत पानी जमा था।

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