राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) क्या है? कैसे जल जीवन मिशन ने ली इसकी जगह?  

फोटो - सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस, राजस्थान

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) क्या है? कैसे जल जीवन मिशन ने ली इसकी जगह?  

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित, पर्याप्त और टिकाऊ पेयजल उपलब्ध कराना था। इस कार्यक्रम के तहत जल गुणवत्ता सुधार, जल स्रोतों की स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।
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  • राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) को वर्ष 2009 में ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित पूर्व योजनाओं को पुनर्गठित कर लागू किया गया।

  • वर्ष 2019 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम को पुनर्गठित कर जल जीवन मिशन के रूप में शामिल किया।

  • राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित, पर्याप्त और टिकाऊ पेयजल उपलब्ध कराना था।

भारत में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता लंबे समय से ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है। देश के लाखों ग्रामीण परिवार वर्षों तक हैंडपंप, कुएं, तालाब और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर रहे, जिनमें से कई स्रोत या तो पर्याप्त नहीं थे या फिर जल गुणवत्ता की दृष्टि से सुरक्षित नहीं थे। इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2009 में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम National Rural Drinking Water Programme ( NRDWP) शुरू किया।

यह एक केंद्र प्रायोजित योजना थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को सुरक्षित, पर्याप्त और सतत पेयजल उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम का फोकस केवल जल आपूर्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि जल स्रोतों की स्थिरता, जल गुणवत्ता सुधार, समुदाय की भागीदारी और जल संरक्षण पर भी था। 

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम 

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) को वर्ष 2009 में ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित पूर्व योजनाओं को पुनर्गठित कर लागू किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण आबादी को घरेलू उपयोग, खाना पकाने और पेयजल के लिए पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना था। यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में संचालित की जाती थी। 

इस कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष रूप से उन गांवों को प्राथमिकता दी गई जहां पेयजल की उपलब्धता कम थी या जहां फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन, नाइट्रेट और लवणता जैसी जल गुणवत्ता संबंधी समस्याएं मौजूद थीं। 

एनआरडीडब्ल्यूपी की आवश्यकता क्यों पड़ी?

भारत में ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी लंबे समय तक सुरक्षित पेयजल सुविधाओं से वंचित रही। कई राज्यों में भूजल का अत्यधिक दोहन, जल स्रोतों का सूखना, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं ने पेयजल संकट को और गंभीर बना दिया। 

इसके अतिरिक्त अनेक गांवों में जल स्रोत मौसमी थे। जल गुणवत्ता से संबंधित समस्याएं बढ़ रही थीं। महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। जलजनित रोगों का खतरा अधिक था। इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक और टिकाऊ ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके परिणामस्वरूप NRDWP की शुरुआत हुई। 

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के उद्देश्य

  • सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना - ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना।

  • जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करना - भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के माध्यम से जल स्रोतों को टिकाऊ बनाना।

  • जल गुणवत्ता सुधारना - फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन और अन्य प्रदूषकों से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित जल उपलब्ध कराना।

  • सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना - ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों को योजना के संचालन एवं रखरखाव में शामिल करना।

  • दीर्घकालिक जल सुरक्षा - ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी पेयजल सुरक्षा स्थापित करना। 

कार्यक्रम के प्रमुख घटक

  • कवरेज - ऐसे गांवों और बस्तियों को प्राथमिकता देना जहां पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं था।

  • जल गुणवत्ता - जल परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और जल शोधन प्रणालियों का विकास।

  • स्थिरता - जल संरक्षण, जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।

  • संचालन एवं रखरखाव - जलापूर्ति प्रणालियों के नियमित रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना।

  • निगरानी एवं मूल्यांकन - जल गुणवत्ता और जलापूर्ति की नियमित निगरानी के लिए ऑनलाइन और तकनीकी प्रणालियों का उपयोग। 

एनआरडीडब्ल्यूपी की प्रमुख विशेषताएं 

  • विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण - इनके कार्यक्रम में ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।

  • जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान - इसमें फ्लोराइड और आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में विशेष परियोजनाएं चलाई गईं।

  • स्रोत स्थिरता - इसके अंतर्गत केवल पाइपलाइन बिछाने के बजाय जल स्रोतों को मजबूत करने पर भी बल दिया गया।

  • सामुदायिक स्वामित्व - जल योजनाओं को स्थानीय स्तर पर संचालित करने की अवधारणा को बढ़ावा मिला।

  • ग्रामीण विकास में योगदान - राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम ने ग्रामीण क्षेत्रों में कई सकारात्मक परिवर्तन लाए।

  • स्वास्थ्य में सुधार - स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से जलजनित रोगों में कमी आई।

  • महिलाओं को राहत- पानी लाने में लगने वाला समय कम हुआ, जिससे महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा तथा अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिला।

  • सामाजिक विकास - जल उपलब्धता से जीवन स्तर में सुधार हुआ और ग्रामीण विकास को गति मिली।

  • आर्थिक लाभ - जल संकट कम होने से श्रम उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिला।

एनआरडीडब्ल्यूपी से जल जीवन मिशन तक

फोटो - टूंका के ग्रामीण दीता राम द्वारा

वर्ष 2019 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम को पुनर्गठित कर जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के रूप में शामिल किया। इसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार तक कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connection - FHTC) पहुंचाना था। जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया। यह NRDWP का विस्तारित और अधिक परिणामोन्मुख स्वरूप माना जाता है।

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम ने ग्रामीण जल आपूर्ति क्षेत्र में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया। जिसमे लाखों ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की दिशा में प्रगति। जल गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में विशेष योजनाओं का संचालन करना। ग्राम पंचायतों की भागीदारी को बढ़ावा देना। जल संरक्षण और स्रोत स्थिरता पर जागरूकता में वृद्धि करना। भविष्य के जल जीवन मिशन के लिए आधारभूत संरचना तैयार करना शामिल है। 

कार्यक्रम की चुनौतियां

NRDWP ने महत्वपूर्ण प्रगति की, फिर भी कई चुनौतियां सामने आईं है।

  • भूजल का अत्यधिक दोहन - कई राज्यों में जल स्रोतों का तेजी से क्षरण हुआ।

  • जल गुणवत्ता समस्याएं - आर्सेनिक, फ्लोराइड और अन्य प्रदूषकों की समस्या बनी रही।

  • संचालन एवं रखरखाव - कई स्थानों पर जलापूर्ति प्रणालियों के रखरखाव में कठिनाइयां आईं।

  • जलवायु परिवर्तन - अनियमित वर्षा और सूखे ने जल स्रोतों को प्रभावित किया।

  • वित्तीय एवं प्रशासनिक चुनौतियां - कुछ क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।

आज जब भारत जल जीवन मिशन और जल जीवन मिशन 2.0 के माध्यम से ग्रामीण जल सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है, तब NRDWP की भूमिका और भी महत्वपूर्ण दिखाई देती है। यह कार्यक्रम ग्रामीण पेयजल क्षेत्र में एक आधारभूत सुधार आंदोलन के रूप में देखा जाता है, जिसने सुरक्षित पेयजल को विकास के केंद्र में स्थापित किया। 

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित, पर्याप्त और टिकाऊ पेयजल उपलब्ध कराना था। इस कार्यक्रम ने जल गुणवत्ता सुधार, स्रोत स्थिरता, सामुदायिक भागीदारी और ग्रामीण जल सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2019 में इसे जल जीवन मिशन में समाहित कर दिया गया, लेकिन ग्रामीण जल प्रबंधन के क्षेत्र में इसकी विरासत आज भी दिखाई देती है। सुरक्षित पेयजल तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में NRDWP भारत की जल नीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

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