हीटवेव के कारण उत्तर प्रदेश का बांदा जिला कई दिनों से भयंकर गर्मी की मार झेल रहा है। अप्रैल और मई के महीने में यहां अबतक का सबसे अधिक तापमान दर्ज़ किया गया है।
स्रोत : विकी कॉमंस
यूपी के बांदा में क्यों टूट रहा गर्मी का रिकॉर्ड? भट्ठी बना बुंदेलखंड, IMD ने जारी किया 'रेड अलर्ट’
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का इलाका दशकों से अपने गहराते जल संकट के लिए चर्चा में रहा रहा है। अब पर्यावरण से जुड़ी एक और बेहद गंभीर चिंता यहां उभर कर सामने आई है, जिसने यूपी के इस छोटे से ज़िले को दुनिया भर में चर्चित कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार बुधवार (20 मई 2026) को बांदा 48.2 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड तापमान के साथ दुनिया का सबसे गर्म शहर बनकर उभरा। तेज धूप, उमस भरी प्रचंड गर्मी और लू के गर्म थपेड़ों के कारण लोग दिनभर परेशान रहे।
इससे पहले सोमवार को भी 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ बांदा भारत का सबसे गर्म स्थान रहा। साथ ही उसने इस दिन (19 मई) विश्व का सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया। यह पिछले 75 वर्षों में मई का सबसे गर्म दिन भी रहा। इससे पहले 27 अप्रैल को भी ज़िले ने 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ अप्रैल में विश्व का सबसे गर्म दिन यहां देखने को मिला था।
गर्मी के जंजाल में कैसे फंसा बांदा ?
पर्यावरणविद गुंजन मिश्र ने इंडिया वाटर पोर्टल से बातचीत करते हुए कहा कि बांदा ज़िला आजकल अत्यधिक तापमान और हीट वेव को लेकर लगातार सुर्खियों में है। केवल तापमान रिकॉर्ड करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना अधिक आवश्यक है कि आखिर इस बढ़ती गर्मी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और इसके समाधान के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि बांदा में गर्मी का विश्व रिकॉर्ड बनने का पहला कारण इस इलाके में बड़े पैमाने पर की जा रही बालू और पत्थर का अवैध उत्खनन है। बुंदेलखंड के तहत आने वाले बांदा, चित्रकूट, ललितपुर में जबरदस्त माइनिंग हो रही है। यदि खनन की बात करें तो महोबा ज़िले (Mahoba) में बांदा ज़िले (Banda) की तुलना में अधिक खनन होता है, लेकिन वहां मुख्यतः पत्थर का खनन होता है। दूसरी ओर बांदा ज़िले में बड़े पैमाने पर रेत खनन किया जाता है। नदी की रेत केवल निर्माण सामग्री नहीं होती, बल्कि वह जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और स्थानीय तापमान संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जहां बालू की माइनिंग होती वहां तापमान बढ़ जाता है, क्यांकि नदी के बालू की नमी तापमान को कम करती हैं। बालू की माइनिंग होने से पानी का वाष्पीकरण (इवोपरेशन) बहुत बढ़ जाता है। इसी कारण बांदा में बहने वाली केन नदी अब गर्मी में सूख जाती है। पहले यह सालभर बहने वाली सदानीरा नदी हुआ करती थी। अत्यधिक रेत खनन से नदियों की नमी घटती है, भूजल स्तर नीचे जाता है और भूमि तेजी से गर्म होने लगती है। यह बांदा की धरती को “आग की तरह तपाने” वाले प्रमुख कारणों में से एक बन चुका है।
बढ़ती गर्मी का दूसरा बड़ा कारण जंगलों का सिमटना है। पेड़ों के न होने के करण प्राकृतिक टेंपरेचर कंट्रोल का खत्म होता जा रहा है। पेड़ों की कटाई और ‘क्लाइमेट शिफ्ट' के कारण बांदा ज़िले में केवल 2 फीसदी जंगल रह गए हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के हिस्से में बांदा का वन क्षेत्र सबसे कम ज़िलों में माना जाता है। पेड़ और वनस्पति प्राकृतिक एयर-कंडीशनर की तरह कार्य करते हैं। वे सूर्य की ऊष्मा को अवशोषित कर वातावरण को ठंडा रखते हैं। लेकिन जंगलों के कम होने से भूमि सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आ जाती है, जिससे तापमान और बढ़ जाता है।
तीसरा महत्वपूर्ण कारण भूजल स्तर में गिरावट है। जब भूमि में नमी कम हो जाती है तो मिट्टी तेजी से गर्म होती है। बांदा की मिट्टी कई स्थानों पर रेतीली, पथरीली और कम जलधारण क्षमता वाली है, जिससे गर्मी का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। बुंदेलखंड में चार तरह की मिट्टी लाल, काली मिट्टी, बलुई, दोमट। मिट्टी की प्रकृति पर भी वन और मौसम जैसी चीजें निर्भर करती हैं।
चौथा कारण जैवविविधता में कमी, तालाबों और जलाशयों का सूखना, पारंपरिक जल संरचनाओं का नष्ट होना तथा लगातार बढ़ता पर्यावरणीय क्षरण भी बांदा को एक “हॉट स्पॉट” में बदलने में भूमिका निभा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त बांदा-चित्रकूट में प्रचंड गर्मी का पांचवां कारण साल दर साल वर्षा में कमी (रेन फॉल) घटते जाना है।
क्या हो सकते हैं समाधान ?
नियंत्रित और वैज्ञानिक रेत खनन नीति लागू करना।
बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाना।
सूखे तालाबों और जलाशयों को पुनर्जीवित करना।
वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
नदी तंत्र और जैवविविधता संरक्षण करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में हरित पट्टी (Green Belt) का विकास।
भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के लिए संरचनाओं का निर्माण।
स्थानीय स्तर पर पर्यावरण जागरूकता अभियान
आवर्तनशील अर्थशास्त्र या चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economics) के आधार पर खेती
केन व ज़िले की अन्य नादियों का पारिस्थितिकीय अध्ध्यन।
कूड़े कचरे का कुशल प्रबंधन करना।
यदि समय रहते पर्यावरणीय संतुलन को पुनर्स्थापित करने के प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में बांदा और पूरा बुंदेलखंड क्षेत्र और अधिक भीषण गर्मी, जल संकट तथा पारिस्थितिक असंतुलन का सामना कर सकता है।
पड़ोसी ज़िला चित्रकूट भी गर्मी से बेहाल
बांदा के पड़ोसी ज़िले चित्रकूट में भी भयंकर गर्मी से लोगों का बुरा हाल है। स्थानीय पत्रकार (रिपोर्टर) ज़िया उल हक़ ने इंडिया वाटर पोर्टल को बताया कि चित्रकूट में भी गर्मी का हाल कमोबेश उसके पड़ोसी ज़िले बांदा जैसा ही है। इसकी वजह दोनों की भौगोलिक स्थिति एक जैसी होना है। यहां भी वहीं चट्टानी पहाडि़यां हैं, जो बांदा में मौज़ूद हैं। बांदा की तरह चित्रकूट में भी जंगलों की ताबड़तोड़ कटाई से पहाड़ नंगे हो चले हैं। जिससे तेज़ धूप में पत्थरों की गर्मी से दिन में तापमान काफी अधिक हो जाता है। प्रचंड गर्मी और लू के थपेड़ों (हीटवेव) के कारण इन दिनों दोपहर के वक्त तो बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह बांदा में केन नदी से बड़े पैमाने पर बालू का उत्खनन करके नदी को पानी देने वाले भूजल स्रोतों (एक्वीफर्स) को सुखा दिया गया है। वही हाल चित्रकूट में बहने वाली पयस्विनी (मंदाकिनी) नदी का है, जिसे स्थानीय लोग पयसवनी नदी बोलते हैं। पयस्विनी नदी से भी भारी मात्रा में बालू (मोरम) का उत्खनन बड़े-बड़े एस्केवेटर्स और पोकलैंड मशीनों के ज़रिये किया जा रहा है। इसे ड़परों और ट्रकों में भर कर यूपी और एमपी के कई ज़िलों में ऊंची कीमतों पर बेचा जाता है। अवैध बालू उत्खनन में मोटी कमाई के कारण यहां बालू माफिया का दबदबा है। प्रशासनिक स्तर पर भी उनकी पूरी साठगांठ के कारण ज़िले से बालू की तस्करी बेरोकटोक जारी है। इसकी कीमत पर्यावरण को ज़िले में बढ़ते जल संकट और साल दर साल प्रचंड होती जा रही गर्मी के रूप में चुकानी पड़ रही है। इसके चलते चित्रकूट का तापमान भी बीते एक हफ्ते से 46-47 डिग्री सेल्सियस के दायरे में चल रहा है।
तापमान के नए रिकॉर्ड ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता
भूविज्ञानियों के मुताबिक कर्क रेखा के करीब स्थित होने के कारण भी बांदा में भीषण गर्मी पड़ती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार बांदा में बुधवार दोपहर को रिकॉर्ड 48.2 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड तापमान दर्ज़ किया गया। यहां अब तक का सबसे अधिक तापमान 10 जून, 2019 को 49.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज़ किया गया था। शहरी इलाकों में इस समय तापमान 47 और 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। यह महज़ एक मौसमी घटना नहीं है। इसके पीछे कई पर्यावरणीय कारण और जलवायु परिवर्तन का हाथ है। यहां के बंजर पथरीली ज़मीन से लुप्त होती हरियाली और लगातार बड़े पैमाने पर किया जा रहा रेत खनन पयस्विनी नदी को तेजी से सुखा रहा है। इस सबके चलते बांदा तेजी से एक मानव निर्मित हीट आईलैंड में बदल रहा है। यही वजह है कि 1951 में IMD द्वारा ज़िले के लिए रिकॉर्ड रखना शुरू करने के बाद से इस साल 75 वर्षों में अप्रैल और मई में यहां सबसे अधिक तापमान दर्ज़ किया गया है।
थार रेगिस्तान की सूखी हवाओं का भी असर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यूपी में तापमान में तेजी से आई इस बढ़ोतरी की वजह थार रेगिस्तान से चलने वाली शुष्क और कठोर पश्चिमी हवाएं हैं।
साफ आसमान और लगातार पड़ती सूरज की सीधी रोशनी की वजह से यूपी के दक्षिणी ज़िलों, विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र में अधिक गंभीर है, जहां पथरीली जमीन दिन के दौरान तेजी से गर्म हो जाती है। इससे यह इलाका लंबे समय तक गर्म रहता है। बुंदेलखंड क्षेत्र की कठोर और पथरीली जमीन तेज़ी से गर्मी सोख लेती है और धीरे-धीरे छोड़ती है। इससे दिन की कड़ी धूप में बांदा का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है और रात में भी गर्मी और उमस बनी रहती है।
मौसम में अस्थायी बदलाव लाकर वातावरण को ठंडा करने वाले पश्चिमी विक्षोभ का बुंदेलखंड पर मामूली असर ही पड़ता है। इससे बांदा जैसे ज़िले पर्याप्त रूप से ठंडे नहीं हो पाते। ऐसे में बांदा भीषण गर्मी की चपेट में आ गया और इसका तापमान आसपास के अन्य ज़िलों की तुलना में काफी तेजी से बढ़ा है।
दुनिया के टॉप 100 गर्म शहरों में 40 यूपी के
भीषण गर्मी की चपेट में आए उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। बांदा जिला लगातार चौथे दिन दुनिया का सबसे गर्म शहर बना हुआ है, जहां पारा 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हालत यह है कि दुनिया के टॉप 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में अकेले उत्तर प्रदेश के 40 शहर शामिल हैं। प्रयागराज, हमीरपुर, झांसी और आगरा समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। तेज लू और तपती हवाओं ने लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है, जबकि अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीज भी बढ़ने लगे हैं।
यूपी के 11 ज़िलों में लू का ‘रेड अलर्ट'
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में हीटवेव यानी लू का रेड अलर्ट जारी किया है। आज और कल यानी गुरुवार और शुक्रवार को 11 ज़िलों में लू को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन ज़िलों में 25 मई तक तपिश भरी गर्मी और लू से राहत के आसार नहीं हैं। इनमें निम्नलिखित ज़िले शामिल हैं-
बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, मिर्जापुर, भदोही, कानपुर देहात, कानपुर नगर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, इटावा, औरेया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर व आसपास के क्षेत्र।
इस सप्ताह उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक तापमान वाले ज़िले इस प्रकार रहे -
सेहत और स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखने लगा असर
रिकॉर्ड गर्मी का और हीटवेव का सीधा असर लोगों की सेहत और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। यूपी के लू प्रभावित ज़िलों के सरकारी और निजी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त, चक्कर और बेहोशी के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसे देखते हुए डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग के मुताबिक तापमान में अभी और भी बढोत्तरी होगी। ऐसे में लोगों को सीधी धूप व लू से बचना चाहिये। इसके लिए दोपहर में घर से बाहर न निकलें। यदि मजबूरी में निकलना पड़े, तो शरीर पूरी तरह से ढक निकलें। साथ ही निम्नलिखित उपायों को अपनाएं -
धूप में निकलने से बचें, खाली पेट घर से बाहर न निकलें।
खाने में स्वच्छता का ध्यान रखें, मसालेदार भोजन न करें।
तरल पदार्थों का ज्यादा सेवन करें, एक बार में अधिक खाने से परहेज करें।
तला भूना व मसालेदार फास्ड फूड से परहेज करें।
आरामदायक कपड़े पहनें, चेहरे व सिर को ढक कर ही बाहर निकले।
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