रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगवाते वक्त लोग पैसा बचाने के चक्कर में तमाम गलतियां कर रहे है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगवाते वक्त लोग पैसा बचाने के चक्कर में तमाम गलतियां कर रहे है।

फ़ोटो - विकिकॉमंस 

रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाते वक्त गलतियां कर बैठते हैं लोग, जानिए सही तरीका

बढ़ते तापमान के बीच पानी को बचाने का एक अच्‍छा उपाय वर्षा जल संचयन है। इसे लोग अपना भी रहे है। लेकिन ऐसा देखा गया है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगवाते वक्त लोग पैसा बचाने के चक्कर में तमाम गलतियां कर रहे है जिसकी वजह से जमीन के नीचे मौजूद एक्विफर बर्बाद हो रहे है। लेख में जानिए वर्षा जल संचयन का सही तरीका।
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देश में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट मुख्यतः दो उद्देश्यों के लिए लगाए जाते है। जिसमें पहला छत से एकत्रित हुए वर्षा जल को फिल्टर करने के बाद भूमिगत टंकी में संग्रहित करके उसे घरेलू कार्यों में इस्तेमाल करना है। और, दूसरा उद्देश्य ग्राउंड वाटर यानी भूजल को रिचार्ज करना होता है। घरेलू कार्यों के लिए टंकी में पानी एकत्र कर उसे फिर से इस्तेमाल में लाना (रीयूज़) एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प है। लेकिन भूजल को रिचार्ज करने में आपको तमाम सावधानियां बरतनी होती हैं। 

रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाते वक्त आपने अगर ज़रा भी गलती की तो आपके साथ-साथ आपके परिवार और आस-पास रहने वाले लोगों को भी उसका खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि छोटी सी गलती जमीन के नीचे एक्विफर यानी जलभृत को नुकसान पहुंचा सकती है।

भारत का भूजल संकट
भारत में दुनिया की कुल आबादी के 17 फ़ीसद लोग रहते हैं, लेकिन उसके पास वैश्विक जल संसाधनों का मात्र 4 फ़ीसद हिस्सा ही है। यह सबसे बड़ा भूजल उपभोक्ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2 करोड़ से अधिक पंप हैं, जो 1980 के दशक के 60 लाख पंपों की तुलना में कई गुना अधिक हैं। ये पंप प्रतिवर्ष लगभग 250 अरब घन मीटर भूजल खींचते है, जो वैश्विक कुल भूजल दोहन का लगभग एक पांचवां भाग है।

कैसे किया जाता है ग्राउंड वाटर रिचार्ज?

जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार की National Water Mission के अनुसार ग्राउंड वाटर रिचार्ज के कुछ तरीके बताये गए है। देश में अलग अलग स्थानों पर इन तरीकों का उपयोग किया भी जा रहा है। वे कुछ प्रकार हैं- 

  • रिचार्ज शाफ़्ट (Recharge Shaft )- छतीसगढ़ के राजनंदगांव में यह तकनीक उपयोग में लायी जा रही है। इसमें यह एक ऊर्ध्वाधर संरचना होती है जो वर्षा जल को सीधे गहरी मिट्टी की परतों में पहुंचाती है। यह जमीन की अभेद्य यानी की जिसमें प्रवेश न होता हो उन परतों को बायपास करके पानी को तेजी से एक्वीफर तक पहुंचाती है, जिससे भूजल स्तर जल्दी और प्रभावी रूप से बढ़ता है। 

  • बोरवेल रिचार्ज (Borewell Recharge) - तेलंगाना के मंचेरियल में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, इसके अनुसार इसमें छत का वर्षा जल एकत्र करके रेत, बजरी और चारकोल से फिल्टर करते हुए साफ किया जाता है। फिर यह शुद्ध पानी पाइप के जरिए सीधे बोरवेल में डाला जाता है, जहां से यह गहरे एक्वीफर में रिसकर भूजल स्तर और बोरवेल की क्षमता दोनों बढ़ाता है।

  • रिचार्ज पिट (Recharge Pit ) - मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में यह तकनीक उपयोग में लायी जाती है। इसके अनुसार यह तकनीक पूरी तरह वर्षा जल संचयन की एक प्रक्रिया है, जिसमें एकत्रित पानी, रेत, बजरी और कंकड़ की परतो से छनते हुए मिटटी में उतरता है। जो जमीन में एक्वीफर को भरता है, भूजल स्तर को बढ़ाता है और सतही जल के बहाव को भी कम करता है।

  • वेल रिचार्ज (Well Recharge ) - गुजरात राज्य के नवसारी में वेल रिचार्ज तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक के अंतर्गत वर्ष जल को फ़िल्टर करके सीधे कुओ में डाला जाता है। जिसके बाद कुओ के आस पास की मिटटी से यह पानी रिसता है और एक्वीफर को पुनर्भरित करता है। जिससे आस पास जल स्तर बढ़ता है ।

कैसे कार्य करता है वर्षा जल संचयन संयंत्र? 

वर्षा जल संचयन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मानसून के मौसम में बरसने वाले जल को व्यवस्थित रूप से संग्रहीत किया जाता है ताकि जल संकट के समय इस संचित जल का समुचित उपयोग किया जा सके।

इसी एकत्रित वर्षा जल को तीन प्रमुख तरीकों से उपयोग में लाया जा सकता है, जिसमें वर्षा जल संग्रहित करके, विभिन्न दैनिक कार्यों में प्रयोग करके अथवा सीधे भूजल रिचार्ज के लिए। आज जब भूजल स्तर निरंतर घटता जा रहा है और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव बढ़ते जा रहे है, तब वर्षा जल संग्रहण इन चुनौतियों से निपटने का एक सरल किंतु अत्यंत प्रभावी उपाय बनकर उभरा है।

वर्षा जल के संचयन से न केवल स्थानीय जल भंडारों की पूर्ति होती है, बल्कि शहरी बाढ़ की विकराल समस्या भी कम होती है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जल-संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में यह प्रणाली जल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होती है और इस प्रकार यह एक टिकाऊ, पर्यावरण-मित्र समाधान है।

भूजल के रिचार्ज में क्या गलतियां कर रहे हैं लोग?

भारत में कई शहरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट घरों व रिहाइशी अपार्टमेंट में अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन तमाम लोग पैसा बचाने के लिए आधा-अधूरा काम करवा कर इतिश्री कर लेते हैं। सच पूछिए तो ये लोग भारी गलतियां कर बैठते है जो इस प्रकार हैं-

  • अपनी क्षेत्रीय वर्षा के पैटर्न और इलाके की ढलान को नजर अंदाज करना 

  • पाइपिंग और ड्रेनेज का सही तरीके से इंस्टॉलेशन न करना 

  • स्टोरेज टैंक को सुरक्षित तरीके से बंद न करना 

  • इकट्ठा किए गए पानी के pH स्तर की नियमित जांच न करना 

  • टैंक में स्टोर करने से पहले पानी को 'प्री-फिल्टर' न करना 

  • रेज टैंक को बहुत अधिक या बहुत कम भरना 

भूजल की गुणवत्ता गिरने पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता 

लखनऊ के वरिष्ठ भूजल विशेषज्ञ रवींद्र स्वरूप सिन्हा ने वाटर एड इंडिया के साथ मिलकर State of Groundwater in Uttar Pradesh विषयक एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में भूजल की गिरती गुणवत्ता की ओर ध्यान आकर्षित करने के प्रयास किए गए है। 

एक्विफर रिचार्ज केवल मात्रा का नहीं, गुणवत्ता का सवाल है। यदि आप खराब गुणवत्ता वाले पानी को पुनः भर रहे है, तो आप समस्या का समाधान नहीं कर रहे है , आप प्रदूषण को और भी गहराई तक धकेल रहे है।

रवींद्र स्वरूप सिन्हा, पूर्व में वरिष्ठ भूजल सलाहकार

उनके अनुसार, कृत्रिम भूजल पुनर्भरण को लेकर बहुत शोर है, लेकिन कोई ठोस वैज्ञानिक अध्ययन नहीं है जो एक्वीफर्स पर इसके वास्तविक प्रभाव को प्रमाणित कर सके। परियोजना से पहले का अध्ययन और कम से कम पांच वर्षों तक का आवधिक प्रभाव आकलन, जो होना चाहिए वह कार्यान्वयन एजेंसियां और भूजल संगठन सामान्यतः करते ही नहीं।

वे कहते है की हम एक्वीफर्स से वास्तव में कितना जल निकाल रहे है और कृत्रिम पुनर्भरण से कितना जल वापस जा रहा है, यह कोई माप ही नहीं रहा। देश में न तो भूजल दोहन मापने की कोई वैज्ञानिक व्यवस्था है, न यह जानने का कोई तंत्र कि पुनर्भरण कितनी गहराई तक हो रहा है और हो भी रहा है या नहीं। ऐसे में निष्कर्षण और पुनर्भरण के बीच संतुलन का दावा करना भूजल विज्ञान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

आगे वे कहते है की पिछले 25 वर्षों के मेरे व्यक्तिगत अनुभव में कृत्रिम पुनर्भरण शब्द हर जगह चर्चा में है लेकिन एक्वीफर्स की अवधारणा और उनकी जटिल भूवैज्ञानिक संरचना को समझे बिना। जिस अवैज्ञानिक तरीके से देशभर में पुनर्भरण के काम हो रहे है, वे एक्वीफर्स को विशेषकर जल गुणवत्ता की दृष्टि से नुकसान पहुंचाएंगे।

उनके अनुसार भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के नाम पर चल रही अवैज्ञानिक प्रथाओं को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। एक्वीफर्स की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है अन्यथा हमारी नदियों की जो दुर्दशा हुई है, वही हश्र एक्वीफर्स का भी होगा।

“रिचार्ज की खुली छूट अगर जारी रही, तो एक्वीफर्स भी सुरक्षित नहीं बचेंगे।"

रवींद्र स्वरूप सिन्हा, पूर्व में वरिष्ठ भूजल सलाहकार

क्या होता है जब छत की गंदगी जमीन के नीचे जाती है?

भूजल एवं जल प्रबंधन क्षेत्र में सक्रिय विशेषज्ञ शिप्रा श्रीवास्तव कहती है, अधिकांश पुनर्भरण संरचनाएं उचित निस्पंदन के बिना ही बनाई जाती है, जो खतरनाक है। इससे दूषित पानी सीधे जल भंडार में चला जाता है। इस वजह से ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट का स्तर बढ़ जाता है। बोरवेल के पानी की गुणवत्ता धीरे-धीरे खराब हो जाती है। और यह नुकसान लगभग अपरिवर्तनीय हो जाता है। सिर्फ पानी का पुनर्भरण ही नहीं, बल्कि स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ पानी का पुनर्भरण करना चाहिए।

घरों व इमारतों की छतों पर वर्षा जल एकत्र होने से पहले उस पर महीनों तक धूप, धूल, पक्षियों का मल, कीटनाशकों का छिड़काव और कूड़ा-करकट फेंका जाता है और उस पर किसी का ध्‍यान नहीं जाता। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा होने के बावजूद छतों की नियमित सफाई नहीं होती। और जैसे ही पहली बारिश होती है, यह सारी गंदगी पानी के साथ बह कर नीचे आती है।

छत से एकत्रित पानी के साथ शैवाल, वायु प्रदूषण के कण,पक्षियों का मल, पत्तियां, रेत और धूल भी आती है। यदि इस प्रारंभिक प्रवाह को सीधे रिचार्ज पिट या बोरवेल में भेज दिया जाए, तो भूजल दूषित हो सकता है।

यहीं पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और गलत सही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बीच फर्क समझ में आता है। दुर्भाग्यवश कई परियोजनाओं में उचित फिल्ट्रेशन के बिना ही रिचार्ज संरचनाएं बना दी जाती है, जो पूरी प्रक्रिया को ही निरर्थक बना देती है।

RWH के गलत इंस्टॉलेशन के परिणाम- सिर्फ बेकार नहीं, खतरनाक भी

अत्यधिक भूजल दोहन से हाइड्रोलिक ग्रेडियंट बदल जाता है। एक्विफर के प्रदूषक नाइट्रेट, कीटनाशक ऊर्ध्वाधर दिशा में गहरे एक्विफर में भी उतर सकते है, जिससे पहले से साफ गहरे जल स्रोत भी दूषित हो जाते है। CGWB की Annual Groundwater Quality Report 2024 इस खतरे की पुष्टि करती है की देश के 20 प्रतिशत भूजल नमूनों में नाइट्रेट की मात्रा WHO और BIS की सुरक्षित सीमा 45 mg/L से अधिक पाई गई। 9.04 प्रतिशत नमूनों में फ्लोराइड और 3.55 प्रतिशत में आर्सेनिक प्रदूषण भी मिला।

गलत इंस्टॉलेशन एक गंभीर खतरा

जब रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट को तकनीकी मानकों के बिना लगाया जाता है, तो यह फायदे के बजाय भारी नुकसान पहुंचाता है-

  • छत की गंदगी - छत पर पक्षियों की बीट, इंसानी गतिविधियाँ, धूल, और सड़ा हुआ कचरा होता है। अगर पहली बारिश का पानी बाहर निकालने का सिस्टम और उचित फिल्टर नहीं है, तो यह सारी गंदगी सीधे पाइप के जरिए जमीन के अंदर चली जाती है।

  • भूजल प्रदूषण - बिना फिल्टर हुआ दूषित पानी जब ग्राउंड वाटर में मिलता है, तो वह पूरे क्षेत्र के साफ पानी के भंडार को जहरीला बना देता है। इसे रिवर्स पॉल्यूशन' कहा जाता है, जहां हम रिचार्ज के नाम पर भूजल को प्रदूषित कर रहे है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग में पानी के फिल्टर की सही प्रक्रिया क्या है? 

वर्षा जल संचयन प्रणाली को वैज्ञानिक तरीके से इंस्टॉल किया जाना चाहिए। RWH-रिचार्ज सिस्टम इस क्रम में काम करता है-

  • Catchment (छत)- छत का वह क्षेत्र जहाँ से वर्षा जल एकत्रित होता है। प्रत्येक वर्ग मीटर छत क्षेत्र से 1 cm वर्षा में लगभग 0.008 घन मीटर वर्षा जल प्राप्त होता है।

  • Gutter/Downpipe - छत का पानी गटर और डाउन पाइप से नीचे आता है। यहां पहली बड़ी गलती होती है पाइप सीधे नाले से जुड़े होते हैं, फिल्टर से नहीं।

  • First Flush Device - फर्स्ट-फ्लश डिवाइस प्रारंभिक वर्षा जल को जिसमें छत की गंदगी, धूल और प्रारंभिक प्रदूषक होते है, सीधे रिचार्ज सिस्टम में जाने से रोकता है। यह उपकरण हर सिस्टम में होना चाहिए। लेकिन लागत बचाने के चक्कर में इसे सबसे पहले हटाया जाता है।

  • Multi-layer Filter - पहले फिल्टर 10 mm जाली का और उसके तुरंत बाद 1 mm या उससे छोटे छिद्र वाला लगाया जाना चाहिए। कंकड़, बालू और चारकोल की परतें क्रमशः बड़े कण, बारीक गाद और जैव प्रदूषक को छानती है।

  • Silt Trap/Chamber - फिल्टर से पहले एक अलग गाद-कक्ष बनाना जरूरी है जो भारी कणों को नीचे बैठा ले। रिचार्ज पिट समय के साथ गाद और मलबे से भर जाती है, जिससे भूजल पुनर्भरण क्षमता घटती है।

  • Recharge Pit/Borewell- रिचार्ज पिट, ट्रेंच या रिचार्ज वेल ये विशेष रूप से डिजाइन की गई संरचनाएं है जो सतही जल को भूमिगत एक्विफर तक पहुंचाती है।

यह पूरी प्रक्रिया तभी काम करती है जब हर चरण पूरा और सही तरीके से लगाया गया हो।

क्या करना चाहिए?

  • RWH सिस्टम लगवाते समय हमेशा फर्स्ट-फ्लश डिवाइस और बहु-स्तरीय फिल्टर अनिवार्य करें। CGWA के दिशानिर्देशों में यह पहले से मौजूद है, इसे लागू करना होगा।

  • केवल भूजल पुनर्भरण तक सीमित न रहें। घरेलू गैर-पेयजल उपयोगों बागवानी, कार धोना, शौचालय के लिए भंडारण टैंक भी लगाएं। इससे पीने के पानी की 40 प्रतिशत तक बचत हो सकती है।

  • बोरवेल में सीधे पानी भेजने से पहले बैक्टीरियल संदूषण, pH स्तर और रासायनिक प्रदूषकों की नियमित जाँच आवश्यक है।

  • भूजल रिचार्ज के लिए हमेशा उपचारित जल का उपयोग करें। कच्चे सतही बहाव को बिना फिल्टर किए एक्विफर में नहीं भेजना चाहिए।

  • हाईड्रोलॉस्टि या हाइड्रो-जियोलॉजिस्‍ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि ये वो हैं जो आपके घर के नीचे मौजूद एक्विफर की जरूरतों को गहराई से समझते है। 

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