भूजल

भारत की कृषि व्यवस्था के केंद्र में स्थित हरियाणा वह जगह है, जहाँ सरकारी सहायता का सामना ज़मीन, पानी और खेती के लंबे और उतार-चढ़ाव भरे इतिहास से होता है।
अनुपम मिश्र तर्क देते हैं कि राजस्थान का जल-संकट वास्तव में प्रकृति की असफलता का संकट नहीं है बल्कि यह याददाश्त का संकट है।
छत्‍तीसगढ़ की इस्‍पात नगरी भिलाई में औद्योगिक कारखानों के कचरे और रासायनिक प्रदूषण से ज़हरीला हो रहा है जलस्रोतों का पानी।
त्रिपुरा में बारिश के पानी को सोख्‍ता गड्ढे के ज़रिये ज़मीन में पहुंचा कर भूजल को रीचार्ज करने की कोशिश।
बिहार में गंगा के मध्य मैदानी इलाके में भूजल में मैंगनीज़ का स्तर बढ़ा हुआ है, जिसे एक अध्ययन ने कैंसर के बढ़ते मामलों से जोड़ा है।
पंजाब के किसानों ने सिंचाई के लिए वैकल्पिक गीला-सूखा (Alternate Wetting and Drying) यानी एडब्लूडी विधि अपनाना शुरू कर दिया है।
बेंगलुरू वासियों को ट्रैफिक जाम की समस्‍या से निजात दिलाने के लिए कर्नाटक सरकार ने हेब्‍बल-सिल्‍क बोर्ड सुरंग सड़क परियोजना को मंज़ूरी दी है, जिसे लेकर पर्यावरण संबंधी चिंताएं जताई जा रही हैं।
कश्मीर में पहाड़ियों के किनारे बसे छोटे-छोटे गांव पानी के लिए प्राकृतिक चश्मों पर निर्भर हैं, जिनमें से अधिकतर तेज़ी से सूख रहे हैं।
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