उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले का बड़ा तालाब अब संरक्षित वेटलैंड का दर्ज़ा प्राप्त कर चुका है।
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चित्रकूट के दो तालाबों को मिला वेटलैंड दर्ज़ा, विदेशी प्रवासी पक्षियों को मिलेगा नया सुरक्षित आवास
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के दो तालाबों को वेटलैंड यानी आर्द्रभूमि का दर्ज़ा दिया गया है। प्रदेश सरकार ने पहाड़ी ब्लॉक के अशोह गांव स्थित सिंघानिया तालाब और बछरन ग्राम पंचायत के बड़ा तालाब को राज्य संरक्षित वेटलैंड (आद्रभूमि) घोषित कर अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही यह दोनों जलाशय अब पर्यावरणीय दृष्टि से संरक्षित धरोहर बन गए हैं।
जिले में पहली बार किसी जलाशय को कानूनी संरक्षण मिला है। इससे न केवल जैव विविधता संरक्षण को मजबूती मिलेगी बल्कि भूजल संरक्षण, प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को भी लाभ मिलेगा।
वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम-2017 के तहत जारी अधिसूचना के बाद दोनों तालाबों के 50 मीटर दायरे में अतिक्रमण, खनन, भूमि उपयोग परिवर्तन, कचरा व सीवेज डालने जैसी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।
अवैध ढंग से मछलियां पकड़ने और भूजल दोहन पर भी रोक लगेगी। ने बताया कि इन जलाशयों में सर्दियों के दौरान साइबेरिया, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और तिब्बत समेत कई देशों से प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। यहां साइबेरियन क्रेन, पेलिकन, सुरखाब, बार-हेडेड गूज और ब्लैक-हेडेड गल समेत कई दुर्लभ प्रजातियां देखी जाती हैं।
वेटलैंड का दर्ज़ा मिलना एक महत्वपूर्ण कदम : डीएफओ
चित्रकूट के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) प्रत्यूष कटियार ने चित्रकूट के बड़ा तालाब और सिंघानिया तालाब को वेटलैंड के रूप में अधिसूचित किए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि चित्रकूट एक शुष्क क्षेत्र है। इस कारण यहां तापमान काफी ज़्यादा रहता है। इसे देखते हुए उन्होंने यहां के कुछ वेटलैंड्स को वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम-2017 के तहत कानूनी संरक्षण के लिए प्रस्ताव भेजा था। इनमें से दो तालाबों को शासन की ओर से यह दर्ज़ा मिल गया है। पिछले दस वर्षों में गर्मी में यहां का औसत तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज़ किया गया है। इसे देखते हुए यहां के वनों और वेटलैंड्स का संरक्षण ज़रूरी है।
उन्होंने बताया कि वन विभाग अब दोनों वेटलैंड का सीमांकन कराएगा। साथ ही सीमा स्तंभ, सूचना बोर्ड, जैव विविधता पंजिका और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से संरक्षण योजना लागू की जाएगी। प्रशासन की योजना यहां वाच टावर, नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग प्वाइंट विकसित कर इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की भी है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
डीएफओ ने कहा कि आगे उनका प्रयास रहेगा कि इन वेटलैंड्स को बर्ड साइट्स या पक्षी विहार के रूप में विकसित किया जा सके। जिससे पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को यहां सुरक्षित आवास मिल सके और चित्रकूट को भी विदेशी प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थल के रूप में देश-दुनिया में बड़ी पहचान मिल सके।
चित्रकूट के वरिष्ठ पत्रकार ज़िआ उल हक़ ने बताया कि चित्रकूट के कई तालाबों और आर्द्रभूमियों को संरक्षित वेटलैंड का दर्ज़ा देने की मांग स्थानीय पर्यावरणविदों द्वारा काफी समय से की जा रही थी। ताकि, पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र के लिहाज़ से महत्वपूर्ण इन स्थलों को कानूनी सुरक्षा मिल सके और इन्हें पेड़ों की कटाई और भूमाफिया व बालू माफिया की कुदृष्टि से बचाया जा सके। बड़ा तालाब और सिंघानिया तालाब को यह दर्ज़ा मिल गया है। आने वाले समय में कई अन्य साइट्स के लिए भी ऐसी ही अधिसूचना जारी होने की उम्मीद की जा रही है।
आंकड़ों में चित्रकूट के वेटलैंड
जिले से भेजे गए वेटलैंड प्रस्ताव : 8
स्वीकृत प्रस्ताव : 2 (बड़ा तालाब व सिंघानिया तालाब)
बड़ा तालाब क्षेत्रफल : 3.7980 हेक्टेयर
सिंघानिया तालाब क्षेत्रफल : 8.3450 हेक्टेयर
वेटलैंड के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र : 50 मीटर परिधि
जिले में कुल संभावित वेटलैंड : लगभग 20
प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की प्रजातियां : 40 से अधिक
चित्रकूट के बड़ा तालाब और सिंहानिया तालाब को वेटलैंड का दर्ज़ा मिलने से यहां की जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षण मिल सकेगा।
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दोनों वेटलैंड्स से जल, जैव विविधता को मिलेगी सुरक्षा
पर्यावरणविद गुंजन मिश्रा ने इस बारे में इंडिया वाटर पोर्टल से बात करते हुए कहा कि चित्रकूट के सिंघानिया तालाब और बड़ा तालाब को राज्य संरक्षित वेटलैंड का दर्ज़ा मिलना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में इन आर्द्रभूमियों का संरक्षण क्षेत्र की जैव विविधता, जल और स्थानीय आर्थिक सुरक्षा, को भी मजबूत करेगा।
वेटलैंड्स के महत्व और पर्यावरण में उनकी भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वेटलैंड प्रकृति के “प्राकृतिक जल बैंक” हैं। ये हजारों प्रकार के जीव-जंतुओं, पक्षियों और वनस्पतियों को एक सुरक्षित आवास देकर संरक्षण और जीवन प्रदान करते हैं। ये वर्षा जल को संचित करते हैं, भूजल का पुनर्भरण (रिचार्ज) करते हैं। साथ ही यह बाढ़ और सूखे के प्रभाव को भी कम करते हैं। वेटलैंड्स पर सुदूर देशों से प्रवासी पक्षियों का आगमन न केवल जैव विविधता का संकेत है, बल्कि यह बताता है कि यह क्षेत्र अभी भी प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध है। यदि स्थानीय समुदाय, प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञ मिलकर इन वेटलैंड्स का संरक्षण करें, तो चित्रकूट भविष्य में उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख इको-टूरिज्म (Eco-tourism) और पक्षी संरक्षण केंद्र बन सकता है। इससे पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। इस तरह चित्रकूट के ये वेटलैंड हमें यह संदेश देते हैं कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि जल, आजीविका, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का भी प्रश्न हैं। यही सच्चे अर्थों में सतत विकास और प्रकृति से प्रेरित विकास का मार्ग हैं।
8 वेटलैंड्स के प्रस्ताव में केवल 2 को मिली मान्यता
चित्रकूट जिला प्रशासन ने जिले की आठ महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को राज्य संरक्षित वेटलैंड घोषित किए जाने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा था। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर इन दोनों वेटलैंड्स के लिए प्रारंभिक अधिसूचना 2 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित की गई है। इससे स्पष्ट है कि प्रस्ताव और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया इससे पहले पूरी की जा चुकी थी तथा राज्य स्तर पर विचार के बाद ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी हुआ। लंबी परीक्षण एवं अधिसूचना प्रक्रिया के बाद फिलहाल सिंघानिया तालाब और बड़ा तालाब को ही राज्य संरक्षित वेटलैंड का दर्ज़ा मिला है। इन दोनों के लिए प्रारंभिक अधिसूचना अक्टूबर 2025 में जारी की गई थी। प्रशासन को उम्मीद है कि भविष्य में शेष प्रस्तावित आर्द्रभूमियों को भी संरक्षण की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है
क्यों खास हैं चित्रकूट के ये वेटलैंड
चित्रकूट विंध्य क्षेत्र का हिस्सा है और यहां के जलाशय सर्दियों में आने वाले कई प्रवासी पक्षियों को आश्रय देते हैं। चित्रकूट के यह दोनों तालाब केवल जलस्रोत नहीं बल्कि जैव विविधता के बड़े केंद्र हैं। गर्मी में भूजल रिचार्ज और खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने के साथ ये प्रवासी पक्षियों का प्रमुख पड़ाव भी हैं। संरक्षण मिलने से इनके प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। यहां जल, उथले किनारे, जलीय वनस्पतियों और आसपास का अपेक्षाकृत शांत वातावरण की मौजूदगी पक्षियों के भोजन, विश्राम और प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करता है। संरक्षण का दर्ज़ा मिलने से इन आवासों पर मानव दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
जलवायु और पर्यावरण की दृष्टि से देखा जाए, तो चित्रकूट बुंदेलखंड के जल संकट वाले जिलों में आता है। हाल के वर्षों में यहां गर्मी भी रिकॉर्ड तोड़ने लगी है। इसकी वजह पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और अवैध रेत खनन के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन को बताया जा रहा है। चित्रकूट से सटे बांदा जिले में पिछले दिनों तापमान के नए रिकॉर्ड दर्ज किए गए। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 20 मई 2026 को बांदा में 48.2 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड तापमान दर्ज़ किया था। इसके साथ ही दुनिया का सबसे गर्म शहर बनकर उभरा था। तेज धूप, उमस भरी प्रचंड गर्मी और लू के गर्म थपेड़ों के कारण लोग दिनभर परेशान रहे। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए आप हमारी स्टोरी यूपी के बांदा में क्यों टूट रहा गर्मी का रिकॉर्ड? भट्ठी बना बुंदेलखंड, IMD ने जारी किया 'रेड अलर्ट’ को पढ़ सकते हैं।
दोनों तालाबों को वेटलैंड दर्ज़ा मिलने के बाद क्या बदलेगा?
वेटलैंड घोषित होने के बाद इन तालाबों के आसपास की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ जाएगी। वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम-2017 के तहत ऐसे क्षेत्रों में अतिक्रमण, कचरा डंपिंग, जल निकासी में बदलाव और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे तालाबों का प्राकृतिक स्वरूप और जैव विविधता सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
संरक्षित वेटलैंड बनने से तालाबों की सफाई, निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन की संभावना बढ़ती है। इससे मत्स्य संसाधन, भूजल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी को लाभ मिल सकता है। यदि भविष्य में इको-टूरिज्म या बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियां विकसित होती हैं, तो स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
चित्रकूट वन क्षेत्र के डीएफओ प्रत्यूष कटियार ने बताया कि बड़ा तालाब और सिंहानिया तालाब को वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम-2017 के तहत अधिसूचना जारी का संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।
फोटो : ज़िआ उल हक़
बुंदेलखंड में वेटलैंड संरक्षण का महत्व
बुंदेलखंड लंबे समय से जल संकट और सूखे की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में तालाब और आर्द्रभूमियां केवल जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि भूजल पुनर्भरण, वर्षाजल संचयन और स्थानीय जल सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक तालाबों का संरक्षण क्षेत्र की जल उपलब्धता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
आर्द्रभूमियां प्राकृतिक "कार्बन सिंक" का काम करती हैं। वे मिट्टी और वनस्पतियों में कार्बन को लंबे समय तक संग्रहित रख सकती हैं, जिससे वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा कम करने में मदद मिलती है। इसलिए वेटलैंड संरक्षण को जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति का भी हिस्सा माना जाता है।
यूपी में बढ़ा वेटलैंड संरक्षण : एटा, अलीगढ़ के पक्षी विहार बने रामसर स्थल
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में कई प्राकृतिक और मानव निर्मित जलाशयों की पहचान कर उन्हें संरक्षित वेटलैंड के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। चित्रकूट के दो तालाबों का चयन इसी व्यापक संरक्षण अभियान का हिस्सा माना जा सकता है। चित्रकूट के दो तालाबों को संरक्षित वेटलैंड घोषित करने से पहले इस वर्ष यूपी के दो पक्षी विहारों को राष्ट्रीय स्तर का रामसर स्थल घोषित किया जा चुका है। बीते फरवरी माह के अंतिम सप्ता में उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर के पास स्थित पटना पक्षी विहार (Patna Bird Sanctuary) को रामसर स्थल का दर्ज़ा दिया गया था। यह कदम एशियन वाटरबर्ड सेंसस–26 की पहली गणना में पटना बर्ड सेंचुरी में प्रवासी पक्षियों की रिकार्ड मौजूदगी दर्ज किए जाने के बाद उठाया गया था। इस तरह यह पक्षी विहार उत्तर प्रदेश का 11वां रामसर स्थल बन गया और इसके साथ ही उत्तर प्रदेश का यह छोटा सा जिला पर्यावरण और पर्यटन के वर्ल्ड मैप पर आ गया। इस बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आप हाल ही में प्रकाशित हमारी स्टोरी रामसर स्थल 'पटना पक्षी विहार' : उत्तर प्रदेश में प्रकृति का छोटा सा स्वर्ग पढ़ सकते हैं। इसके अलावा अप्रैल में अलीगढ़ के शेखा पक्षी विहार (Shekha Bird Sanctuary) को अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट का दर्ज़ा मिल गया। र्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई रामसर सूचना पत्रक (आरआईएस) के आधार पर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसी के तहत रामसर सचिवालय ने शेखा पक्षी विहार को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह उत्तर प्रदेश का 12वां रामसर स्थल बन गया। आप हाल ही में प्रकाशित हमारी स्टोरी अलीगढ़ का शेखा पक्षी विहार बना अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट, यूपी में इको टूरिज़्म को मिलेगा बढ़ावा को पढ़कर इस बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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