लोक संस्कृति

चवदार जलाशय से पानी लेने का अधिकार आंदोलन की तस्वीर
नवरात्र में स्‍थापित कलश के चारों ओर अंकुरित जौ प्रकृति व हरियाली से प्रेम और उसके संरक्षण का संदेश देते हैं। 
बैलों से चलने वाले पत्‍थर  के कोल्‍हू में कुछ इस तरह की जाती थी गन्‍ने और सरसों की पेराई
तमिलनाडु के कांचीपुरम का एकंबरेश्वर और तिरुचिरापल्ली का जम्बुकेश्वर जैसे मंदिरों की बनावट यह समझने में मदद करती है कि आस्था और विज्ञान मिलकर जल प्रबंधन की ऐसी टिकाऊ प्रणालियां बना सकते हैं।
हलमा की प्राचीन परंपरा के तहत सामूहिक श्रमदान के जरिये रतलाम की बजाना तहसील के तीन गांवों के अदिवासियों ने सुख चुके पानी के नालों को फिर से खोद कर जलाशय तैयार किया। 
कश्मीर के सीढ़ीदार खेतों में धान के सूखते हुए गट्ठर हैं। पहाड़ों पर सूरज की छाया पड़ रही है, जबकि घाटी मौसम के अलग-अलग रंगों से गुलज़ार है।
कैबार्ता जैसे समुदायों के लिए ब्रह्मपुत्र सिर्फ़ एक नदी नहीं, ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी करने वाली एक सतत धारा है।
इमेज क्रेडिट: शरत चंद्र प्रसाद
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