जल संरक्षण

उत्तराखंड की झील
ट्रैश बूम बरियर एक सरल और कम-खर्च वाली तकनीक है जो शहर के जल-परिस्थितिकी तंत्र को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण समाधान बनकर उभर रही है।
टोंटियों में एरेटर लगाने से पानी का प्रेशर घटाए बिना ही बहाव कम हो जाता है, जिससे पानी की खपत घटती है और अच्‍छी खासी मात्रा में पानी की बचत होती है।
हैदराबाद जैसे शहरों में कुछ लोग हाशिए पर रहते हुए भी चुपचाप काम करते रहते हैं, ताकि शहर का सिस्टम खराब होने पर भी सभी घरों तक पानी पहुंचता रहे।
त्रिपुरा में बारिश के पानी को सोख्‍ता गड्ढे के ज़रिये ज़मीन में पहुंचा कर भूजल को रीचार्ज करने की कोशिश।
हर व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में, सुरक्षित पानी मुहैया करवाने के साथ ही उसके किफ़ायती और पहुंच में होने जैसी शर्तें एसडीजी 6 के मूल तत्व हैं।
संयुक्‍त राष्‍ट्र के सहयोग से भारतीय स्‍कूलों में आयोजित जलदूत कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को एक सीमित संसाधन के रूप में पानी के महत्‍व के बारे में समझाया गया।
हरियाणा के यमुना नगर ज़िले में 1999 में हथिनीकुंड बैराज का निर्माण ब्रिटिश काल में बने पुराने ताजेवाला हेडवर्क की जगह किया गया था।
Read More
India Water Portal - Hindi
hindi.indiawaterportal.org