जल संरक्षण

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में नौला सदियों से जल संरक्षण की एक अद्भुत पारंपरिक प्रणाली रही है।
विश्व जल दिवस की शुरुआत किसी एक देश या संस्था की पहल नहीं, बल्कि उस दौर की बढ़ती वैश्विक चिंताओं का नतीजा है।
राजस्थान में मिट्टी और पत्थर की मदद से बनाया गया छोटा सा तालाब जोहड़।
ढलान वाले इलाकों में बारिश के पानी को रोक कर जल संरक्षण करने में कंटूर ट्रेंचिंग की विधि काफी मददगार और असरदार साबित होती है। 
हलमा की प्राचीन परंपरा के तहत सामूहिक श्रमदान के जरिये रतलाम की बजाना तहसील के तीन गांवों के अदिवासियों ने सुख चुके पानी के नालों को फिर से खोद कर जलाशय तैयार किया। 
क्या पाइप से आने वाला पानी वास्तव में सुरक्षित है? अगर नहीं, तो इस सुरक्षा का क्या मतलब है? 
उत्तराखंड की झील
ट्रैश बूम बरियर एक सरल और कम-खर्च वाली तकनीक है जो शहर के जल-परिस्थितिकी तंत्र को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण समाधान बनकर उभर रही है।
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