जल संरक्षण

आजादी के 79 साल : खाद्यान्‍न उत्‍पादन में तो भारत आत्मनिर्भर हो गया है, पर ‘जल-सुरक्षा' के मामले में स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
प्राचीन भारत में जल संसाधनों का प्रबंधन, पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियां और महत्व
प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग और संरक्षण के विभिन्न प्रयास
वर्षाजल संचयन: जल संरक्षण की सबसे प्रभावी और टिकाऊ तकनीक
रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षाजल संचयन) कोई नई तकनीक नहीं है। भारत के कई हिस्सों में लोग सदियों से छतों का पानी टंकियों, कुंडों और भूमिगत जलाशयों में जमा करते रहे हैं।
कुईं
बारिश का स्‍तर मापने का सर्वाधिक प्रचलित उपकरण यह बेलनाकार वर्षामापी है, जबकि भूजल रिचार्ज स्‍ट्रक्‍चर के ज़रिये ज़मीन के भीतर जाने वाले वर्षा जल को मापने के लिए फ्लो मीटर का इस्‍तेमाल किया जाता है।
ढलानों पर कंटूर ट्रेंच बनाने से बारिश का पानी बह कर बर्बाद होने के बजाय उसमें जमा होकर भूजल को रिचार्ज करता है।
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