हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन की अवधि तो बढ़ रही है, पर समग्र रूप से बरसात कम हो रही है। हिमाचल और जम्मू कश्मीर में स्थित मौसम विभाग के ज्यादातर स्टेशन पिछले करीब तीन दशक से तापमान में बढ़ोत्तरी की प्रवृत्ति के बारे में बता रहे हैं।
शिमला :
“ठंड के मौसम में अनियमित जलवायु दशाओं का असर पुष्पण एवं फलों के विकास पर पड़ता है, जिसके कारण सेब का उत्पादन कम हो रहा है।”
“वर्ष 2005 से 2014 के दौरान इस क्षेत्र में सेब का उत्पादन 0.183 प्रति हेक्टेयर की दर से प्रतिवर्ष कम हो रहा है। पिछले बीस वर्षों के दौरान यहाँ सेब की उत्पादकता में कुल 9.405 टन प्रति हेक्टेयर की कमी आई है। सेब उत्पादन के लिये उपयुक्त माने जाने वाले स्थान अब शिमला के ऊँचाई वाले क्षेत्रों, कुल्लू, चंबा और किन्नौर एवं स्पीति के शुष्क इलाकों तक सिमट रहे हैं।”
“फसलों की बढ़ोत्तरी, उत्पादन और गुणवत्ता को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाने के लिये गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। रूपांतरण तकनीकों के विकास और बागवानी फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव के सही आकलन के साथ-साथ किसानों को इसके बारे में जागरूक किया जाना भी जरूरी है।”
“हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन की अवधि तो बढ़ रही है, पर समग्र रूप से बरसात कम हो रही है। हिमाचल और जम्मू कश्मीर में स्थित मौसम विभाग के ज्यादातर स्टेशन पिछले करीब तीन दशक से तापमान में बढ़ोत्तरी की प्रवृत्ति के बारे में बता रहे हैं। जबकि श्रीनगर और शिमला में बर्फबारी में कमी देखी जा रही है। बर्फबारी की अवधि भी धीरे-धीरे कम हो रही है।”
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भाषांतरण : उमाशंकर मिश्र
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