नदीहिरनी की तरह मेरे पास आई।हवा कस्तूरी-सी चारों तरफ फैल गई।मैं जैसे कि हर वस्तु से अमरता की तरह गुजराऔर सात्विक कटाक्ष की तरह सँवर गया।‘बूँद की यात्रा’ संग्रह से.लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें