पुस्तकें

लम्बा घूँट

Author : प्रेमशंकर शुक्ल

घूँघट के ओट से ही
उसने लम्बा घूँट भरा

झरने ने सुन लिया
और मारे खुशी के
छल-छला कर,
झर-झरा कर
नहला दिया सारा पहाड़

बिरला ही जानता है
यह संगीत है
जिसमें प्यार बजता है
(अविराम-अभिराम!)

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