अमेजन के जंगल
फोटो - विकी कॉमन्स
पृथ्वी के तापमान में होती वृद्धि का असर हम सभी आये दिन हीटवेव के रूप में देख रहे हैं। हिमालय और एल्प्स की चोटियों से लेकर अंटार्कटिका की बर्फीली चट्टानों तक असर दिख रहा है। इससे अमेजन के जंगल भी अछूते नहीं रहे हैं। जी हां तापमान में 1.5 डिग्री तक वृद्धि होना तय है यह बात तमाम वैज्ञानिक मान चुके हैं अब अगर 2 डिग्री बढ़ा तब क्या होगा? बात अमेजन फॉरेस्ट की करें तो इसके दो तिहाई जंगल 2 डिग्री की बढ़त के पहले ही नष्ट हो जाएंगे।
पोट्सडैम इंस्टिट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (पीआईके) के ताज़ा अध्ययन में पता चला है कि जिस रफ्तार से अमेजन के जंगल काटे जा रहे हैं, उससे यह साफ है कि बढ़ते तापमान के साथ रेन फॉरेस्ट से डीग्रेडेड फॉरेस्ट यानि सूखे जंगलों में तब्दील हो जाएंगे।
अध्ययन में कहा गया है कि आने वाले समय में अमेजन फॉरेस्ट का हाल सवानाह जैसा होगा। वर्तमान में अमेजन वर्षा वन में वर्ष भर भारी वर्षा होती है। पीआईके के वैज्ञानिक निको वंडरलिंग का कहना है कि पेड़ों को काटे जाने की वजह से अमेजन के जंगल अब कमोजर पड़ गए हैं। ये वन अब सूखने लगे हैं। अगर ये पहले की तरह होते तो पृथ्वी के तापमान में वृद्धि को सह सकते थे, लेकिन अब मुश्किल है। अब तापमान में थोड़ी सी भी वृद्धि इस वन के लिए नुकसानदेह होगी।
निको वंडरलिंग ने आगे कहा कि अमेजन के जंगल का 17 से 18 प्रतिशत भाग खत्म हो चुका है। अगर वनों का क्षरण जारी रहा और अगर 22 से 28 प्रतिशत जंगल नष्ट हो गए और पृथ्वी का तापमान 1.9 डिग्री तक चला गया तो उस दशा में अमेजन का दो-तिहाई हिस्सा सूखे जंगलों जैसा हो जाएगा।
यह अध्ययन अब तक का सबसे विस्तृत आकलन प्रस्तुत करता है कि कैसे तापमान वृद्धि और वनों की कटाई एक साथ मिलकर अमेजन की स्थिरता को प्रभावित कर रहे हैं।
अमेजन वर्षावन
इस अध्ययन में जलवायु पूर्वानुमान, जल-वैज्ञानिक (हाइड्रोलॉजिकल) मॉडलिंग और वायुमंडलीय नमी के परिवहन का नेटवर्क आधारित विश्लेषण शामिल किया गया है।
नीदरलैंड के यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक एरी स्टाल के अनुसान वैश्विक तापवृद्धि और वनों की कटाई अमेजन प्रणाली में वर्षा को प्रभावित करती है। जब अमेजन के किसी एक हिस्से में वनों की कटाई नमी के प्रवाह को बाधित करती है, तो सैकड़ों या यहां तक कि हजारों किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्र सूखे की चपेट में आने लगता है और अपनी स्थिरता खोने लगता है।”
अमेजन अपने वर्षा चक्र का एक हिस्सा स्वयं उत्पन्न करता है। इसकी लगभग आधी वर्षा उन पेड़ों द्वारा पुनर्चक्रित जल से आती है, जो वायुमंडल में जलवाष्प छोड़ते हैं और बाद में यही बारिश के रूप में वापस गिरती है। जब वर्षावन नष्ट होते हैं, तो नमी का यक चक्र कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में सूखे का दबाव बढ़ता है और अन्य वन क्षेत्र भी क्षरण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इन सबका मुख्य कारण वनों के क्षरण है।
वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया है कि वनों की कटाई को रोकना और वन आवरण को पुनर्स्थापित करना अमेजन की उस स्थिरता को मजबूत कर सकता है, जो बढ़ते तापमान के बावजूद आवश्यक है।
पीआईके के निदेशक और इस अध्ययन के सह-लेखक जोहान रॉकस्ट्रॉम के नुसार अब तक अमेजन वर्षावन पृथ्वी की जलवायु प्रणाली को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह कार्बन सिंक, नमी पुनर्चक्रण का नियंत्रक और भूमि पर सबसे समृद्ध जैव विविधता का घर है। लगातार हो रही वनों की कटाई इस स्थिरता को कमजोर कर रही है और जंगल को एक खतरनाक ‘टिपिंग पॉइंट’ के करीब ले जा रही है। इसका असर न केवल इस क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा, बल्कि पूरी पृथ्वी पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। यानि अमेजन के जंगलों की कटाई को हर हाल में रोकना होगा।
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें