इंडिया वाटर पोर्टल
पानी से जुड़ी जानकारी केवल फाइलों या अंग्रेजी भाषा तक सीमित न रहे, बल्कि देश के हर नागरिक की अपनी भाषा में उपलब्ध हो, इसी संकल्प के साथ इंडिया वाटर पोर्टल और टाटा ट्रस्ट्स ने हाथ मिलाया है। अर्घ्यम द्वारा संचालित यह पोर्टल अब अपनी नई रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से हिंदी और अन्य क्षेत्रीय स्तरों पर जल-संवाद को और अधिक प्रभावी बनाएगा। विश्वसनीय डेटा, जमीनी कहानियाँ और विशेषज्ञ विश्लेषण अब और भी सुलभ होंगे, ताकि एक जल-सुरक्षित भारत का सपना साकार हो सके।
इंडिया वाटर पोर्टल देश में पानी और उससे जुड़े मुद्दों पर जानकारी उपलब्ध कराने वाले शुरुआती और महत्त्वपूर्ण डिजिटल मंचों में से एक है। इसकी शुरुआत 2007 में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की पहल पर हुई थी। इसे एक ऐसे खुले और भरोसेमंद नॉलेज प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया, जहां पानी से जुड़ी जानकारी हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं में सभी के लिए उपलब्ध हो सके।
अर्घ्यम एक फाउंडेशन है जिसकी स्थापना रोहिणी नीलेकनी ने 2001 में की थी। यह संस्था पानी और स्वच्छता के मुद्दों पर काम करने पर केंद्रित है।
पिछले कई वर्षों में इंडिया वाटर पोर्टल एक ऐसे मंच के रूप में विकसित हुआ है जिसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह मंच विश्वसनीय शोध, जमीनी अनुभव, नीतिगत विश्लेषण और समुदायों की आवाज़ों को एक साथ लाने का काम करता है। इसके माध्यम से भारत के जल परिदृश्य को समझने और इस पर सार्वजनिक चर्चा को मजबूत बनाने में मदद मिली है।
टाटा ट्रस्ट्स भारत की प्रमुख समाजसेवी संस्थाओं में से एक है और देश के विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान की दिशा में काम करती है। इस संस्था ने इंडिया वाटर पोर्टल को और मजबूत बनाने तथा उसके काम को आगे बढ़ाने के लिए इसमें निवेश किया है। तीन साल की इस साझेदारी का उद्देश्य पोर्टल की पहुँच बढ़ाना, इसकी उपयोगिता को मजबूत करना और इसके प्रभाव को व्यापक बनाना है।
एक मंच के रूप में इंडिया वाटर पोर्टल का उद्देश्य यह है कि पानी से जुड़ी जानकारी केवल बड़े शहरों या अंग्रेज़ी समझने वाले लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। इसी कारण पोर्टल की हिंदी वेबसाइट की भूमिका खास हो जाती है। अपने हिंदी मंच के माध्यम से यह पोर्टल पानी से जुड़ी जानकारी को हिंदी भाषी लोगों तक अधिक व्यापक रूप से पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस पहल की एक अहम विशेषता देशभर में क्षेत्रीय जल-कहानीकारों (वॉटर स्टोरीटेलिंग फेलोज़) का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करना भी है, और इस दिशा में काम पहले ही शुरू हो चुका है।
2025 में फेलोज़ के पहले समूह को मेंटरशिप दी गई। इस दौरान चयनित फेलोज़ ने जम्मू एवं कश्मीर, भारत के पूर्वोत्तर राज्य, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से पानी से जुड़ी कई जमीनी कहानियों को सामने लाने का काम किया।
ये कहानियां अलग-अलग भौगोलिक इलाकों में पानी से जुड़ी वास्तविकताओं को उजागर करती हैं, चाहे वह ग्लेशियरों का पिघलना हो, भूजल पर बढ़ता दबाव, या फिर स्थानीय स्तर पर काम कर रहे लोगों की पहल और समुदायों के प्रयास।
विभिन्न जिलों और दूर-दराज़ इलाकों की वे कहानियां, जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चा में जगह नहीं बना पातीं हैं, इस फेलोशिप के ज़रिये व्यापक सार्वजनिक मंच तक पहुंच रही हैं। इस तरह यह पहल ज़मीनी अनुभवों को नीति और जल क्षेत्र की बड़ी चर्चाओं से जोड़ने का काम कर रही है।
यह साझेदारी टाटा ट्रस्ट्स और अर्घ्यम की उस साझा सोच को दर्शाती है, जिसके तहत पानी के क्षेत्र में मजबूत और भरोसेमंद ज्ञान तंत्र तैयार करना जल-सुरक्षा की दिशा में एक अहम आधार माना जाता है। अर्घ्यम अपने लंबे समय से चले आ रहे उस विज़न के तहत इंडिया वाटर पोर्टल का संचालन और सहयोग जारी रखे हुए है, जिसका लक्ष्य हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित और टिकाऊ जल उपलब्ध कराना है।
इस साझेदारी पर बात करते हुए अर्घ्यम के अनुज शर्मा ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल दुनिया तेजी से बदली है और जानकारी पाने-समझने का तरीका भी काफी बदल गया है। ऐसे समय में टाटा ट्रस्ट्स जैसी अनुभवी संस्था के साथ साझेदारी हमारी इस यात्रा को और मजबूत बनाएगी। यह सहयोग हमारे उस साझा संकल्प को भी आगे बढ़ाएगा, जिसके तहत हम ज्ञान को सबके लिए खुला और आसानी से समझ आने वाला बनाना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हम साथ मिलकर इंडिया वाटर पोर्टल को जल क्षेत्र की एक साझा संपदा के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। एक ऐसा सार्वजनिक डिजिटल मंच, जो न केवल जानकारी दे बल्कि लोगों को जोड़े और भारत के जल भविष्य पर सकारात्मक असर भी डाल सके।
हम साथ मिलकर इंडिया वाटर पोर्टल को जल क्षेत्र की एक साझा संपदा के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। एक ऐसा सार्वजनिक डिजिटल मंच, जो लोगों को न केवल जानकारी दे, बल्कि लोगों को एक साथ लाए और भारत के जल भविष्य पर सकारात्मक असर डाल सके।
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